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    उमर खालिद के खिलाफ UAPA में केस चलाने पर यह बोली दिल्ली सरकार

    खालिद को 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था.
    खालिद को 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था.

    दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की तरफ से उमर खालिद को 14 सितंबर को दिल्ली हिंसा Delhi Riots से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 7, 2020, 3:40 PM IST
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    नई दिल्ली. गृह मंत्रालय (Home Ministry) और दिल्ली सरकार ने पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत केस चलाने की मंजूरी दे दी है. जिसके चलते दिल्ली सरकार (Delhi government) पर कई सवाल उठ रहे हैं. इस बारे में जब दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन (Satyendra Jain) से बात की गई तो उनका कहना था, “दंगो के केस में ये रूटीन वाली बात है. प्रॉसिक्यूशन में जितने केस आते हैं उनमें मंजूरी मिलती है. इसमें बहुत सारे लोग होंगे. रूटीन फाइल्स हैं. ऐसी बहुत सारी फाइल्स गयी होंगी.”

    UAPA के तहत केस चलाने की पुलिस को लेनी होती है मंजूरी

    .कानून के अनुसार यूएपीए के तहत किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने से पहले गृमंत्रालय से मंजूरी लेना आवश्यक है. करीब एक हफ्ता पहले मंत्रालय ने यह मंजूरी दी है. बता दे की बहुत जल्द दिल्ली दंगो के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ यूएपीए के तहत दिल्ली पुलिस चार्जशीट कोर्ट मे दाखिल करने जा रही है. वही दिल्ली दंगो के मामले में ही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भी उमर खालिद के खिलाफ चार्जशीट जल्द दाखिल करेगी.



    कोर्ट में उमर के वकील ने कही यह बात
    उमर खालिद के वकील ने दिल्ली पुलिस की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस की जांच में इसने सभी तरह से सहयोग किया है. ऐसे में यह आरोप लगाकर कि उमर खालिद जांच में सहयोग नहीं कर रहा है. उसकी न्यायिक हिरासत को बढ़ाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई अर्जी गलत है. दिल्ली पुलिस की तरफ से उनकी न्यायिक हिरासत 30 दिन और बढ़ाने की अर्जी लगाई गई थी.

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    क्या है गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम UAPA

    यूएपीए के तहत देश और देश के बाहर गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के मकसद से बेहद सख्त प्रावधान किए गए. 1967 के इस कानून में पिछले साल सरकार ने कुछ संशोधन करके इसे कड़ा बना दिया. यह कानून पूरे देश में लागू होता है.

    - इस कानून के तहत केस में एंटीसिपेटरी बेल यानी अग्रिम ज़मानत नहीं मिल सकती.

    - किसी भी भारतीय या विदेशी के खिलाफ इस कानून के तहत केस चल सकता है. अपराध की लोकेशन या प्रवृत्ति से कोई फर्क नहीं पड़ता.

    - विदेशी धरती पर अपराध किए जाने के मामले में भी इसके तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है.

    - भारत में रजिस्टर जहाज़ या विमान में हुए अपराध के मामलों में भी यह कानून लागू हो सकता है.

    - मुख्य तौर पर यह कानून आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए है.

    - किसी भी तरह की व्यक्तिगत या सामूहिक गैरकानूनी गतिविधि, जिससे देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता को खतरा हो, इस कानून के दायरे में है.

    - यह कानून राष्ट्रीय इनवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को अधिकार देता है कि वो किसी तरह की आतंकी गतिविधि में शामिल संदिग्ध को आतंकी घोषित कर सके.

    - इस कानून से पहले समूहों को ही आतंकवादी घोषित किया जा सकता था, लेकिन 2019 में इस संशोधित कानून के बाद किसी व्यक्ति को भी संदिग्ध आतंकी या आतंकवादी घोषित किया जा सकता है.
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