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अब आयुष आहार से भारत को स्‍वस्‍थ रखने की तैयारी, मंत्रालय करेगा ये काम

केंद्रीय आयुष मंत्रालय स्‍वस्‍थ भारत के लिए लोगों को आयुष आहार अपनाने की सलाह दे रहा है.

केंद्रीय आयुष मंत्रालय स्‍वस्‍थ भारत के लिए लोगों को आयुष आहार अपनाने की सलाह दे रहा है.

Ayush Aahar: आयुष मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज मंत्रालय को देश में आयुष आहार के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कहा है ताकि जंक फूड के चलते बीमारियों को चपेट में आ रहे युवाओं को स्‍वस्‍थ रखा जा सके. मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पांचों रिसर्च काउंसिल और दोनों राष्‍ट्रीय आयोगों के वैज्ञानिकों और अधिकारी इसके लिए रूपरेखा बनाकर अभियान चलाएंगे.

  • News18Hindi
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    नई दिल्‍ली. देश में कोरोना के बाद अब डेंगू, वायरल फीवर आदि बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं. ऐसे में बीमारियों के इलाज के अलावा लोगों को स्‍वस्‍थ रहने और स्‍वस्‍थ जीवनशैली अपनाने की भी सलाह दी जा रही है. बीमारियों के शिकार बनने से बचाने के लिए और लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने के लिए अब देश का आयुष मंत्रालय (Ayush ministry) लोगों को आयुष आहार (Ayush Aahar) अपनाने के लिए प्रेरित करने की तैयारी कर रहा है.

    आयुष मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने आज मंत्रालय को देश में आयुष आहार के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कहा है ताकि जंक फूड (Junk Food) के चलते बीमारियों को चपेट में आ रहे युवाओं को स्‍वस्‍थ रखा जा सके. इसके लिए मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पांचों रिसर्च काउंसिल और दोनों राष्‍ट्रीय आयोगों के वैज्ञानिकों और अधिकारियों को कदम उठाने के लिए कहा गया है.

    इसके लिए आयुष मंत्रालय केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) के पोषण अभियान (Poshan Abhiyan) के साथ मिलकर सुपोषित भारत के लक्ष्‍य को पूरा करने पर काम करेगा. साथ ही फूड सेफ्टी एंड स्‍टेंडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (fssai) के साथ मिलकर जारी किए गए ड्राफ्ट की गाइडलाइंस के अनुसार आयुष आहार को बढ़ाने के लिए काम करेगा.

    इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री ने जनकपुरी स्थित पांचों रिसर्च काउंसिलों आयुर्वेदिक (Ayurvedic), योगा (Yoga), नेचुरोपैथी (Naturopathy), यूनानी (Unani) और होम्‍योपैथी (Homeopathy) के वैज्ञानिकों से कहा है कि आयुष संबंधी सभी चीजें अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंचें, ऐसी व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए. इसके लिए वैज्ञानिक, प्रोफेसर, डॉक्‍टर, तकनीकी दक्ष लोगों की योग्‍यता को देशहित में इस्‍तेमाल किया जाए.

    सोनोबाल की ओर से काउंसिल को देश की जनजातियों के कल्‍याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर कहा गया है कि जनजातियों के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उनकी स्‍थानीय स्‍वास्‍थ्‍य परंपराओं को समझने की जरूरत है. यहां यह भी ध्‍यान देने की जरूरत है कि जनजातियां बिनी किसी मॉडर्न हेल्‍थकेयर सुविधा के भी स्‍वस्‍थ रहते हैं ऐसे में उनकी चीजों को और गहराई से समझना होगा.

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