Ayodhya Case: मुस्लिम पक्षकार बोले- नहीं छोड़ेंगे ज़मीन पर अपना दावा
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Ayodhya Case: मुस्लिम पक्षकार बोले- नहीं छोड़ेंगे ज़मीन पर अपना दावा
केस में शामिल एक पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में हलफनामा देते हुए केस से हटने की बात कही है. File Photo )

मुस्लिम पक्षकारों (Muslim Party) का आरोप है कि मध्यस्था पैनल ((Mediation)) का गठन करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त आदेश दिए थे कि इससे जुड़ी कोई भी जानकारी लीक (Leak) नहीं होनी चाहिए. फिर ये कैसे हो गया.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 5:02 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या ज़मीन विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर मुस्लिम पक्षकारों (Muslim Party) ने साफ किया कि वो ज़मीन पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं. साथ ही उन्होंने मध्यस्था की जानकारी सार्वजनिक होने पर आपत्ति जताई. मुस्लिम पक्षकारों ने मीडिया (Media) को एक साझा बयान जारी करते हुए मध्यस्था (Mediation) कमेटी के सदस्य श्रीराम पांचू की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए है.

पहले राउंड की मध्यस्थता के बाद नहीं गए बैठक में
मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि पहले राउंड की मध्यस्थता विफल होने के बाद मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्था में जाना बन्द कर दिया था. दूसरे राउंड कि मध्यस्था में सिर्फ सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुकी, निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास और हिन्दू महासभा के चक्रपाणि गए थे.

रिपोर्ट लीक होने पर जता रहे शक



मुस्लिम पक्षकरों का कहना है कि मध्यस्था में दिए गए प्रस्ताव की जानकारी सिर्फ सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुकी, निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास और हिन्दू महासभा के चक्रपाणि को थी. या फिर मध्यस्था पैनल को. ऐसे में मध्यस्था से जुड़ी जानकारी कैसे सार्वजनिक हुई. ये बात प्रेस में कैसे गई की मुस्लिम पार्टी ज़मीन पर दावा छोड़ने को तैयार हो गई है. ये कोर्ट की अवहेलना है.



श्रीराम पांचू की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए
खबर 16 अक्टूबर को लीक हुई और 17 अक्टूबर को जफर रिज़वी ने इसकी पुष्टि सोच समझ कर की. 16 अक्टूबर को श्रीराम पांचू सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे और जफर रिज़वी के संपर्क में थे. मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि जिस तरह से मध्यस्था पर आखरी दिनों में काम किया गया है उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. और ना ही ज़मीन से दावा छोड़ने की बात में कोई सच्चाई है. उनका कहना है कि ये एक रिप्रेजेंटेटिव सूट है इसलिए कोई भी फैसला अकेला एक व्यक्ति नहीं ले सकता.

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