Bihar Election 2020: बिहार के गांव-गांव में घूम रहे दिल्‍ली JNU के छात्र

राजनीति की मुख्यी धारा में पहुंचे कन्है या कुमार जैसे बड़े नामों को छोड़ दें तो जेएनयू के छात्रों की एक बड़ी फौज इस वक्तय बिहार चुनावों में दमखम दिखा रही है. जिसका फायदा सीधे तौर पर तेजस्‍वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआईएमएल) को हो रहा है. (सांकेतिक तस्‍वीर)
राजनीति की मुख्यी धारा में पहुंचे कन्है या कुमार जैसे बड़े नामों को छोड़ दें तो जेएनयू के छात्रों की एक बड़ी फौज इस वक्तय बिहार चुनावों में दमखम दिखा रही है. जिसका फायदा सीधे तौर पर तेजस्‍वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआईएमएल) को हो रहा है. (सांकेतिक तस्‍वीर)

ऑल इंडिया स्‍टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बाला जो कि बिहार में सीपीआईएमएल (CPIML) के साथ ही महागठबंधन (Mahagathbandhan) के लिए चुनाव प्रचार (Election campaign) संभाल रहे हैं बताते हैं कि बिहार (Bihar) में इस बार आईसा के साथ ही जेएनयूएसयू (JNUSU) के अध्‍यक्ष आदि पदाधिकारी चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. चूंकि इस बार लेफ्ट पार्टियां (Left Parties) कांग्रेस (Congress) और आरजेडी (RJD) के साथ महागठबंधन में हैं तो सभी छात्र संयुक्‍त रूप से महागठबंधन का ही प्रचार कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 2:54 PM IST
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नई दिल्‍ली. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) के लिए पहले चरण का मतदान हो चुका है. वहीं तीन चरणों के इस चुनाव का आज दूसरे चरण का मतदान है. बिहार में इस बार चुनाव प्रचार है कि दोगुनी गति से हो रहा है. इसकी एक वजह बिहार चुनाव का जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कनेक्‍शन भी है. जिसका फायदा सीधे तौर पर तेजस्‍वी यादव (Tejaswi Yadav) के नेतृत्व वाले महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआईएमएल) को हो रहा है.

छात्र राजनीति को नई दिशा देने के साथ ही अपने अलहदा छात्र संघ चुनाव प्रचार के लिए मशहूर जेएनयू के छात्र राजनेता (JNU Student Leaders) इस वक्‍त बिहार में मौजूद हैं. राजनीति की मुख्‍य धारा में पहुंचे कन्‍हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) जैसे बड़े नामों को छोड़ दें तो जेएनयू (JNU) के छात्रों की एक बड़ी फौज इस वक्‍त बिहार चुनावों में दमखम दिखा रही है. इतना ही नहीं जेएनयू स्‍टाइल में किया जा रहा चुनाव प्रचार भी कोरोना के इस दौर में काफी फायदेमंद साबित हो रहा है.

कोरोना के चलते ज्‍यादा संख्‍या में बड़ी रैलियों को अनुमति न मिलने से जहां पार्टियों को चुनाव प्रचार का तरीका बदलना पड़ा है. वहीं जेएनयू में पहले से ही हर व्‍यक्ति, है जरूरी तक पहुंचकर अपनी बात कहने का तरीका अब बिहार चुनाव में अपनाया जा रहा है. बिहार में इस वक्‍त जेएनयू में होने वाले नो मनी कैंपेन (No money Campaign) के तहत डोर टू डोर (Door To Door) मतदाताओं (Voters) से बातचीत और नुक्‍कड़ सभाओं का दौर चल रहा है.



ऑल इंडिया स्‍टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बाला जो कि बिहार में सीपीआईएमएल (CPIML) के साथ ही महागठबंधन (Mahagathbandhan) के लिए चुनाव प्रचार (Election campaign) संभाल रहे हैं बताते हैं कि बिहार में इस बार आईसा के साथ ही जेएनयूएसयू (JNUSU) के अध्‍यक्ष आदि पदाधिकारी चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. चूंकि इस बार लेफ्ट पार्टियां (Left Parties) कांग्रेस (Congress) और आरजेडी (RJD) के साथ महागठबंधन में हैं तो सभी छात्र संयुक्‍त रूप से महागठबंधन का ही प्रचार कर रहे हैं.
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जेएनयू में होने वाले छात्र संघ चुनावों की तरह ही छात्र बिहार चुनाव 2020 में महागठबंधन के उममीदवारों के लिए डोर टू डोर कैंपेन और नुक्‍कड़ सभाएं कर रहे हैं.


