BJP का केजरीवाल पर आरोप, कहा-अनुभव से नहीं सीखा कोई सबक, केंद्र मदद नहीं देता तो हालात होते और खराब

दिल्ली सरकार कोरोना पर काबू पाने में पहले की तरह अब भी नाकाम साबित हो रही है. (फोटो प्रतीकात्मक)

दिल्ली सरकार कोरोना पर काबू पाने में पहले की तरह अब भी नाकाम साबित हो रही है. (फोटो प्रतीकात्मक)

COVID-19 in Delhi राजधानी में कोरोना की चौथी और सबसे भयंकर लहर चल रही है. लेकिन दिल्ली सरकार ने पिछले अनुभवों से कुछ नहीं सीखा जिसका नतीजा आज जनता को भुगतना पड़ रहा है. पिछले एक साल में दिल्ली के अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन बेड बढ़ाने की कोई कोशिश नहीं की गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:13 PM IST
  • Share this:


नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से आग्रह किया है कि वह दिल्ली में कोरोना (Corona) पर काबू पाने के लिए सकारात्मक और सार्थक प्रयास करें.

दिल्ली सरकार कोरोना पर काबू पाने में पहले की तरह अब भी नाकाम साबित हो रही है. बिधूड़ी ने कहा कि इस वक्त राजनीति करने का वक्त नहीं है बल्कि दिल्ली की जनता की जान बचाने की जरूरत है. इसलिए ठोस कदम उठाएं.

बिधूड़ी ने कहा है कि राजधानी में कोरोना की चौथी और सबसे भयंकर लहर चल रही है. लेकिन दिल्ली सरकार ने पिछले अनुभवों से कुछ नहीं सीखा जिसका नतीजा आज जनता को भुगतना पड़ रहा है.
Youtube Video


पिछले एक साल में दिल्ली के अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन बेड बढ़ाने की कोई कोशिश नहीं की गई. हर बार प्राइवेट अस्पतालों के भरोसे ही हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे. अगर केंद्र सरकार (Central Government) के अस्पतालों एम्स, आरएमएल, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, कलावती सरन, बेस अस्पताल की मदद नहीं होती या फिर डीआरडीओ (DRDO) और आईटीबीपी (ITBP) के अस्थाई अस्पताल, रेलवे द्वारा शकूर बस्ती और आनंद विहार में 1200 बेड की कोच, आर्मी भी 500 बेड का अस्पताल की सुविधा नहीं होती तो सोचिए कि दिल्ली का क्या हाल होता.

अस्पताल में दम तोड़ती मेडिकल व्यवस्था के लिए कुछ नहीं किया



दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति (New Excise Policy) तो बनाई, लेकिन अस्पताल में दम तोड़ती मेडिकल व्यवस्था के लिए कुछ नहीं किया जबकि दिल्ली के पास पिछले 6 सालों में 3 लाख 7 हजार 29 करोड़ रुपए का बजट था.

दिल्ली सरकार की अव्यवस्था के कारण ही आज राजधानी में पॉजिटिविटी रेट 36.24 तक पहुंच गया है जोकि देश में सबसे ज्यादा है और डेथ रेट में 1.5 तक जा पहुंचा है जबकि राष्ट्रीय औसत 1.2 है.

दिल्ली सरकार जनता को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे तो करती रही लेकिन राजधानी में आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) तक लागू नहीं की.

ऑक्सीजन के नए यूनिट दिल्ली में क्यों शुरू नहीं हो सकते

बिधूड़ी ने ताजा ऑक्सीजन संकट के लिए भी दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अगर ऑक्सीजन के नए यूनिट शुरू हो सकते हैं तो फिर दिल्ली में इन्हें क्यों नहीं शुरू किया जा सकता था. अब तो महाराष्ट्र ने भी यूनिट लगाने का ऐलान कर दिया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री सिर्फ सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन की कमी का उलाहना करते हुए हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे.

दवाइयों की खुलेआम हो रही है जमाखोरी और कालाबाजारी

बिधूड़ी ने कहा कि ऑक्सीजन ही नहीं, दिल्ली में जरूरी दवाओं की भी भारी कमी चल रही है. दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोल विभाग की निष्क्रियता के कारण दवाइयों की खुलेआम जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है. कोरोना मरीजों के लिए इस्तेमाल आने वाली रेमेडिसिवर (Remdesivir) तो महंगी दवाई है, नार्मल दवाइयां जैसे डोलो 650, जिनकोविट, अजीथ्रोमैसीन, डोक्सिसाइक्लीन, इवमेनकटिन जैसी दवाइयां भी मांग बढ़ने के कारण नहीं मिल रही. लोग इन दवाओं के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं.

सरकार की तरफ से ऑक्सी मीटर देने का अता-पता नहीं

बिधूड़ी ने कहा कि पिछली बार जब कोरोना पीक पर था तो दिल्ली सरकार ने सभी मरीजों को ऑक्सी मीटर उपलब्ध कराने का बड़े जोर-शोर से प्रचार किया था. इस बार सरकार की तरफ से तो ऑक्सी मीटर देने का अता-पता नहीं है, बाजार में भी ऑक्सी मीटर गायब है.

इसका नतीजा यह है कि कोविड (COVID) मरीजों की हालत बिगड़ रही है और उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा कि उनका ऑक्सीजन लेवल कितना गिर गया है. ऑक्सी मीटर न होने से अस्पतालों पर भी बोझ बढ़ रहा है क्योंकि जिन मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है, वे भी ऑक्सीजन लेवल पता न होने के कारण घबराकर अस्पताल पहुंच रहे हैं.


अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज