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सावधान: गिलोय के धोखे में कुछ और तो नहीं पी रहे आप, आयुष मंत्रालय से जानें असली-नकली में अंतर

सावधान: गिलोय के धोखे में कुछ और तो नहीं पी रहे आप, आयुष मंत्रालय से जानें असली-नकली में अंतर

आयुष मंत्रालय ने गिलोय के जैसे दिखने वाले उत्‍पादों के सेवन को लेकर चिंता व्‍यक्‍त की है.  photo-News18english

आयुष मंत्रालय ने गिलोय के जैसे दिखने वाले उत्‍पादों के सेवन को लेकर चिंता व्‍यक्‍त की है. photo-News18english

आयुष मंत्रालय का कहना है कि यह देखा गया है कि टिनोस्पोरा की विभिन्न प्रजातियां उपलब्ध हैं लेकिन केवल टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया यानि गिलोय या गुडुची का उपयोग चिकित्सा विज्ञान में किया जाना चाहिए. इसकी समतुल्‍य प्रजातियों के गुणों और रूपों में काफी अंतर है और वे नुकसानदेह हैं. इन्‍हें पहचानना जरूरी है.

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    नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी के बाद से ही देश में गिलोय (Giloy) के उत्‍पादों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जा रहा है. कोरोना से बचाव के लिए लोग अभी भी गिलोय का रस, गिलोय की बटी, गिलोय का काढ़ा आदि पी रहे हैं. हालांकि पोस्‍ट कोविड प्रभाव (Post Covid Effect) के रूप में सामने आ रहे मामलों के बाद अब आयुष मंत्रालय ने गिलोय यानि गुडुची (Guduchi) के उपयोग को लेकर चिंता व्‍यक्‍त की है. मंत्रालय का कहना है कि गुडुची उपयोग के लिहाज से बेहतर है लेकिन उसके धोखे में उसके जैसे उत्‍पादों का उपयोग शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है.

    आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) की ओर से अब गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) के उपयोग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर ध्यान दिया गया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि गुडुची के समान दिखने वाले पौधे जैसे टिनोस्पोरा क्रिस्पा आदि काफी हानिकारक हो सकते हैं. गुडुची एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है, जिसे गिलोय के नाम से जाना जाता है और आयुष प्रणालियों में लंबे समय से चिकित्सा के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है लेकिन अगर इसके बजाय किसी और उत्‍पाद का उपयोग नुकसान पहुंचा सकता है.

    गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) की सुरक्षा और प्रभावकारिता को प्रमाणित करने के लिए पीयर रिव्यू वाली अनुक्रमित पत्रिकाओं में अच्छी संख्या में अध्ययन प्रकाशित हुए हैं. इसके हेपाटो-सुरक्षात्मक गुण भी अच्छी तरह से स्थापित हैं. गिलोय अपने विशाल चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए जाना जाता है और इसके इस्तेमाल को विभिन्न लागू प्रावधानों के अनुसार नियमित किया जाता है. हालांकि कोविड के डर के चलते इसके जैसे उत्‍पादों का प्रयोग भी सामने आ रहा है.

    मंत्रालय का कहना है कि यह देखा गया है कि टिनोस्पोरा की विभिन्न प्रजातियां उपलब्ध हैं लेकिन केवल टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया का उपयोग चिकित्सा विज्ञान में किया जाना चाहिए. इसकी समतुल्‍य प्रजातियों के गुणों और रूपों में काफी अंतर है. जिसे पहचानना जरूरी है.

    ऐसा होता है असली गिलोय या गुडुची
    – यह रंग में हरा होता है.
    – इसमें छोटा घुमावदार निकला हुआ हिस्सा नहीं होता.
    – इसके तने में से दूध जैसा स्राव नहीं होता.
    – गिलोय के पत्‍ते दिल के आकार के होते हैं जो नीचे की तरफ घूमे हुए होते हैं.
    – इसकी पंखुड़ियों की संख्या छह होती है.
    – गुठलीदार फल (फलों का गुच्छा) गोलाकार या गेंद के आकार का और रंग में लाल होता है.

    ये है नकली गिलोय यानि टिनोस्पोरा क्रिस्पा
    . यह  रंग में धूसर होता है.
    . तने में छोटा घुमावदार निकला हुआ हिस्सा होता है.
    . इसके तने से दूध जैसा स्राव होता है.
    . इसके पत्‍ते दिल के आकार के होते हैं और नीचे की तरफ घूमे हुए नहीं होते हैं.
    . पंखुड़‍ियों की संख्या तीन होती है.
    . गुठलीदार फल या फलों का गुच्‍छा दीर्घवृत्ताभ या रग्बी गेंद के आकार की तरह नारंगी रंग का होता है.

    चिकित्‍सकीय परामर्श से दवा लेने की सलाह
    आयुष मंत्रालय का कहना है कि गुडुची एक सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है हालांकि एक योग्य, पंजीकृत आयुष चिकित्सक के परामर्श लेने के बाद ही इसके उपयोग की सलाह दी जाती है.

    मंत्रालय का कहना है कि आयुष के पास फार्माकोविजिलेंस (आयुष दवाओं से संदिग्ध प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की जानकारी देने के लिए) की एक अच्छी तरह से स्थापित प्रणाली है, जिसका नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है. अगर आयुष दवाओं के सेवन के बाद कोई संदिग्ध प्रतिकूल घटना होती है तो इसकी सूचना आयुष चिकित्सक के माध्यम से नजदीकी फार्माकोविजिलेंस सेंटर को दी जा सकती है. इसके अलावा यह सलाह दी जाती है कि आयुष दवा और उपचार केवल एक पंजीकृत आयुष चिकित्सक की देखरेख में एवं परामर्श से ही लें.

    Tags: Ayurvedic, Ayushman Bharat scheme, Corona Pandemic, Corona Virus

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