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BJP का केजरीवाल सरकार पर हमला, कहा-जल बोर्ड में 57,000 करोड पहुंचा घाटा, CVC से जांच कराने की मांग

भाजपा का आरोप है कि जल बोर्ड में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के चलते घाटा और ऋण की देनदारी अब बढ़कर 57,000 करोड़ पहुंच गई है. (सांकेतिक फोटो)

भाजपा का आरोप है कि जल बोर्ड में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के चलते घाटा और ऋण की देनदारी अब बढ़कर 57,000 करोड़ पहुंच गई है. (सांकेतिक फोटो)

Delhi Jal Board Scam: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता (Adesh Gupta) की ओर से केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भी एक पत्र लिखा है. भाजपा का आरोप है कि जल बोर्ड में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के चलते घाटा और ऋण की देनदारी अब बढ़कर 57,000 करोड़ पहुंच गई है.

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    नई दिल्ली. दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा (BJP) लगातार दिल्ली सरकार (Delhi Government) पर हमलावर है. दिल्ली भाजपा (Delhi BJP) की ओर से अब कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने की मांग की है.

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता (Adesh Gupta) की ओर से केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission) को भी एक पत्र लिखा है. भाजपा का आरोप है कि जल बोर्ड (Jal Board) में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के चलते घाटा और ऋण की देनदारी अब बढ़कर 57,000 करोड़ पहुंच गई है.

    केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को लिखे एक पत्र में गुप्ता ने कहा कि साल 2012-13 से लेकर अब तक जलबोर्ड की कोई बैलेंस शीट तैयार नहीं हुई. इतना ही नहीं साल 2012 से 2017-2018 के बीच बजट प्रावधानों से अधिक खर्च का कोई कारण नहीं बताया गया और न ही लेखा-जोखा दिया गया है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से जलबोर्ड की किसी भी बैलेंस शीट का ऑडिट नहीं हुआ और बोर्ड भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा ‘अड्डा’ बन चुका है.
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    जल बोर्ड ने 10 सालों में कोई बैलेंस शीट तैयार नहीं की 
    उन्होंने सतर्कता आयोग से कहा कि जलबोर्ड ने 10 वर्षों में कोई बैलेंस शीट तैयार क्यों नहीं की और अगर की तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि लोगों को पता चलना चाहिए कि फायदें में चलने वाला जलबोर्ड किन कारणों से कंगाली की कगार तक जा पहुंचा है.

    बोर्ड ने बिना कोई कारण बताए बजट से बाहर जाकर जो लाखों रुपये खर्च किए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और इसके लिए सभी जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई होनी चाहिए.

    पिछले साल जुलाई में रद्द टेंडर को जल बोर्ड ने अब दिया फिर वर्क आर्डर
    गुप्ता ने दिल्ली जल बोर्ड के काम करने के तरीकों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए दावा किया कि इसके काम करने के तरीके तो गलत है ही साथ ही टेंडर जारी या रद्द करने के पीछे कोई कारण भी नहीं बताया जाता. उन्होंने द्वारका में प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र (Water Treatment Plant) के एक टेंडर का हवाला देते हुए कहा कि टेंडर गत वर्ष जुलाई को बोर्ड की बैठक में रद्द कर दिया गया और बाद में इसी टेंडर को जुलाई वर्ष 2021 में वर्क ऑर्डर दे दिया गया.

    280 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले द्वारका वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर उठाए सवाल
    उन्होंने कहा कि 280 करोड़ रुपये से द्वारका में प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र को तैयार करने के इस टेंडर को न तो रद्द करते समय और न ही पुनः स्वीकार करते समय कोई कारण दिए गए.

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    आदेश गुप्ता ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजे पत्र में लिखा है कि दिल्ली जल बोर्ड में किसी भी स्तर पर कोई जवाबदेही नहीं है. इसका घाटा लगातार बढ़ रहा है, इतना ही नहीं जल बोर्ड ने जो ऋण लिया है, उसका एक पैसा भी चुकाया नहीं और इसका घाटा और ऋण की देनदारी कर 57 हजार करोड़ तक पहुंच गई है.

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जलबोर्ड के 1.79 लाख कनेक्शन बिना मीटर के थे. इसके अलावा 4 लाख से ज्यादा मीटर बंद या खराब थे. इससे बोर्ड को राजस्व की भारी हानि हो रही है, लेकिन इसे दुरुस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए.

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