दिल्लीः पति के खिलाफ 60 साल की बुजुर्ग पहुंची कोर्ट, कहा- 31 साल तक बर्दाश्त किया, अब नहीं…

कोर्ट ने कहा कि इस उम्र में पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का आरोप लगाना शर्मनाक है. (सांकेतिक फोटो)
कोर्ट ने कहा कि इस उम्र में पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का आरोप लगाना शर्मनाक है. (सांकेतिक फोटो)

अदालत (Court) ने दोनों पक्षों को कहा कि वे सुनवाई पर बेवजह तारीखें लेना बंद करें. अन्यथा उन पर अदालत का समय व असुविधा के लिए एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2020, 1:52 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अजीबोगरीब मामला समने आया है. यहां की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) में एक महिला ने शादी के 31 साल बाद घरेलू हिंसा (Domestic violence) का मुकदमा दर्ज कराया है. महिला का कहना है कि वह पिछले 31 साल से अपने खिलाफ हो रहे पारिवारिक अत्याचार को सहन कर रही है. लेकिन अब उससे ये सब बर्दाश्त नहीं होगा. उसे हर हाल में न्याय चाहिए. वहीं, महिला ने कोर्ट में कहा है कि उसके दो बच्चे हैं. अब दोनों की शादी हो गई है और वे अपने- अपने घरों में खुशी-खुशी रह रहे हैं. अब उन्हें बच्चों की परवरिश की कोई चिंता नहीं है. आत्मनिर्भर न होने की वजह से वह इतने सालों से जुल्म सहती रही, पर अब और नहीं. मुझे बस इंसाफ चाहिए. खास बात यह है कि महिला की उम्र 60 साल के करीब है.

तीस हजारी कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला अदालत को निर्देश दिए कि वह गुजाराभत्ता पर तत्काल फैसला करे, पीड़ित महिला को तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा की अदालत ने यह निर्देश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक, आरोपी पति ने कोर्ट में अपनी पत्नी की याचिका को खारिज करने की अपील की है. उसका कहना है कि उसकी पत्नी पिछले कुछ समय से उससे अलग गाजियाबाद में रह रही है. इसलिए इस मामले को यहां नहीं सुना जाना चाहिए. हालांकि, इस पर अदालत ने पति को फटकार लगाई.

घरेलू हिंसा का आरोप लगाना शर्मनाक है
कोर्ट ने कहा कि इस उम्र में पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का आरोप लगाना शर्मनाक है. अदालत ने कहा कि पिछले 31 साल से दोनों दिल्ली में रह रहे हैं. महिला के साथ घरेलू हिंसा भी दिल्ली में ही हो रही थी. फिर मुकदमा दिल्ली में ही क्यों नहीं चलना चाहिए? न्यायालय ने कहा कि महिला को इस उम्र के शांति चाहिए, लेकिन अभी भी उसके साथ कथित तौर पर घरेलू हिंसा हो रही है. अदालत ने दोनों पक्षों को कहा कि वे सुनवाई पर बेवजह तारीखें लेना बंद करें. अन्यथा उन पर अदालत का समय व असुविधा के लिए एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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