BJP ने केजरीवाल सरकार पर लगाए आरोप, कहा-अस्पतालों में रिजर्व बेड्स पर गरीबों का नहीं हुआ इलाज

आयुष्मान भारत योजना से गरीब मरीजों को 5 लाख रूपये तक का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में फ्री हो सकता था. (File Photo)

आयुष्मान भारत योजना से गरीब मरीजों को 5 लाख रूपये तक का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में फ्री हो सकता था. (File Photo)

COVID 19 in Delhi: दिल्ली के उन अस्पतालों में गरीबों के लिए बेड आरक्षित हैं जिन्हें डीडीए (DDA) ने नाममात्र के दाम पर जमीन अलॉट की थी. इन अस्पतालों के लिए कानूनी रूप से यह जरूरी है कि वहां गरीबों के लिए रिजर्व बेड्स पर गरीबों का मुफ्त इलाज किया जाए. लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं है.

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नई दिल्ली. कोरोना (Corona) संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने से दिल्ली में बिगड़े हालातों को लेकर विपक्ष लगातार दिल्ली सरकार (Delhi Government) पर हमला बोल रहा है. विपक्ष ने केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) को दिल्ली में लागू कर दिया जाता तो गरीब मरीजों को 5 लाख रूपये तक का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में फ्री हो सकता था.

आज सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं. मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने से उनका सब कुछ लूट जा रहा है. लेकिन केजरीवाल सरकार इस दिशा में गंभीरता से नहीं सोच रही है.

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दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी (Ramvir Singh Bidhuri) ने आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली सरकार ने गरीबों के इलाज की कोई सुध नहीं ली. न तो उन अस्पतालों में गरीबों के लिए मुफ्त इलाज सुनिश्चित कराया जो डीडीए द्वारा अलाॅट जमीन पर बने हुए है, न आयुष्मान भारत योजना लागू की और न ही अपने वादे के अनुसार आम जनता को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की कोई सुविधा दी.
बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली के उन अस्पतालों में गरीबों के लिए बेड आरक्षित हैं जिन्हें डीडीए (DDA) ने नाममात्र के दाम पर जमीन अलाट की थी. इन अस्पतालों के लिए कानूनी रूप से यह जरूरी है कि वहां गरीबों के लिए रिजर्व बैड्स पर गरीबों का मुफ्त इलाज किया जाए.

बिधूड़ी ने उदाहरण देकर बताया कि अपोलो अस्पताल (Apollo Hospital) को डीडीए ने नाममात्र कीमत सिर्फ एक रुपए में जमीन अलाॅट की थी. सरकार और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के बीच एमओयू के जरिए करार हुआ था जिसके अनुसार 33 फीसदी बेड गरीबों के लिए रिजर्व रखे गए थे और ओपीडी में गरीबों को 40 फीसदी इलाज मुफ्त था. बाकी अस्पतालों में भी जिन्हें डीडीए ने नाममात्र कीमत लेकर जमीन अलाॅट की थी, वहां 25 फीसदी बेड गरीबों के लिए आरक्षित हैं.

बिधूड़ी ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) से पूछा है कि वह बताए कि आखिर कितने अस्पतालों में गरीबों का मुफ्त इलाज हुआ? क्या सरकार ने इसकी कोई पड़ताल की है? सरकार यह व्यवस्था करे कि इन अस्पतालों में गरीबों के लिए रिजर्व सीटों पर उनका मुफ्त इलाज हो.



नेता प्रतिपक्ष ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि दिल्ली सरकार ने विधानसभा में खुद यह घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना (PM Ayushman Bharat Yojna) दिल्ली में लागू की जाएगी. सरकार ने अब तक यह योजना लागू नहीं की. अगर यह योजना लागू हो जाती तो दिल्ली के गरीबों को 5 लाख रुपए तक के इलाज की मुफ्त सुविधा मिल जाती.

दिल्ली सरकार ने जानबूझ कर यह योजना लागू नहीं की क्योंकि उसे लगता है कि योजना लागू होते ही उसका श्रेय केंद्र सरकार (Central Government) को मिल जाएगा. महामारी के इस संकट के वक्त भी दिल्ली सरकार को यह संकीर्ण राजनीति सूझ रही है और गरीबों को मिलने वाले लाभ से वंचित कर रही है.

बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली सरकार ने ऐलान किया था कि अगर सरकारी अस्पतालों में आम जनता को इलाज मुहैया नहीं हो पाता है तो प्राइवेट अस्पतालों में उनका इलाज दिल्ली सरकार की तरफ से कराया जाएगा. उन्होंने पूछा कि क्या कोरोना काल में सरकार अपनी इस योजना को भी भूल गई है?

कोरोना काल में प्राइवेट अस्पतालों ने मनमाने ढंग से मरीजों को लूटा है. सरकार उस पर भी कोई रोक नहीं लगा पाई और आम जनता के इलाज की अपनी ही योजना को भी लागू नहीं करा पाई.

दिल्ली सरकार कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा नहीं दे पाई और लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के हाथों लुटना पड़ा. अब इन सभी लोगों के बिलों का भुगतान दिल्ली सरकार को करना चाहिए.

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