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BJP नेता ने की शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाने लिए तत्काल सुनवाई की मांग
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Updated: February 4, 2020, 10:13 PM IST
BJP नेता ने की शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाने लिए तत्काल सुनवाई की मांग
शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा है. (फाइल फोटो)

याचिका में आरोप लगाया गया कि कानून प्रवर्तन तंत्र को “प्रदर्शनकारियों की सनक ने बंधक बनाया हुआ है.” इसमें ऐसे प्रदर्शनों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है जिनसे सार्वजनिक स्थानों पर बाधा उत्पन्न होती है.

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  • Last Updated: February 4, 2020, 10:13 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली भाजपा के एक नेता को यहां शाहीन बाग इलाके में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों लोगों को हटाने की उनकी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध कराने के लिए शीर्ष न्यायालय के संबद्ध अधिकारी का रुख करने का मंगलवार को निर्देश दिया. भाजपा नेता नंद किशोर गर्ग की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ से अनुरोध किया कि दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाली एक सड़क पर करीब दो महीने से चल रहे प्रदर्शन के चलते बाशिंदों को हो रही कठिनाई पर विचार करते हुए याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.

पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति बीआर गवई और सूर्य कांत भी शामिल हैं. न्यायालय ने कहा, ‘‘आप संबद्ध अधिकारी के पास जाइए.’’ बाद में अधिवक्ता ने इस विषय का संबद्ध अधिकारी के समक्ष उल्लेख किया, जिन्होंने जनहित याचिका को फौरन सूचीबद्ध करने का भरोसा दिलाया. शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहां से हटाने की अपनी याचिका पर दिल्ली भाजपा के एक नेता ने सुप्रीम कोर्ट से शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया. न्यायालय ने मंगलवार को उनसे इस मामले में संबद्ध अधिकारी से संपर्क करने को कहा.

15 दिसंबर से यातायात बाधित
याचिका में यह भी कहा गया है कि शाहीन बाग में प्रदर्शन के चलते दिल्ली की कई अन्य सड़कों पर यातायात में समस्या आ रही है. कालिंदी कुंज-शाहीन बाग मार्ग और ओखला अंडरपास पर 15 दिसंबर से यातायात बाधित है जहां सैकड़ों महिलाएं संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन पर बैठ गईं थीं. संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ सैकड़ों महिलाओं के धरने पर बैठने के बाद 15 दिसंबर से कालिंदी कुंज-शाहीन बाग मार्ग और ओखला अंडरपास पर पाबंदियां लगा दी गई हैं.

 

ऐसे प्रदर्शनों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध
याचिका में आरोप लगाया गया कि कानून प्रवर्तन तंत्र को “प्रदर्शनकारियों की सनक ने बंधक बनाया हुआ है.” इसमें ऐसे प्रदर्शनों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है जिनसे सार्वजनिक स्थानों पर बाधा उत्पन्न होती है. याचिका में कहा गया, “यह निराशाजनक है कि राज्य का सरकारी तंत्र प्रदर्शनकारियों की गुंडागर्दी एवं उपद्रव पर मूकदर्शक बना हुआ है जो लोकतंत्र के अस्तित्व और विधि के शासन को चुनौती दे रहे हैं तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति को पहले ही अपने हाथों में ले चुके हैं.”बेशक संवैधानिक मापदंड के दायरे में 
इसमें कहा गया कि शाहीन बाग प्रदर्शन, “बेशक संवैधानिक मापदंड के दायरे में हो” लेकिन इसने अपनी वैधता खो दी है क्योंकि संवैधानिक संरक्षणों का “स्पष्ट तौर पर उल्लंघन हुआ है.” इसमें कहा गया है कि सरकार का कर्तव्य अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण का भी है जिन्हें सड़क अवरुद्ध होने के कारण समस्या आ रही है.

याचिका में कहा गया, “इसलिए, इस बात की तत्काल आवश्यकता है कि शहर के बीचों-बीच संवैधानिक संशोधन के खिलाफ प्रदर्शन करने जैसे छिपे हुए एवं दुर्भावनापूर्ण मकसदों के लिए सार्वजनिक स्थानों के दुरुपयोग की इजाजत न दी जाए.”

14 जनवरी को स्थानीय अधिकारियों को स्थिति से निपटने का निर्देश
इसमें कहा गया कि एक अन्य याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी जिसने 14 जनवरी को स्थानीय अधिकारियों को स्थिति से निपटने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की और शाहीन बाग की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या दिल्ली हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से नजर रखने को कहने का अनुरोध किया है.



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First published: February 4, 2020, 10:13 PM IST
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