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भीमा-कोरेगांव हिंसा: DU के प्रोफेसर के आवास पर पुणे पुलिस का छापा, नक्‍सलियों से संपर्क होने का संदेह

भीमा कोरेगांव हिंसा (फाइल फोटो)
भीमा कोरेगांव हिंसा (फाइल फोटो)

पुलिस ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के नक्‍सलियों से संबंध होने के संदेह पर यह छापेमारी की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2019, 4:53 PM IST
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नई दिल्ली. भीमा-कोरेगांव हिंसा (Bhima-Koregaon Violence) मामले में पुणे (Pune) और नोएडा पुलिस की संयुक्‍त टीम ने दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय (Delhi University) के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी की है. पुलिसकर्मियों ने नक्‍सलियों से संबंध होने के संदेह पर यह छापेमारी (Raid) की है. बता दें कि 1 जनवरी, 2018 को पुणे से सटे भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग जख्मी हुए थे. घायल होने वालों में 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे.

पुलिस को संदेह है कि हिंसा भड़काने के पीछे नक्‍सलियों का हाथ था.

पूरे एक साल से जेल में हैं
भीमा कोरेगांव हिंसा में मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता वेरनॉन गोंजाल्विस, पी वरावरा राव, अरुण फरेरा और पत्रकार गौतम नवलखा के भी नाम जुड़े हैं. इन सिलसिले में पुलिस इन सभी से पूछताछ कर चुकी है और कई लोग अभी जेल में हैं. वहीं सुधा भारद्वाज पिछले एक साल जेल में हैं. पिछले हफ्ते 6 सितंबर को सुधा भारद्वाज ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि वो पूरे एक साल से जेल में हैं और पुणे पुलिस उनके खिलाफ कोई भी ठोस साक्ष्य (सबूत) पेश करने में विफल रही है.
सुधा भारद्वाज ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दायर की है


भारद्वाज ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दायर की थी. उनके वकील युग चौधरी ने न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल को बताया कि पुलिस उनके खिलाफ मामले के लिए महज छह दस्तावेजों के भरोसे है, जिनमें से अधिकतर टाइप किए हुए पत्र हैं और उनमें से कुछ उनके नाम पर हैं. चौधरी ने दलील दी कि उनमें से कोई भी पत्र उनके द्वारा, उनके लिए नहीं लिखा गया है. यहां तक कि उनके कब्जे से भी नहीं मिला है इसलिए उनके आधार पर उन्हें (सुधा भारद्वाज) जमानत दिए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता.



वेरनॉन गोंजाल्विस की जमानत याचिका पर 29 अगस्त को सुनवाई हुई थी
वहीं, वेरनॉन गोंजाल्विस की जमानत याचिका पर बीते 29 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वेरनॉन गोंजाल्विस से कई सवाल पूछे थे. ये सवाल टॉलस्टॉय की किताब 'वॉर एंड पीस' समेत कई आपत्तिनजक चीजों के उनके पास पाए जाने को लेकर थे. कोर्ट ने उनसे पूछा कि आखिर उनके पास ये सारी चीजें क्यों थीं?

तब कहा गया था कि कोर्ट में जज ने कहा कि आपके घर में ये किताब क्यों थी? बाद में इस खबर को लेकर सफाई आई कि जज ने जिस किताब का जिक्र किया था वो लियो टॉल्सटॉय की वॉर एंड पीस नहीं बल्कि विश्वजीत रॉय कि किताब वॉर एंड पीस इन जंगलमहल है. माओवाद पर आधारित इस किताब को लेकर जज ने आरोपी वेरनॉन गोंजाल्विस से सवाल पूछे थे.

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