बिहार की ज्योति को हर ओर से मिल रही मदद की पेशकश, उसने कहा-मुझे पढ़ना है
Darbhanga News in Hindi

बिहार की ज्योति को हर ओर से मिल रही मदद की पेशकश, उसने कहा-मुझे पढ़ना है
ज्योति अपने चोटिल पिता को गुड़गांव से दरभंगा लेकर पहुंची

लॉकडाउन (Lockdown) संकट से बचने के लिए 15 साल की ज्योति कुमारी पासवान ने परिवार के पास बचे हुए 2000 रुपये से एक पुरानी साइकिल खरीदी. बच्ची ने हरियाणा के गुड़गांव के सिकंदरपुर से अपने पिता को साइकिल पर बैठाया और बिहार के दरभंगा पहुंच गई.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
नई दिल्ली. लॉकडाउन संकट (Lockdown Crises) से बचने के लिए 15 साल की ज्योति कुमारी पासवान (Jyoti kumari Paswan)  ने परिवार के पास बचे हुए 2000 रुपये से एक पुरानी साइकिल (Seconhand Cycle) खरीदी. बच्ची ने हरियाणा के गुड़गांव के सिकंदरपुर (Sikandarpur) से अपने पिता को साइकिल पर बैठाया और बिहार के दरभंगा (Darbhanga) पहुंच गई. इस कहानी के मीडिया में आते ही ने बहुत से लोगों ने उसके सामने मदद की पेशकश की. इसमें राजनेता, ब्यूरोक्रेट, बिजनेसमैन और एनआरआई तक शामिल हैं.

पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने भी ज्योति से बातचीत की

ज्योति कुमारी पासवान का अनगिनत मीडिया संस्थानों से साक्षात्कार किया. साक्षात्कार देने का काम वह पिछले सप्ताह सुबह 9 बजे से लेकर रात तक निपटाती रही. इसके अलावा उसे हर रोज बहुत से वीवीआईपी ने कॉल किया. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी ज्योति को वीडियो कॉल किया.



साइकिल पर 1200 किलोमीटर की यात्रा की



ज्योति कुमारी के साथ यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि उसने अपने घायल पिता को साइकिल पर बैठाकर 1,200 किलोमीटर की यात्रा पूरी की. उसके पिता ने बताया कि उन्हें अंतिम 70 किलोमीटर के सफर में ट्रक से लिफ्ट मिल गया. ज्योति के पिता ई—रिक्शा चलाते थे और एक सड़क दुघर्टना में उन्हें बहुत ज्यादा चोट आ गई और वे इन दिनों काम नहीं कर पा रहे हैं.

पिता मोहन ने कहा- लोग बहुत दयालु हैं

आज, ज्योति और उसके पिता सिरहुली गाँव में अपने घर में होम क्वारंटाइन पर हैं. मीडिया की कवरेज से वे सकते में हैं और इस समर्थन के लिए वे मीडिया का धन्यवाद करना नहीं भूलते हैं. ज्योति ने कहा कि यह कभी-कभी मुश्किल और बेहद थका देने वाला होता है क्योंकि वे वे एक ही सवाल पूछते हैं. ज्योति के पिता मोहन कहते हैं कि हम 15 मई को यहां पहुंचने के बाद से क्वारंटाइन में हैं. लोग बहुत ही दयालु हैं.

बिहार सरकार ज्योति को मुफ्त में देगी स्कूली शिक्षा

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बिहार सरकार ज्योति को मुफ्त में स्कूली शिक्षा प्रदान करेगी. सरकार की ओर से उसके घर पर एक बाथरूम बनाने का काम शुरू हो चुका है. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ज्योति के बैंक खाते में 1 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिया है. पटना स्थित सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने उसकी उच्च शिक्षा को प्रायोजित करने की पेशकश की है. गौरतलब है कि आनंद कुमार पटना में आईआईटी में प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाते हैं.

ज्योति को हेल्थ एम्बेस्डर बनाना चाहते हैं अश्विनी चौबे

केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि वह ज्योति को देश के 'हेल्थ एम्बेस्डर' के बतौर नामित करना चाहते हैं. राबड़ी देवी ने ज्योति को अपनी पार्टी के सत्ता में आने पर मुफ्त शिक्षा और उसकी शादी कराने का वादा किया है.

साइकलिंग चैंपियनशिप जीतना चाहती हूं: ज्योति

राष्ट्रीय साइकलिंग महासंघ, नई दिल्ली की ओर से पहले से ही एक निमंत्रण लंबित है। ज्योति शुरू में इस निमंत्रण के लिए अनिच्छुक थीं, लेकिन अब कहती हैं कि मुझे साइकिल रेस जीतनी है, क्योंकि मैं कुछ हासिल करना चाहती हूं. महासंघ के अध्यक्ष ओंकार सिंह का कहना है कि यह प्रस्ताव ज्योति के लिए अभी भी ओपन है. वे कहते हैं कि ज्योति को इतना ज्यादा अटेंशन मिल गया है कि वह भ्रमित हो गई है. यह उन्माद थम जाए, उसके बाद हम उससे फिर से संपर्क करेंगे. हम परीक्षण करना चाहते हैं और उसे एक उच्च स्तरीय साइकिल चालक में ढालना चाहते हैं. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट ​कर खेल मंत्री किरेन रिजिजू का ध्यान ज्योति कुमारी की ओर खींचने की कोशिश की है

'दो साल से गरीबी के चलते पढ़ाई कर रखी थी बंद'

ज्योति अभी स्कूल जाने को लेकर उत्साहित है. उसने बताया कि लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वह अपनी शिक्षा फिर से शुरू करेगी. ज्योति ने कहा कि उसने आर्थिक तंगी के कारण दो साल से स्कूल जाना बंद कर दिया था. वह बताती है कि उसके पिता और उसके परिजन की सिकंदरपुर लौैटने की कोई योजना नहीं है. ज्योति अपने गांव के पास के पिंडारख स्कूल में एडमिशन लेगी.

गरीबी से मर जाएगा यह परिवार: कीर्ति आजाद

पूर्व सांसद और मशहूर क्रिकेटर रह चुके कीर्ति झा आजाद ने कहा कि यह परिवार दिहाड़ी मजदूर रहा है और इस समय पूरी तरह से बेरोजगार है. गरीब है है. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि यह परिवार गरीबी से मर जाएगा. बच्ची नाबालिग है. हमें इस बारे में बाचतीच करना चाहिए.

हमारे पास भोजन और किराए तक पैसे नहीं थे: मोहन

पिता मोहन ने स्वीकार किया कि सरकार को लॉकडाउन लागू करते समय उनके जैसे प्रवासी श्रमिकों के हितों की देखभाल करनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि हम एक हताश स्थिति में थे. भोजन और किराए तक के पैसे नहीं थे हमारे पास. अगर मेरी बेटी साहस नहीं करती तो हम यह काम पूरा नहीं कर पाते. मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि हमारे पास एक साइकिल थी. अपनी यात्रा के दौरान, हमने सड़क पर कई लोगों को पैदल चलते देखा. सड़क पर बच्चों तक को चलते हुए देखा. मोहन अपनी बेटी के भविष्य के बारे में कहते हैं कि वह अभी बच्ची है.

ये भी पढ़ें: COVID-19 UPDATE: बिहार में कोरोना से 16वीं मौत, संक्रमितों की संख्या 3185

श्रमिक स्पेशल ट्रेन में गूंज उठी किलकारी, महिला यात्री ने बच्ची को दिया जन्म
First published: May 29, 2020, 7:29 AM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading