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Delhi Election Result 2020: विश्वास पर खरे उतरे केजरीवाल, जनता ने फिर दिया मौका
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Updated: February 11, 2020, 1:50 PM IST
Delhi Election Result 2020: विश्वास पर खरे उतरे केजरीवाल, जनता ने फिर दिया मौका
दिल्ली की जनता ने तीसरी बार फिर जताया केजरीवाल पर भरोसा (डिजाइन इमेज)

अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने पांच साल पहले जो सपना दिखाया था, अब जनता उस पर आश्वस्त है जिस कारण अब अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की गद्दी पर बैठने जा रहे है.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 1:50 PM IST
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नई दिल्ली. वर्ष 2015 में दिल्ली की राजनीति (Politics Of Delhi) के सबसे नए खिलाड़ी अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने इतिहास रच दिया था. 54 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर और 70 में से 67 सीटें जीतकर दूसरी बार दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनाई थी. लेकिन इस बार की उनकी जीत 2015 की जीत से काफी बड़ी और कई संदेश समेटे हुए है. वर्ष 2015 की जीत जनता को दिखाए एक सपने की जीत थी, लेकिन पांच साल सरकार चलाकर फिर शानदार जीत हासिल करना एक विश्वास की जीत है. जाहिर है अरविंद केजरीवाल ने पांच साल पहले जो सपना दिखाया था, अब जनता उस पर आश्वस्त है जिस कारण अब केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की गद्दी पर बैठने जा रहे हैं.

जन विचारधारा की राजनीति
राजनीति में अक्सर राजनीतिक दलों की एक विचारधारा होती है. लेफ्ट-राइट के बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने खुद के लिए एक ऐसी विचारधारा चुनी जो जनता से जुड़ी रही. जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का बिल आता है तो AAP उसके समर्थन में दिखाई देती है, CAA बिल आता है तो AAP उसके खिलाफ हो जाती है. यानी साफ है कि न तो वो पूरी तरह से लेफ्ट की विचारधारा के साथ है और ना ही पूरी तरफ से राइट दिखाई देना चाहती है. फिर चुनाव प्रचार की शुरुआत में ही अरविंद केजरीवाल का जनता से ये कहना कि अगर उनकी सरकार ने काम किया हो तो उन्हें वोट देना और अगर लगता है कि काम नहीं किया तो वोट नहीं देना, बेहद साहसिक बयान था. कोई भी राजनीतिक दल ये नहीं बोला होगा कि अगर उन्होंने काम नहीं किया तो वोट न दें. पूरे चुनाव प्रचार में अरविंद केजरीवाल ने अपनी सरकार के जनता के लिए किये गए कार्यों को मुद्दा बनाया और जन-जन तक इसे पहुंचाने में भी कामयाब रहे.

ना हिंदू दिखने से परहेज, ना मुस्लिम तुष्टिकरण के संदेश

चुनाव प्रचार के बीच में बीजेपी ने शाहीन बाग को बड़ा मुद्दा बनाने का भरसक प्रयास किया. लेकिन अरविंद केजरीवाल उसमें नहीं उलझे. सिर्फ इतना बोलते रहे कि शाहीन बाग के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. सड़क बंद होने से जनता को परेशानी हो रही है. लेकिन इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्री होने के नाते अमित शाह को प्रदर्शन कर रहे लोगों से बात करनी चाहिए और रास्ता खुलवाना चाहिए. जबकि इस मुद्दे पर मुस्लिम वोट कटने का खतरा था, क्योंकि कांग्रेस खुलकर प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में थी. बावजूद अरविंद केजरीवाल को विश्वास था कि ये वोट उन्हें ही मिलेंगे. साथ ही जब News 18 इंडिया के एक कार्यक्रम में उनसे हनुमान चालीसा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उसे सुनाने में परहेज नहीं किया. यही वो कदम था जब उन्होंने हिंदुत्व के बीजेपी की पिच पर जाकर बैटिंग की. खुद को हनुमान भक्त भी बताया और हनुमान मंदिर भी पहुंच गए.

महिलाओं के रूप में एक नए वोट बैंक की स्थापना
दिल्ली में DTC की बसों में महिलाओं के निशुल्क (मुफ्त) सफर का ऐलान करते वक्त कहीं ना कहीं अरविंद केजरीवाल के दिमाग में एक बड़ी योजना थी. वो जानते थे कि 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 20 हजार लीटर पानी मुफ्त का सबसे ज्यादा फायदा महिलाएं ही समझती हैं. ऐसे में उन्हें बस का मुफ्त सफर देकर अरविंद केजरीवाल ने उन्हें बड़े पैमाने पर अपनी ओर कर लिया. यही कारण रहा कि अरविंद केजरीवाल चुनाव प्रचार में बार-बार कहते रहे कि महिलाएं ही घर चलाती हैं. उन्हें मालूम है कि सरकार की इन योजनाओं से उनके घर के बजट को सीधा फायदा हो रहा है.मोदी से परहेज लेकिन बीजेपी की कमजोर कड़ी पर तीखा हमला
पिछले तकरीबन दो साल से अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमले पूरी तरह से बंद कर दिए थे. इसे पीछे उनकी सोची-समझी रणनीति थी. उन्हें समझ में आ गया था कि भले ही अनेक मुद्दों पर जनता की केंद्र सरकार से नाराजगी हो सकती है, लेकिन उनकी (पीएम मोदी) व्यक्तिगत छवि जनता के बीच अप्रतिम बनी हुई है. चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने पीएम मोदी पर हमला नहीं किया. लेकिन बिना CM उम्मीदवार के चेहरे के मैदान में उतरी बीजेपी पर उन्होंने कड़े प्रहार किए. बीजेपी की कमजोर कड़ी पर बार-बार हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर उनका उम्मीदवार कौन है.

जनता के साथ इमोशनल संबंध
चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने खुद को दिल्ली की जनता का बड़ा भाई, बड़ा बेटा कहकर जनता के साथ सीधा संबंध बना लिया. उन्होंने जनता के दिल से संबंध जोड़ते हुए बार-बार ये कहा कि जिस तरह से घर का बड़ा बेटा और बड़ा भाई सारी जिम्मेदारी निभाता है, उसी तरह वो भी अपने राज्य के लिए निभा रहे हैं. अगर कोई और सरकार आई तो बिजली, पानी, मुफ्त तीर्थ यात्रा जैसी योजनाएं उन्होंने शुरू की हैं, वो बंद हो जाएगी. यही नहीं जब बीजेपी के नेताओं ने उन्हें आतंकवादी कहा तो इसे भी जनता के बीच ले गए और कहा कि वही इस बात का फैसला करेगी कि बिजली, पानी, तीर्थ यात्रा करवाने वाला आतंकवादी है या उनका बड़ा भाई और बड़ा बेटा.

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First published: February 11, 2020, 1:21 PM IST
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