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JNU हिंसा : दिल्ली पुलिस ने जारी किए 9 लोगों के नाम, 7 लेफ्ट और 2 ABVP के
Delhi-Ncr News in Hindi

News18Hindi
Updated: January 10, 2020, 6:26 PM IST
JNU हिंसा : दिल्ली पुलिस ने जारी किए 9 लोगों के नाम, 7 लेफ्ट और 2 ABVP के
जेएनयू हिंसा मामले पर प्रेस कांफ्रेंस करते हुए दिल्ली पुलिस ने कुछ फोटो जारी किए हैं.

दिल्ली पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस कर चुनचुन कुमार, आईशी घोष, डोलन समान्ता, विकास विजय, प्रिया रंजन, सुचेता तालुकदार, पंकज मिश्रा, योगेंद्र भारद्वाज, विकास पटेल का नाम जारी किया है. पुलिस ने आरोप लगाया है कि इन लोगों ने ही जेएनयू में भड़की हिंसा में अहम किरदार निभाया था.

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  • Last Updated: January 10, 2020, 6:26 PM IST
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नई दिल्ली. जेएनयू हिंसा (JNU Violence) मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कुछ फोटो जारी किए हैं. दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने फोटो और नाम जारी करते हुए कहा है कि अभी जांच चल रही है. आरोपियों में JNU के पूर्व छात्र चुनचुन कुमार, JNUSU प्रेजिडेंट आईशी घोष, डोलन समान्ता, विकास विजय, प्रिया रंजन, सुचेता तालुकदार, पंकज मिश्रा, योगेंद्र भारद्वाज, विकास पटेल का नाम जारी करते हुए दिल्ली पुलिस ने बताया कि इन सभी लोगों के खिलाफ सबूत जुटाने में सीसीटीवी कैमरों ने मदद की. इन छात्रों में से 7 लेफ्ट जबकि 2 योगेंद्र भारद्वाज और विकास पटेल छात्र संगठन ABVP से जुड़े बताए जा रहे हैं.

वहीं साबरमती हॉस्टल में तोड़फोड़ का जो वीडियो सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था उसकी फोटो जारी नहीं की है. पुलिस का कहना है कि बहुत सारे छात्र पढ़ना चाहते हैं, लेकिन लेफ्ट के चार ग्रुप के छात्र उन्हें रजिस्ट्रेशन नहीं कराने दे रहे हैं. स्टाफ के साथ भी धक्का मुक्की कर रहे हैं. सर्वर को बंद कर दिया गया. दिल्ली पुलिस ने आरोप भी लगाया कि लेफ्ट छात्र संगठनों ने ही पेरियार हॉस्टल पर हमला किया था. हालांकि दिल्ली पुलिस ने ये भी माना कि साबरमती हॉस्टल पर किया गया हमला सुनियोजित था और कमरों को टार्गेट करके ही हमला किया गया था.

मामले की जांच कर रहे अपराध शाखा के उपायुक्त जॉय तिर्की ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एक से पांच जनवरी के बीच काफी संख्या में छात्र शीतकालीन सेमेस्टर में पंजीकरण कराना चाहते थे लेकिन वामपंथी झुकाव वाले संगठन उन्हें ऐसा नहीं करने दे रहे थे. डीसीपी ने पांच जनवरी को हुए हमले के सिलसिले में कहा कि विश्वविद्यालय के पेरियार छात्रावास के कुछ खास कमरों को निशाना बनाया गया. पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि आईशी घोष समेत कुछ लोगों ने हॉस्टल में छात्रों पर हमला किया. हमले में घायल हुईं आईशी घोष ने हालांकि आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के पास जो भी साक्ष्य हैं उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए.





 

दिल्ली पुलिस को मिले थे यह अहम सुराग मिले
जानकारों की मानें तो दो दिन पहले ही दिल्ली पुलिस और जांच के लिए गठित एसआईटी को अहम सुराग मिल गए थे. रविवार को जेएनयू परिसर में दिखाई दिये नकाबपोश हमलावरों की पहचान भी हो गई थी. एसआईटी को कई वीडियो बाद में ऐसे मिले थे जो अहम सबूत साबित हुए. वीडियो और दूसरे सबूत जुटाने के लिए एसआईटी ने पब्लिक नोटिस भी जारी किया था. अखिल भारतीय विद्वार्थी परिषद ने आरोप लगाए थे कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जेएनयू परिसर में आकर हंगामा किया था.



हिंसा के दौरान कार्रवाई नहीं करने को लेकर हो रही थी पुलिस की आलोचना
जेएनयू परिसर में हिंसा के दौरान कार्रवाई नहीं करने को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना हो रही थी. तोड़फोड़ के मामले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष समेत अन्य यूनियन नेताओं को नामजद करने के चलते भी पुलिस की खासी किरकिरी हुई थी. इस पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस मोदी सरकार की ‘कठपुतली’ की तरह काम कर रही है. उन्होंने जेएनयू हिंसा की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की थी और कहा था कि पूर्वाग्रह वाली पुलिस की जांच की कोई प्रामाणिकता नहीं है.



तीन जेएनयू प्रोफ़ेसर पहुंचे कोर्ट
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के तीन प्राध्यापकों ने विश्वविद्यालय परिसर में पांच जनवरी को हुए हमले के मामले में डेटा, सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार को याचिका दायर की. याचिका में व्हाट्सऐप इंक, गूगल इंक और एप्पल इंक को जेएनयू हमला मामले में व्हाट्सऐप ग्रुप्स 'यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट' और 'फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस' से जुड़े सभी डेटा को सुरक्षित रखने अथवा वापस एकत्र करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है. डेटा में संदेश, तस्वीरें, वीडियो और सदस्यों के फोन नंबर आदि शामिल हैं.

जेएनयू के प्राध्यापक अमित परमेश्वरन, अतुल सूद और शुक्ला विनायक सावंत की ओर से दायर याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार को आवश्यक निर्देश देने की मांग की गई है. अधिवक्ता अभीक चिमनी, मानव कुमार तथा रोशनी नम्बूदरी द्वारा दायर याचिका में दिल्ली पुलिस को जेएनयू परिसर में हुए हमले के सारे सीसीटीवी फुटेज एकत्र करने का निर्देश देने की मांग की गई है.



एमएचआरडी मंत्रालय और दिल्ली सरकार की भी हुई आलोचना
हमले का शिकार हुए लोगों से बात करने के लिए कोई समिति नहीं भेजने पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय और दिल्ली सरकार की भी आलोचना हुई थी. जेएनयू परिसर में मंगलवार शाम अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के पहुंचने पर भी सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया था. एक तरफ लोग इसे आने वाली फिल्म ‘छपाक’ का प्रचार करने की रणनीति बताते हुए फिल्म नहीं देखने की बात कर रहे थे तो दूसरी तरफ कई लोगों ने इसे छात्रों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने वाला दीपिका का साहसिक कदम बताया था. जबकि भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की ओर से फिल्म का बहिष्कार करने की मांग के बीच केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि केवल कलाकार ही नहीं, कोई भी आम आदमी भारत जैसे लोकतंत्र में कहीं भी जाकर अपनी बात रख सकता है.


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First published: January 10, 2020, 4:29 PM IST
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