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Farmer Protest: किसान आंदोलन स्थल पर गर्मी से बचने के किए इंतजाम, लगाया बड़ा टेंट, जुटने लगी है किसानों की भीड़!

संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की सुविधा के लिए टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था कर दी है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की सुविधा के लिए टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था कर दी है.

Farmer Protest : धरने पर किसानों की मौजूदगी कम नजर आने के बारे में किसान नेताओं का कहना है कि किसान आंदोलन (Kisan Andolan) स्थल से कहीं नहीं चले गए थे. धूप तेज होने के कारण आंदोलनकारी छांव में इधर उधर चले जाते थे. जैसे ही अब मंच के सामने टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था हो गई है, फिर आंदोलनकारियों की संख्या मंच के सामने नजर आने लगी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 10:00 PM IST
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नई दिल्ली. तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस करने की मांग पर अड़े किसानों ने अब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर धरने में आने वाले किसानों को गर्मी से बचाने का इंतजाम कर लिया है. लगातार बदल रहे मौसम के चलते अब गर्मी पड़ने लगी है. ऐसे में किसानों का धरना स्थल पर बैठना थोड़ा मुश्किल हो गया है.


इसके चलते अब संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की सुविधा के लिए टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था कर दी है. टेंट लगने के बाद आज धरना स्थल पर किसानों की तादाद भी काफी नजर आई.


मोर्चा का कहना है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर संचालित संयुक्त किसान धरने पर मंच के आगे टेंट लग कर तैयार हो गया है. इसके बाद मंच के सामने किसानों की मौजूदगी भी बढ़ गई है.


धरने पर किसानों की मौजूदगी कम नजर आने के बारे में किसान नेताओं का कहना है कि किसान आंदोलन (Kisan Andolan) स्थल से कहीं नहीं चले गए थे. धूप तेज होने के कारण आंदोलनकारी छांव में इधर उधर चले जाते थे. जैसे ही अब मंच के सामने टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था हो गई है, फिर आंदोलनकारियों की संख्या मंच के सामने नजर आने लगी है.




किसान नेताओं का कहना है कि किसान ने टेंट लगाकर धूप की चुनौती का सामना करने का जुगाड़ ठीक उसी तरीके से कर लिया है जैसे वह अपने खेत में आमतौर पर करता रहता है.


उधर, भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) की ओर से आव्हान किया गया है कि किसान अपने खेत पर भी नजर रखें और आंदोलन पर भी. नंबर-बारी से आंदोलन स्थल पर आएं और उसी क्रम में अपने खेत का काम भी देखते रहे हैं. आंदोलन स्थल पर जब संख्या बढाने की जरूरत होगी, बता दिया जाएगा. यह भी किसान का चुनौती का सामना करने का मैनेजमेंट है.
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