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कहां हैं किसानों को कोसने वाले, अब नहीं जल रही पराली फिर भी दिल्ली में AQI क्यों है 400 के पार?
Chandigarh-City News in Hindi

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: December 13, 2019, 6:04 PM IST
कहां हैं किसानों को कोसने वाले, अब नहीं जल रही पराली फिर भी दिल्ली में AQI क्यों है 400 के पार?
साल में दो-चार दिन ही दिल्ली की हवा अच्छी रहती है (File Photo)

जब पराली जलाने के लिए किसानों पर एफआईआर (FIR) हो सकती है तो इस समय दिल्ली को प्रदूषित करने वालों पर क्यों नहीं: देविंदर शर्मा

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  • Last Updated: December 13, 2019, 6:04 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए किसानों को पानी पीकर कोसने वालों के लिए एक खबर है. इस समय हरियाणा, पंजाब और एनसीआर में कहीं भी पराली (Parali) नहीं जल रही है, लेकिन बृहस्पतिवार (12 दिसंबर) को दिल्ली की हवा बेहद खराब (Severe) थी. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 430 रिकॉर्ड किया गया. हवा की गुणवत्ता बताने वाले यहां के 35 स्टेशनों के आंकड़ों का यह औसत है. सवाल यह है कि इतने प्रदूषण स्तर पर जो लोग नवंबर में इसके लिए गुनहगार ठहरा रहे थे वो नेता, अधिकारी और पर्यावरणविद् इस समय कहां हैं.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक दिल्ली में 11 दिसंबर को एयर क्वालिटी इंडेक्स 408, 10 को 369 जबकि 9 को 343 था. इस समय पूरे हरियाणा, पंजाब और यूपी में गेहूं की बुआई हो रही है. पराली जलने की कोई घटना नहीं रिकॉर्ड की गई है फिर भी दिल्ली प्रदूषित है. लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि नवंबर में दिल्ली के प्रदूषण को लेकर रोने वाले लोग अब मौन हैं. उन्हें इसकी वजह जरूर तलाशनी चाहिए. ताकि दिल्ली के लोग साल भर प्रदूषित हवा से राहत पा सकें.

वायु प्रदूषण की निगरानी करने वाली पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की संस्था सफर (SAFAR) की रिपोर्ट के मुताबिक बारिश के बाद भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब है.

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सीपीसीबी ने बताया कैसी है दिल्ली की हवा


प्रदूषण फैलाने वालों पर एफआईआर क्यों नहीं?

सवाल यह है कि इस समय प्रदूषण बढ़ाने का खलनायक कौन है? कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का कहना है जिन लोगों ने किसानों पर पराली जलाने के आरोप में एफआईआर करके उन पर जुर्माना लगाया या जेल भेजा है उन्हें नैतिक रूप से अब उन लोगों पर भी एफआईआर दर्ज करनी चाहिए जिनकी वजह से इस समय दिल्ली प्रदूषित है. दरअसल, किसान सबसे कमजोर है जिसे कोई भी दबा देता है.

शर्मा कहते हैं कि दिल्ली-एनसीआर के अधिकारी अपनी गलतियों और कमियों को छिपाने के लिए किसानों को गुनहगार बताकर बच निकलते हैं. अब सरकार इन अधिकारियों से सवाल करे कि आखिर किसकी वजह से इतना प्रदूषण है. सरकारी एजेंसियों के आंकड़े बता रहे हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. इसके लिए रोड साइड की धूल, कंस्ट्रक्शन, एसयूवी और कॅमर्शियल वाहन वाहन बड़े कारण हैं.आईआईटी की रिपोर्ट को नजरंदाज करती सरकार

दिल्ली के प्रदूषण पर वर्ष 2016 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (आईआईटी), कानपुर ने एक स्टडी की थी. इसकी रिपोर्ट दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को सबमिट (सौंपी) की गई थी. यह रिर्पोट सार्वजनिक है. इसमें बताया गया है कि यहां प्रदूषण के लिए कौन कितना जिम्मेदार है.

>>पीएम10 (पीएम यानी पर्टिकुलेट मैटर, ये हवा में वो पार्टिकल होते हैं जिस वजह से प्रदूषण फैलता है) में सबसे ज्यादा 56 फीसदी योगदान सड़क की धूल का है.

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बारिश के बाद 13 दिसंंबर को भी दिल्ली में प्रदूषण


दिल्ली के लोग हैं दिल्ली के प्रदूषण की वजह

पर्यावरणविद् एन. शिवकुमार कहते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए सिर्फ कोई और नहीं बल्कि दिल्ली के लोग ही जिम्मेदार हैं. यदि पराली जलना बंद होने के बाद भी प्रदूषण कायम है तो संबंधित अधिकारियों को जवाब देना चाहिए. वो हरियाणा, पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते. यहां हमेशा नियमों को ताक पर रखकर सरकारी और निजी दोनों कंस्ट्रक्शन चलता रहता है. हम रोड साइड धूल कभी नहीं उठाते. उद्योगों में कोयला और पेटकोक का इस्तेमाल जारी है.

क्या होता है एयर क्वालिटी इंडेक्स

प्रदूषण की समस्या मापने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स बनाया गया. इंडेक्स बताता है कि हवा में पीएम-10, 2.5, PM10, PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) सहित 8 प्रदूषकों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किए गए मानकों के तहत है या नहीं.

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First published: December 13, 2019, 5:27 PM IST
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