क्या है GNCTD बिल, जिसको लेकर आमने-सामने हैं दिल्ली सरकार और केंद्र

एनसीटी संशोधन बिल को लेकर आप और भाजपा नेताओं के बीच बयानबाजी जारी है. (File)

NCT Bill: दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से कई बार अधिकारों की जंग छिड़ चुकी है. इस बार टकराव का कारण लोकसभा में पेश किया गया राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संशोधन विधेयक बन रहा है.

  • Share this:
नई दिल्ली. दिल्ली की केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार एक बार फिर आमने-सामने नजर आ रही है. इस बार टकराव का कारण सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संशोधन विधेयक बन रहा है. इस विधेयक में उपराज्यपाल की भूमिका को मजबूत करने की बात कही गई है और दिल्ली सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी होगी. जाहिर है कि संसद से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ये विधेयक कानून की शक्ल ले लेगा और दिल्ली के शासन-प्रशासन में उपराज्यपाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से कई बार अधिकारों की जंग छिड़ चुकी है लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बैंच और 2019 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बैंच का फैसला आने के बाद लगा था कि ये मसला अब सुलझ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने उन फैसलों में राज्य
सरकार और उपराज्यपाल के अधिकारों को परिभाषित कर दिया था. लेकिन अब एक बार फिर ये मसला गर्माता हुआ दिखाई दे रहा है. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संशोधन विधेयक पेश किया. केंद्रीय मंत्रिमंडल से पारित इस विधेयक के कानून बनने के बाद उपराज्यपाल की शक्तियों में काफी इजाफा हो जाएगा.



दिल्ली की आम आदमी पार्टी का आरोप है कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद दिल्ली में सरकार का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक विधेयक में कहा गया है कि सरकार का मतलब उपराज्यपाल होगा और हर काम के लिए दिल्ली सरकार को पहले उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी होगी. ऐसे में चुनी हुई सरकार की जरूरत ही नहीं है. नए विधेयक के मुताबिक दिल्ली सरकार को अपने हर फैसले को लागू करवाने से पहले उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी होगी. यानी की दिल्ली में निर्वाचित सरकार के 'सुपर बॉस' उपराज्यपाल होंगे.

इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच पहले भी काफी टकराव हो चुका है. मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट साल 2018 और 2019 में दिए अपने फैसलों में उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के अधिकारों को परिभाषित किया था. इन फैसलों के बाद लगा था कि मामला सुलझ गया है,
लेकिन अब इस विधेयक के संसद में आने के बाद मामला और ज्यादा गर्माता हुआ दिखाई दे रहा है. दिल्ली सरकार अब इस मामले के कानूनी पहलुओं को देखने में जुट गई है. उसके मुताबिक इस विधेयक से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने की कोशिश की जा रही है और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की
संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं.

हालांकि बीजेपी का दावा है कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है और कार्य सरलता के साथ हों, इसी नीयत के साथ ये विधेयक लाया गया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आरपी सिंह का कहना है कि केजरीवाल सरकार का काम ही है, सिर्फ चिल्लाना. वो ये देख ही नहीं रहे कि किस नीयत से ये विधेयक लाया जा रहा है. दिल्ली की समस्याओं को दूर करने में जो दिक्कते आती हैं, उनको दूर करने के लिए ये विधेयक लाया गया है.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.