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गृह मंत्रालय में अलग से देखे जाएंगे राम मंदिर निर्माण से जुड़े मामले, बनी अयोध्या डेस्क
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Updated: January 3, 2020, 12:28 PM IST
गृह मंत्रालय में अलग से देखे जाएंगे राम मंदिर निर्माण से जुड़े मामले, बनी अयोध्या डेस्क
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गृह मंत्रालय में अयोध्या डेस्क का गठन किया गया है (फाइल फोटो)

ये अयोध्या डेस्क सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) को पांच एकड़ जमीन देने, मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन और उसके बाद ट्रस्ट को जमीन का मालिकाना हक ट्रांसफर करने जैसे सभी मामले को भी देखेगी

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  • Last Updated: January 3, 2020, 12:28 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण से जुड़े मामलों को अलग से देखा जाएगा. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) में विशेष अयोध्या डेस्क (Ayodhya Desk) बनाई गई है. मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव को इसका प्रमुख बनाया गया है. खास बात है कि यही डेस्क सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) को पांच एकड़ जमीन देने, मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन और उसके बाद ट्रस्ट को जमीन का मालिकाना हक ट्रांसफर करने जैसे सभी मामले भी देखेगी. बता दें कि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तीन महीने में ट्रस्ट का गठन किए जाने के आदेश दिए थे.

यह तीन लोग देखेंगे अयोध्या डेस्क का काम

गृह मंत्रालय (MHA) ने बीते 31 दिसंबर को एक आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक ये अयोध्या डेस्क तीन सदस्यीय होगी. डेस्क का काम देखने के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख विभाग के प्रमुख अतिरिक्त सचिव के अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख विभाग के ही संयुक्त सचिव और राष्ट्रीय एकता विभाग के उप सचिव को इसका जिम्मा दिया गया है. खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर विभाग के प्रमुख के रूप में ज्ञानेश कुमार ने पांच अगस्त को राज्य के विभाजन और अनुच्छेद 370 और 35-ए को हटाने में अहम भूमिका निभाई थी. आदेश में कहा गया है कि यह डेस्क अब अयोध्या से जुड़े सभी मामले और उससे संबंधित अदालती आदेशों को भी देखेगी.



ट्रस्ट में शामिल हो सकते हैं ये 11 लोग



मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के स्वरूप पर हालांकि कोई फैसला नहीं हुआ है. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि ट्रस्ट 11 सदस्यीय हो सकता है. इसमें सरकारी प्रतिनिधि के रूप में अयोध्या के जिलाधिकारी (डीएम) या फैजाबाद के कमिश्नर को स्थान दिया जाएगा. इसके साथ ही केंद्र सरकार के एक अधिकारी को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्मोही अखाड़े के एक प्रतिनिधि को सदस्य बनाने का निर्देश दिया है. किसी ऐसे व्यक्ति को इसमें स्थान नहीं मिलेगा, जो मंदिर निर्माण के लिए अपना पूरा समय नहीं दे पाए. सरकार के सामने ट्रस्ट की स्वायत्तता पहली प्राथमिकता है, ताकि भविष्य में इसका बेजा इस्तेमाल नहीं हो सके. ट्रस्ट के गठन और मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन का काम भी देखेंगे.

पार्टी का कोई नेता ट्रस्ट में नहीं हो सकेगा शामिल

बीजेपी के स्तर पर यह पहले ही साफ किया जा चुका है कि पार्टी का कोई भी नेता ट्रस्ट में शामिल नहीं होगा. यही नहीं विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी साफ कर दिया कि उसका कोई पदाधिकारी सीधे तौर पर ट्रस्ट का सदस्य नहीं बनेगा. लेकिन पिछले तीन दशकों से मंदिर निर्माण की तैयारी में जुटे रामजन्मभूमि न्यास को इसमें स्थान मिल सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था तीन माह का समय

बता दें कि नौ नवंबर, 2019 को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण की खातिर ट्रस्ट गठन के लिए तीन महीने का समय दिया था, जो नौ फरवरी को पूरा होने जा रहा है. जाहिर है सरकार के पास अब सिर्फ 38 दिन ही रह गए हैं. माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद कभी भी ट्रस्ट के गठन की घोषणा की जा सकती है. सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने गृह मंत्रलय को तीन जगहों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन सौंपने का सुझाव दिया है. अब डेस्क सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ सलाह-मशविरा कर इनमें से एक स्थान का चुनाव कर सकती है.

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First published: January 3, 2020, 11:50 AM IST
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