बदलते मौसम में अस्थमा के बढ़ने लगे मरीज़
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बदलते मौसम में अस्थमा के बढ़ने लगे मरीज़
ठंड के आते ही काफी बदलाव देखने को मिलते है. यह मौसम सेहत बनाने के लिए जितना अच्छा होता है. सांस के मरीजों के लिए उतना ही परेशान करने वाला भी.

ठंड के आते ही काफी बदलाव देखने को मिलते है. यह मौसम सेहत बनाने के लिए जितना अच्छा होता है. सांस के मरीजों के लिए उतना ही परेशान करने वाला भी.

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ठंड के आते ही काफी बदलाव देखने को मिलते है. यह मौसम सेहत बनाने के लिए जितना अच्छा होता है. सांस के मरीजों के लिए उतना ही परेशान करने वाला भी.

ठंड में सर्दी, जुकाम और जोड़ों में दर्द के साथ-साथ सांस की परेशानी का बढ़ना बहुत आम बात है. ऐसे में अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में बेहद सतर्क और सावधान रहने की जरुरत है. खासतौर पर बच्चे इस मौसम में सबसे ज्यादा प्रभावित होते है. स्मॉग का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है.

गुडगांव में इन दिनों धुंध के साथ साथ प्रदूषण जिसे स्मॉग भी कहते है. स्मॉग की वजह से अस्थमा के मरीज़ बढ़ रहे है. गुडगांव के फोर्टिस अस्पताल में सीनियर कंसलटेंट और पीडियॉट्रिक पुलमोनोलॉजी डिवीज़न की नीतू तलवार की माने तो   सर्दियों का मौसम स्वास्थ्य के हिसाब से अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ खास व्याधियों जैसे अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर से ग्रसित व्यक्तियों के लिए यह मौसम कुछ समस्याएं भी लाता है. यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है.



बच्चों में एलर्जी लक्षणों को नोटिस करना चाहिए और डॉक्टर को बताना चाहिए साथ ही पीक ऑवर जब ट्रैफिक ज्यादा होता है तब बच्चों को बाहर कम निकालना चाहिए. साथ ही घर में कारपेट की सफाई का ध्यान रखना चाहिए. घर में परफ्यूम, रूम फ्रेश्नर का कम इस्तेमाल करना चाहिए. बच्चों को ठण्ड से भी बचना चाहिए ताकि बीमार बच्‍चों को एलर्जी ज्यादा जल्दी होती है.
 
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