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around 1900 children went missing in delhi in four months says delhi police

दिल्ली: 4 महीने में गायब हो गए 1900 बच्चे, पुलिस ने इतनों को ढूंढ निकाला

अलपुझा के रहने वाले राजू का 7 साल का बेटा राहुल 2005 में गुम हो गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

अलपुझा के रहने वाले राजू का 7 साल का बेटा राहुल 2005 में गुम हो गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली पुलिस की ओर से जारी डेटा से पता चला है कि पिछले चार महीनों में शहर में 1879 बच्चे लापता हुए. लापता बच्चों में सबसे अधिक 12-18 साल की उम्र के थे और इस आयु के कुल लापता बच्चों की संख्या करीब 1,583 थी. हालांकि, दिल्ली पुलिस 1178 बच्चों को भी ट्रैक करने में सफल रही है.

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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में बीते चार महीनों में करीब 1900 बच्चे लापता हुए हैं, जिनमें से केवल आधे को ही अब तक ढूंढा जा सका है. हाल ही में दिल्ली पुलिस की ओर से जारी डेटा से पता चला है कि पिछले चार महीनों में शहर में 1879 बच्चे लापता हुए. लापता बच्चों में सबसे अधिक 12-18 साल की उम्र के थे और इस आयु के कुल लापता बच्चों की संख्या करीब 1,583 थी. हालांकि, दिल्ली पुलिस 1178 बच्चों को भी ट्रैक करने में सफल रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, 12-18 साल के एज ग्रुप में गायब होने वाले बच्चों की संख्या इस साल पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2% बढ़ी है. वहीं, 0-8 वर्ष आयु वर्ग में 138 बच्चों के लापता होने के साथ ही पिछले वर्ष की तुलना में 10% की कमी आई है. इस साल बीते चार महीनों में 8 से 11 वर्ष की आयु के बीच 158 बच्चे लापता हुए. वहीं, अलग-अलग एज ग्रुप में पुलिस ने 980, 92 और 106 बच्चों का पता लगाया.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि लापता व्यक्ति और चेहरे की पहचान प्रणाली सॉफ्टवेयर ‘जिपनेट’ गायब बच्चों का पता लगाने में मदद करता है. इतना ही नहीं, बच्चों को खोजने के लिए पुलिस की टीमें अक्सर दूसरे राज्यों का दौरा करती थीं और शेल्टर होम की तलाशी लेती थीं. पुलिस का कहना है कि ज्यादातर मामलों में बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के थे. एक अधिकारी ने बताया कि कभी-कभी परिवारों के पास बच्चों की तस्वीरें भी नहीं होती हैं, इसलिए हमें अन्य सुरागों की मदद से उनकी तलाश करनी पड़ती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 12-18 साल के बच्चों के लापता होने की बात करते हुए बाल कल्याण समिति के एक सदस्य ने खुलासा किया कि हमारी समिति को रिपोर्ट किए गए ऐसे अधिकांश मामलों में बच्चे लड़की की वजह से घर छोड़कर भागे पाए गए. इतना ही नहीं, माता-पिता की ओर से देखभाल की कमी भी एक कारण था. साथ ही माता-पिता अपने बच्चों में व्यवहार परिवर्तन या अपने बच्चों के प्रति बाहरी लोगों के व्यवहार को नोटिस करने में भी विफल रहे हैं. बच्चों के घर छोड़ने का एक और बड़ा कारण कुछ जगहों के प्रति उनका आकर्षण है.

हाल ही में एक मामले में क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने अलीपुर की दो लापता बहनों को मुंबई से ट्रैक किया, जहां वे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने गई थीं. दोनों ने इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार और उनका पता लगाने वाले कांस्टेबल सुकन्या को बताया कि वे मुंबई की जीवनशैली से आकर्षित थीं और इस वजह से घर से निकल गईं थीं.

Tags: Delhi news

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