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संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा- अरविंद केजरीवाल ने पहले ही पढ़ दी थी हनुमान चालीसा
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News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 2:51 PM IST
संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा- अरविंद केजरीवाल ने पहले ही पढ़ दी थी हनुमान चालीसा
News 18 के कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने पढ़ी थी हनुमान चालीसा.

तमाम विघ्न बाधा से निपट कर केजरीवाल ने खुद को धुरंधर राजनेता साबित कर दिया. हनुमान चालीसा पढ़ कर ही वे नहीं रुके. आखिरी दिन जाकर मंदिर में हनुमान जी से प्रार्थना भी कर ली. यही नहीं लौट कर बता भी दिया कि हनुमान जी ने उनसे कह दिया है चिंता मत करना.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 2:51 PM IST
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हनुमान जी हर परेशानी दूर कर देते हैं. बोर्ड की परीक्षा की तैयारी करने वाला विद्यार्थी हो या फिर मेहनत रियाज कर पहलवान बनने वाला नौजवान हो. अपने देश में हनुमान जी के आशीर्वाद के बगैर कुछ नहीं होता. भारतीय समाज में इस मान्यता को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने इस दौर की राजनीति में हनुमान जी के महत्व को आंक लिया था. केजरीवाल ने इसे भी समझ लिया था कि चुनावी बाधा-विघ्न से निपटने के लिए भी हनुमान चालीसा 'अमोघ' हो सकता है. हो सकता है ये सब समझने के बाद ही उन्होंने न्यूज 18 के एक कार्यक्रम में बाकायदा ध्यान लगा कर हनुमान चालीसा का पाठ भी कर दिया था. हालांकि उसी कार्यक्रम में उन्होंने ये साफ कर दिया था कि वे हनुमान भक्त हैं.

धुरंधर राजनेता के तौर पर उभरे
दरअसल, इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी केजरीवाल जनता की नब्ज को समझने वाले एक धुरंधर नेता के तौर पर उभरे हैं. इस चुनाव में उन्होंने अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता को बखूबी दिखा दिया. हनुमान चालीसा जैसे लोकप्रिय प्रार्थना पढ़ कर कैसे मतदाताओं के एक बड़े वर्ग से सीधे जुड़ा जा सकता है, इस बात को उन्होंने समझ लिया था. चुनाव में जो पार्टी उनके सामने ताकत के साथ है, उसे उसके ही मुद्दों से जवाब दिया जा सकता है. जैसा कि वे खुद आंदोलन के यज्ञ से नेता के तौर पर उभरे हैं, लिहाजा शाहीन बाग से उनका रिश्ता होता ही है. फिर भी उन्होंने साफ तौर पर संकेत कर दिया कि शाहीन बाग का समर्थन तो वे करते हैं, लेकिन वहां जाएंगे नहीं. केजरीवाल समझ चुके थे कि उन्होंने शाहीन बाग इलाके में पैर डाला नहीं कि उन पर मुल्ला होने का आरोप आयद कर दिया जाएगा. उन्हें हिंदू विरोधी घोषित कर दिया जाएगा. उनकी राह कठिन हो जाएगी.

शाहीन बाग से बने 'नायक'

यहां तक कि उन्होंने शाहीन बाग के विरोध का अपने लिए कुछ इस तरह से इस्तेमाल किया जो उनकी छवि के अनुकूल था. दरअसल केजरीवाल ने खुद को समानांतर फिल्मों के नायक की तरह खड़ा किया है. वो नायक जो किसी भी तरह से सुपर ह्यूमन नहीं है. बल्कि व्यवस्था के आगे लाचार है. उन्होंने कह दिया अगर पुलिस उनके पास होती तो एक दिन में शाहीन बाग को हटवा देते. ये दीगर बात है कि उन्हें पूरी तरह यकीन था कि शाहीन बाग के समर्थक आखिरकार उन्हीं के समर्थक हैं. शाहीन बाग के आंदोलनकारियों का साथ देते हुए भी किसी भी तरह से उन्होंने हिंदू वोटों को नहीं छोड़ा. हनुमान चालीसा पढ़ कर ही वे नहीं रुके. आखिरी दिन जाकर मंदिर में हनुमान जी से प्रार्थना भी कर ली. यही नहीं लौट कर बता भी दिया कि हनुमान जी ने उनसे कह दिया है 'चिंता मत करना'. कोई चाहे तो उनके इस दावे का खंडन भी कर सकता. फिर भी ये तो मानना ही होगा कि केजरीवाल ने इससे अपने अभियान को आगे ही बढ़ाया. इसके साथ ही विरोधियों की ओर से लगाए जा सकने वाले बहुत सारे आरोपों की संभावनाओं पर भी विराम लगा दिया.

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छवि को कायम रखाअगर इस पूरी कवायद को किसी प्रतीक के तौर पर देखना हो तो केजरीवाल की रणनीति साफ दिखती है. उन्हें पता है कि अपने देश में लोग अब अपने जैसे ही किसी को नेता के तौर पर देखना चाहते हैं. आंदोलन के बाद से जिस तरह की छवि केजरीवाल ने अपने लिए चुनी, वो लगातार इसी तरह की रही. एक आम आदमी की तरह, जो वीआईपी कल्चर के विरुद्ध है. शुरुआती दौर में केजरीवाल में एक उग्रता या कहा जाए व्यग्रता दिखती रही. इस चुनाव में उन्होंने इस आकुलता को भी उतार फेंका. पूरे चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी पर कोई हमला नहीं किया. जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे... वाले हनुमान जी के सिद्धांत को उन्होंने किनारे ही रखा. हमला करने पर जनता से अपनी बात कह कर आगे बढ़ गए. आतंकवादी वाले मसले पर बोले, लेकिन सिर्फ इतना ही कि लोगों में संदेश जाए कि वे किस तरह उन्हीं के जैसे अपने माता-पिता के साथ है.

चाल, चरित्र, चेहरा कुछ भी नहीं बदला
हो सकता है दूसरे बहुत से राजनेता इस तरह के सहज दांव-पेंच को जानते-समझते हों, लेकिन व्यवहार में इसे उतार पाना आसान नहीं है. किसी संगठन को लीड करते हुए तो इस तरह की राह पर चल पाना और कठिन है. वैसे भी 10 साल सत्ता में रहने के बाद चाल-चरित्र और चेहरे पर बहुत असर पड़ जाता है. इन सारी बाधाओं को केजरीवाल ने बखूबी पार किया है और अपनी राजनीतिक ताकत दिखा दी है.

(डिस्क्लेमरः लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं.)

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First published: February 11, 2020, 2:21 PM IST
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