गुरुग्राम: अपनों के इंतजार में शमशान घाट में अस्थियां, अब नगर निगम करेगा विसर्जन

मंदनपुरी शमशान घाट के अस्थि गृह में तकरीबन 350 से ज्यादा अस्थियों के लगे ढेर

मंदनपुरी शमशान घाट के अस्थि गृह में तकरीबन 350 से ज्यादा अस्थियों के लगे ढेर

गुरुग्राम के शमशान घाट में अस्थियों का ढेर लगा हुआ है. जो कभी अपने थे प्यारे थे, आज दीवारों पर सिर्फ नाम बन कर लटके हैं और विसर्जन का इंतज़ार कर रहे हैं. नगर निगम अब इनका विधिवत अंतिम संस्कार और विसर्जन कर रहा है.

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गुरुग्राम. कोरोना संक्रमण के दौरान लोग एक दूसरे से दूर ही रहे ताकि परिवार के किसी और सदस्य को ये वायरस अपनी चपेट में ना ले ले. अगर किसी मरीज़ की मौत हुई तो अपनो का कंधा भी नसीब नही हुआ और शमसान घाट में अंतिम संस्कार के लिए भी घंटो का इंतज़ार करना पड़ा. लेकिन इसके बाद भी मुक्ति नही मिली. मृतकों की अस्थियां अपनों का इंतज़ार कर रही हैं और ये इंतज़ार कब खत्म होगा ये भी कोई नहीं जानता. गुरुग्राम के शमसान घाट में अस्थि गृह पूरी तरह से भर चुका है. अस्थियों को पॉलीथिन या बैग में भरकर दीवारों पर लटका दिया गया है ताकि किसी का परिजन अगर अपनों की अस्थियों को लेने आये तो ले जा सके. शमशान घाट में अस्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है जबकि उन्हें लेने आने वाले बहुत ही कम लोग है. अब नगर निगम के लोग ही इन अस्थियों को गंगा या जमुना में विसर्जित करने में आगे है.

सनातन धर्म मे आस्था है कि जब भी किसी की मौत होती है तो परिजन मृतक के अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को गंगा में विसर्जित करते हैं. कहा जाता है कि मृतक को तभी मुक्ति मिलती है लेकिन कोरोना की इस महामारी में मरने वाले लोगों को ना तो अपनों का कंधा नसीब हो रहा है. ना ही अपने उनकी अस्थियों को विसर्जित कर पा रहे हैं. डॉक्टर भी कई बार कह चुके है कि अस्थियों से कोरोना होने की कोई संभावना नहीं है. बावजूद इसके लोगों में डर ही है जिसके चलते लोग अपनो की ही अस्थियां नहीं ले जा रहे. इन अस्थियों को अपनों का इंतज़ार है.

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