लॉकडाउन (Lockdown) के बाद से ऐसे बहुत से छात्र हैं जो जेएनयू नहीं लौटे और बिहार में ही हैं, ये किसी न किसी प्रकार से अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव में लगे हैं. वहीं जेएनयू के ऐसे भी छात्र हैं जो अन्‍य राज्‍यों जैसे पंजाब, हरियाणा, उड़ीसा आदि जगहों से हैं लेकिन यहां प्रचार करने आए हैं.

बाला कहते हैं कि पटना, मुजफ्फरपुर, दीघा, कटिहार, औराई, पालीगंज में चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे बहुत से जेएनयू के छात्र भी प्रचार में मिले जो यूनिवर्सिटी में किसी पार्टी से नहीं हैं, लेकिन यहां अपने क्षेत्रों में काम संभाल रहे हैं. जेएनयूएसयू के पूर्व जनरल सेक्रेटरी और आइसा, दिल्‍ली के स्‍टेट वाइस प्रेसिडेंट तवरेज बिहार के सीमांचल इलाकों में प्रचार देख रहे हैं. जबकि सीमांचल में ज्‍यादातर सीटें सीपीआईएमएल के बजाय महागठबंधन की अन्‍य पार्टियों की हैं.

छात्र रोजाना सुबह सात बजे से रात के 10 बजे तक लगातार चुनाव प्रचार अभियान में सड़कों पर उतरते हैं. जेएनयू के छात्रों के साथ बिहार के युवा, पटना यूनिवर्सिटी (Patna university) के छात्र सभी मिलकर काम कर रहे हैं. ये कहें कि बाहर से आने वाले छात्रों को लग रहा है जैसे ये उनका अपना राज्‍य, अपना गांव या शहर है.

मतदाताओं खासतौर पर प्रवासी मजदूरों (Migrant Labourers) से डोर-टू-डोर मिल रहे छात्र

जेएनयूएसयू की पूर्व अध्‍यक्ष गीता कुमारी हरियाणा के पानीपत से हैं लेकिन बिहार में चुनाव का प्रचार करने पहुंची हैं. गीता कुमारी बताती हैं कि अक्‍तूबर में चुनाव प्रचार की शुरुआत के दौरान आशीष, प्रियंका, प्रसनजीत सहित 10 छात्र सिर्फ पालीगंज में ही थे. यहां से उन्‍होंने चुनाव अभियान की शुरुआत की. जहां से सभी अलग-अलग बंट गए. कई अन्‍य जिलों में अब वे अपनी अपनी टीम के साथ प्रचार कर रहे हैं. साथ ही बिहार के वे छात्र भी अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में लगे हैं जो लॉकडाउन के बाद से जेएनयू नहीं पहुंचे.

गीता बताती हैं, जब हम पालीगंज में प्रचार कर रहे थे तो यहां हमें जेएनयू के छात्र मिले थे जो स्‍वतंत्र रूप से पार्टी का प्रचार कर रहे थे. हम लोगों ने बिहार इलेक्‍शन में जेएनयू की तरह ही घर-घर प्रचार किया. इलेक्‍शन केंडीडेट के कामों की पूरी जानकारी के साथ ही उनकी समस्‍याओं पर बात करते थे. लोग अपनी मांगें भी हमें बताते. जिन गांवों में सभा करने की सुविधा मिली वहां हमने सभाएं कीं. हालांकि बिहार के लोग काफी जागरुक हैं. यहां का मतदाता सरकार की नीतियों और वादों को अच्‍छी तरह से जानता है. लोगों को डोर टू डोर कैंपेन बहुत अच्‍छा लग रहा है.

जेएनयू में पूरे देश की समस्‍याओं पर लोग पढ़ते हैं. उन्‍हें बिहार की भी चीजें पता होती हैं. इस बार रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है. लॉकडाउन ने सभी से नौकरी छीन ली. इसके अलावा बिहार की अपनी जमीनी समस्‍याएं भी हैं. यहां यूथ का एक बड़ा तबका चुनाव में लगा है. इनमें जेएनयू में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल हैं.

जेएनयू की तरह नुक्‍कड़ सभाओं को मिल रहा है रेस्‍पॉन्‍स

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