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Ayodhya Verdict: क्या था निर्मोही अखाड़े का दावा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

Ayodhya Verdict: क्या था निर्मोही अखाड़े का दावा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

Supreme Court on Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akhara) ने ‘राम लला’ का मुकदमा खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि अयोध्या में विवादित भूमि उसे दी जाए क्योंकि वह राम लला का एकमात्र उपासक है. हालांकि इससे जुड़े दस्तावेज मांगने पर अखाड़ा ने कहा था कि 1982 में एक डकैती पड़ी थी जिसमें रिकॉर्ड खो गए.

Supreme Court on Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akhara) ने ‘राम लला’ का मुकदमा खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि अयोध्या में विवादित भूमि उसे दी जाए क्योंकि वह राम लला का एकमात्र उपासक है. हालांकि इससे जुड़े दस्तावेज मांगने पर अखाड़ा ने कहा था कि 1982 में एक डकैती पड़ी थी जिसमें रिकॉर्ड खो गए.

Supreme Court on Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akhara) ने ‘राम लला’ का मुकदमा खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि अयोध्या में विवादित भूमि उसे दी जाए क्योंकि वह राम लला का एकमात्र उपासक है. हालांकि इससे जुड़े दस्तावेज मांगने पर अखाड़ा ने कहा था कि 1982 में एक डकैती पड़ी थी जिसमें रिकॉर्ड खो गए.

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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या (Ayodhya) मसले पर शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akhara) का दावा खारिज कर दिया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दो पक्षों राम लला विजराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलीलों पर फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने 40 दिन की सुनवाई के दौरान भी निर्मोही अखाड़े से कहा था कि शबैत (उपासक) का दावा कभी देवता के प्रतिकूल नहीं हो सकता. कोर्ट ने यह टिप्पणी निर्मोही अखाड़ा के उस दावे पर की थी जिसमें कहा गया था कि ‘राम लला’ का मुकदमा खारिज किया जाए और अयोध्या में विवादित भूमि उसे दी जाए क्योंकि वह राम लला का एकमात्र उपासक यानी ‘शबैत’ है.

    मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि निर्मोही अखाड़ा ‘राम लला विराजमान’ के मुकदमे को लड़ रहा है तो वह राम लला के स्वामित्व के खिलाफ जा रहा है. वो अदालत से देवता के मुकदमे को खारिज करने के लिए कह रहा है. निर्मोही अखाड़ा ने दावा किया था कि विवादित स्थल पर वह राम लला का एकमात्र ‘शबैत’ (राम लला के भक्त) हैं, जिस पर कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो अखाड़ा 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर स्वामित्व नहीं रख सकता.

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    हालांकि, निर्मोही अखाड़ा की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील जैन ने कोर्ट की टिप्पणी पर कहा था कि अखाड़ा ‘शबैत’ के नाते संपत्ति का कब्जेदार रहा है, इसलिए उसके अधिकार समाप्त नहीं हो जाते. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने अखाड़ा के वकील की बात पर आपत्ति उठाते हुए कहा था, ‘‘आप जब अपने खुद के देवता के मुकदमे को खारिज करने की मांग करते हैं तो आप उनके खिलाफ अधिकार मांग रहे हैं.’’
    जैन ने अदालत से कहा था कि राम लला की याचिका 1989 में आई थी लेकिन अखाड़े का 1934 से इस जगह पर कब्जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह दलील दी है कि देवता के हित में आदेश केवल उपासक के पक्ष में दिया जा सकता है.’’ जैन ने कहा था कि भगवान राम का जन्मस्थान ‘कानूनी व्यक्ति’ नहीं है जैसा कि दावा किया गया है और निर्मोही अखाड़ा को दलील पेश करने का हक है.


    इस पर अदालत ने निर्मोही अखाड़े के वकील जैन से कहा था कि ‘‘आपको अपने ‘शबैत’ के अधिकार साबित करने के लिए हमें साक्ष्य दिखाने होंगे. हमें उससे संबंधित प्रमाण दिखाइए.’’ इस पर जैन ने कहा था कि किसी अन्य पक्ष ने अखाड़ा के देवता के उपासक होने के दावे को चुनौती नहीं दी है. ‘‘मेरे पास मौखिक साक्ष्य (गवाह के) हैं, जिन्हें अन्य पक्षों ने चुनौती नहीं दी है.’’ उन्होंने यह भी कहा कि 1982 में एक डकैती पड़ी थी जिसमें अखाड़े के रिकॉर्ड खो गए थे.

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    सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को नहीं माना और शनिवार को अपने फैसले में अखाड़े का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निर्मोही अखाड़ा राम लला की मूर्ति का उपासक या अनुयायी नहीं है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित है.

     

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    Tags: Ayodhya, Ayodhya Land Dispute, Ayodhya Verdict, Babri Masjid Demolition Case, Ram Mandir

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