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6 बड़े मुस्लिम संगठनों ने की बैठक, JNU हमले पर कही यह बड़ी बात...

यूनिवर्सिटी में हिंसा और छात्रों पर हमले का विरोध जताया गया.

यूनिवर्सिटी में हिंसा और छात्रों पर हमले का विरोध जताया गया.

मौलाना अरशद मदनी (Arshad Madni) ने कहा कि यह बहुत ही अफसोस की बात है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Jamia University), अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और जेएनयू (JNU) में हमला किया जा रहा है.”

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    नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हुई तोड़फोड़ और मारपीट पर मुस्लिम (Muslim) संगठनों ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है. शुक्रवार को दिल्ली (Delhi) में 6 बड़े मुस्लिम संगठनों ने बैठक की. बैठक में मौलाना अरशद मदनी (Arshad Madni) ने आरोप लगाते हुए कहा, “नकाबपोश, यूनिवर्सिटी में घुसकर तोड़फोड़ कर रहे हैं. छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है. लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी सब देखती रहती है. इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए. यह बहुत ही अफसोस की बात है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया  यूनिवर्सिटी (Jamia University), अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और जेएनयू में हमला किया जा रहा है.”

    CAA और NRC के विरोध में हो रहे प्रदर्शन पर छात्रों को दिया समर्थन

    शुक्रवार को हुई बैठक में जमीअत उलमा-ए-हिंद, दारुल उलूम देवबंद के वाइस चांसलर, जमाते इस्लामी, मरकज़ी जमीअत अहले हदीस, मिल्ली कौंसिल और मुस्लिम मजलिसे मुशाविरत के पदाधिकारी शामिल हुए. बैठक में अरशद मदनी ने कहा, यह सभा जामिया, एएमयू और जेएनयू यूनिवर्सिटी और अन्य छात्रों, युवाओं द्वारा सीएए और एनआरसी क़ानूनों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलनों का भरपूर समर्थन और प्रेरित करती है. वहीं उन्होंने कहा कि यह दोनों कानून धर्म के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव पैदा करता है. वहीं एनपीआर एनआरसी का ही एक रूप है. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि सभा की मांग है कि सीएए से धार्मिक भेदभाव को समाप्त किया जाए, एनपीआर या तो वापस लिया जाए या अतिरिक्त प्रावधानों को खत्म किया जाए.

    बीजेपी शासित राज्यों में हुए हंगामे की निंदा की

    मुस्लिम संगठनों की बैठक में यूपी सहित कई बीजेपी शासित राज्यों में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों और मौत की निंदा की. बैठक में कहा गया कि असम और उत्तर प्रदेश से लेकर कर्नाटक तक 30 से अधिक लोग पुलिस की गोलियों से शहीद और बड़ी संख्या में घायल हुए. सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर उन पर मुक़दमे लगाए गए.

    दुखद पहलू यह है कि बिना किसी जांच और अदालती कार्यवाई के मुसलमानों की दुकानों को ज़ब्त कर उनसे सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई की बात की जा रही है. यह सभा इन कार्यवाईयों की कड़े शब्दों में निंदा करती है. और मांग करती है कि पुलिस द्वारा हिंसा की इन घटनाओं की न्यायिक जांच कराई जाए और जो अधिकारी इसमें शामिल पाए जाएं उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.  यह सभा इन राज्य सरकारों से यह मांग भी करती है कि मृतकों और घायलों को उचित मुआवज़ा दिया जाए.

    इस मौके पर मौलाना मुहम्मद वली रहमानी, मौलाना मुफ्ती अबुलक़ासिम नोमानी, प्रोफेसर अख़्तरुलवासे, सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, मौलाना अबदुल्लाह मुगीसी, मौलाना अबदुलख़ालिक मद्रासी, मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलफी आदि थे.

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