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CAA Protest: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन बोले- यूपी पुलिस ने मुस्लिम युवकों पर ज्यादती की है

GUH Rizvi (File Photo)

GUH Rizvi (File Photo)

युवकों की रिहाई के लिए मैंने गृह सचिव और डीजीपी (DGP), यूपी (UP) से मिलकर एसआईटी (SIT) का गठन किए जाने का सुझाव दिया था. मैं लगातार दोनों लोगों के संपर्क में हूं.

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    नई दिल्ली. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Minority Commission) के चेयरमैन गयूर उल हसन रिज़वी ने यूपी (UP) में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस (Police) को कठघरे में खड़ा किया है. उनका कहना है, “नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)  के विरोध के दौरान मुस्लिम (Muslim) युवकों पर यूपी पुलिस ने ज्यादती की है. बेकसूर लड़के पुलिस कार्रवाई का शिकार हुए हैं. उनकी रिहाई के लिए मैंने गृह सचिव और डीजीपी, यूपी से मिलकर एसआईटी का गठन किए जाने का सुझाव दिया था. मैं लगातार दोनों लोगों के संपर्क में हूं. लेकिन बिना सोचे समझे लोगों को सीएए का भी विरोध नहीं करना चाहिए.” गौरतलब रहे कि यूपी में हुए विरोध-प्रदर्शन के हालात को संभालने के दौरान यूपी पुलिस पर मनमानी करने और तोड़फोड़ करने के आरोप लग रहे हैं.

    एनआरसी को असम से जोड़कर न देंखे मुसलमान

    न्यूज18 हिन्दी से खास बातचीत में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन गयूर उल हसन रिज़वी ने कहा, “असम में हुई एनआरसी की कार्रवाई एक पुरानी लिखा पढ़ी के तहत हुई है. देश के दूसरे हिस्सों में जो लोग यह सोच रहे हैं कि जब भी एनआरसी होगी तो वो असम जैसी होगी, वो सोचना एकदम गलत है. और अभी तो एनआरसी की कार्रवाई हो भी नहीं रही है. जब होगी तब सोचा जाएगा.”

    सीएए का विरोध तो बेवजह हो रहा है

    अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने कहा, सीएए का विरोध ऐसे लोग कर रहे हैं जिन्होंने अभी उसे समझा नहीं है. असम में सीएए नागरिकता लेने वाला नहीं देने वाला एक्ट है. इससे मुसलमानों को कतई घबराने की जरूरत नहीं है. जो लोग भी जगह-जगह धरना दे रहे हैं उन्हें उठ जाना चाहिए. विरोध करने से पहले सीएए को एक बार पढ़ जरूर लें. जामिया यूनिवर्सिटी और शाहीन बाग में धरना दिया जा रहा है.

    एक-एक बेकसूर युवक को कराएंगे जेल से बाहर

    अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन का कहना है, “में यूपी में हुईं घटनाओं के बाद से ही डीजीपी और गृह सचिव के संपर्क में हूं. एसआईटी के गठन का सुझाव भी इसीलिए दिया गया था कि जिससे जांच के दौरान वो बेकसूर युवक बाहर आ सकें जो किसी कारणवश पुलिस कार्रवाई का शिकार हुए हैं. डीजीपी ने भी कहा एसआईटी की जांच के दौरान जो भी बेकसूर साबित होगा उसे रिहा कर दिया जाएगा. वहीं संपत्ति भी सीज नहीं की जाएगी.”

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