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'किसी भी अपराधी को फांसी पर चढ़ा सकता हूं लेकिन निर्भया की मां का सामना करने की हिम्मत नहीं'
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Updated: January 8, 2020, 11:53 AM IST
'किसी भी अपराधी को फांसी पर चढ़ा सकता हूं लेकिन निर्भया की मां का सामना करने की हिम्मत नहीं'
पवन जल्लाद बीते चार दशक से दोषियों को फांसी देने का काम कर रहे हैं (फाइल फोटो)

पवन जल्लाद ने कहा- अब निर्भया (Nirbhaya) की मां से उसी दिन मिलूंगा जब उसके दोषियों को फांसी पर चढ़ा दूंगा.

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  • Last Updated: January 8, 2020, 11:53 AM IST
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नई दिल्ली. जल्लाद यह शब्द आते ही जहन में आता है एक सख्त दिल का इंसान, जो बड़ी से बड़ी बात को भी आसानी से झेल सकता है. लेकिन निर्भया कांड (Nirbhaya Gangrape) की जब बात हो तो जल्लाद का दिल भी ऐसे मामलों में कमजोर हो जाता है. ऐसा ही कुछ हुआ पवन जल्लाद के साथ भी. पवन जल्द ही निर्भया के दोषियों को फांसी देने जा रहा है और उसका कहना है कि यदि यह निर्णय उसके हाथ में होता तो वह एक घंटे में ही चारों को फांसी दे देता. लेकिन निर्भया की मां आशा देवी से मिलने की बात पर पवन कहता है कि मैं किसी भी अपराधी को फांसी पर चढ़ा सकता हूं, किसी की भी मौत देख सकता हूं लेकिन उस मां का सामना करने की हिम्मत नहीं है. पवन का कहना है कि अब मैं उनसे उसी दिन मुलाकात करूंगा जब चारों को फांसी पर चढ़ा दूंगा.

बेटी के दोषियों के जिंदा रहने का दर्द दिखता है
पवन ने कहा कि वैसे तो मेरी कभी भी आशा देवी से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन एक दो बार टीवी कार्यक्रम के दौरान आमने सामने जरूर आए. हालांकि मैं ही अलग हट गया. बेटी के दोषियों के जिंदा रहने का दर्द उनके चेहरे पर साफ नजर आता है. पवन ने कहा कि उन्हें चैन तभी मिलेगा जब चारों को फांसी हो जाएगी. जिस शिद्दत के साथ एक मां अपनी बेटी के गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए दिन-रात एक किए हुए है, उसे देखकर अफसोस होता है कि ये चारों अभी तक जिंदा क्यों हैं.

तीन पीढ़ी से फांसी देने का काम कर रहा है परिवार



पवन जल्लाद मेरठ की आलोक विहार कॉलोनी में रहता है. पवन का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी जेल में फांसी देने का काम करता रहा है. पवन से पहले उसके परदादा लक्ष्मण सिंह, दादा कल्लू जल्लाद और पिता मम्मू सिंह भी फांसी देने का काम करते थे. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब पवन फांसी देता है.



 

आप बीती में अपना दर्द बयां किया है पवन जल्लाद ने
पवन जल्लाद ने बताया कि पिता के बाद से मैं इस काम को विभिन्न जेलों में जाकर अंजाम दे रहा हूं. कुछ समय पहले तक मुझे मेरठ जेल से तीन हजार रुपये महीना मानदेय मिलता था. मेरे अथक प्रयासों के बाद मानदेय बढ़ाकर पांच हजार रुपये मिलने लगा. लेकिन आज की इस महंगाई के दौर में अब पांच हजार रुपये भी नाकाफी साबित हो रहे हैं. परिवार का पालन-पोषण करना कठिन होता जा रहा है. मैं बीते काफी समय से लगातार संबंधित अधिकारियों से मानदेय बढ़ाने के संबंध में गुहार लगा चुका हूं. लेकिन अभी तक इस मामले में मेरी सुनवाई नहीं हुई है.

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First published: January 8, 2020, 10:33 AM IST
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