कांवड़ यात्रा और बकरीद को लेकर गर्म हुई सियासत, तीखी हुई नेताओं की बयानबाजी

कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध के आदेश के बाद बकरीद पर लॉकडाउन में छूट को लेकर राजनीति गर्माई. (सांकेतिक तस्वीर)

सावन में होने वाली सालाना कांवड़ यात्रा पर रोक के आदेशों के बीच केरल में बकरीद मनाने की खबरों को लेकर सियासत गर्मा गई है. कोरोना महामारी की रोकथाम के बीच इन आदेशों को लेकर बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं.

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    नई दिल्ली. कोरोना महामारी की रोकथाम को लेकर इस साल उत्तराखंड ने सालाना कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित राज्य सरकारों को आदेश दिया, जिसके बाद दिल्ली और यूपी की सरकारों ने भी यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस बीच केरल में बकरीद मनाने की छूट देने को लेकर राजनीति गर्मा गई है. सभी दलों के नेताओं की ओर से इस पर बयान आ रहे हैं. बीजेपी के नेता केरल सरकार के रवैये को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से भी बयान दिया जा रहा है. इस बीच डॉक्टरों के संगठन आईएमए ने भी केरल सरकार से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बकरीद पर छूट न देने की अपील की है. आइए, देखते हैं इस मुद्दे पर क्या है विभिन्न दलों के नेताओं और डॉक्टरों की राय.

    कांवड़ यात्रा पर रोक के बाद केरल में बकरीद पर छूट को लेकर भाजपा सांसद रवि किशन ने कोर्ट से सभी पहलुओं पर गौर करने की मांग की है. रवि किशन ने न्यूज 18 के साथ बातचीत में कहा, 'कांवड़ यात्रा और बकरीद के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए. कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों के आस्था से जुड़ा है, जो नियम बनाए गए हैं वह सब के लिए एक होने चाहिए. बीजेपी यही कहती है कि सबका साथ सबका विकास और सब लोग सामान और उसी नीति पर चलना चाहिए. अदालत को इन सभी पहलुओं पर सोचना चाहिए.'

    कुंभ और कोरोना से कोविड फैलता है तो...
    केरल में बकरीद पर छूट को लेकर बीजेपी के कई नेताओं ने बयान दिए हैं. कन्नौज के सांसद सुब्रत पाठक ने कहा, 'अगर हमारे धर्म से कोरोना फैल सकता है, तो आपके धर्म से भी फैल सकता है. हमने बड़ी कांवड़ यात्रा रोकी है, तो इनको भी रोक लगानी चाहिए.' वहीं, शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, 'कुंभ से कोविड फैलता है, कांवड़ यात्रा से भी कोविड फैलता है, पर पहले से ही तबाही के मुहाने पर बैठे केरल की ईद से कोविड कतई नहीं फैलेगा. तथाकथित प्रबुद्ध खामोश हैं!'

    कानपुर नगर के सांसद सत्यदेव पचौरी ने इस मुद्दे पर कहा, 'कांवड़ यात्रा की सारी बातों को सुप्रीम कोर्ट ने देखा था और कुछ सोच समझकर विस्तृत आदेश दिया है कि प्रतीकात्मक तौर पर कांवड़ यात्रा होनी चाहिए. नियम तो एक है सबके लिए. हमारी यह मांग है कि बकरीद पर भी इन बातों का ख्याल रखा जाना चाहिए. भीड़ नहीं होनी चाहिए और सारी बातों का ख्याल रखा जाना चाहिए.' पांचजन्य से जुड़े हितेश शंकर ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने कहा, 'केरल भारत का इकलौता राज्य है जहां शराब की दुकानें हर समय खुली रहती हैं, जबकि दूसरी दुकानें हफ्ते में कभी-कभी खुल पा रही हैं. क्या कम्युनिस्ट सरकार को आम केरलवासियों की जान से ज्यादा शराब की परवाह है? वैसे, दिल्ली में केजरीवाल भी पिनराई की राह पर हैं!'

    कांग्रेस-सपा की भी मांग- केरल सरकार सही निर्णय ले
    केरल में बकरीद पर लॉकडाउन में छूट देने को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की तरफ से भी बयान आए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पूनिया ने कहा, 'उत्तराखंड ने कांवड़ यात्रा पर बैन लगा दिया, उत्तर प्रदेश ने प्रतिबंध नहीं लगाया. सुप्रीम कोर्ट में मामला गया, उसके बाद यूपी सरकार और दिल्ली ने कैंसिल कर दिया. आईएमए ने भी बकरीद पर छूट पर रोक लगाने की अपील की है. उम्मीद है कि केरल सरकार इस बारे में जरूर समुचित निर्णय लेगी.' इधर, समाजवादी पार्टी की ओर से बयान देते हुए सुनील यादव ने कहा, 'हम आप सब लोग कोरोना से लड़ रहे हैं. हर उस चीज पर प्रतिबंध लगना चाहिए जिससे भीड़ होती है. सरकार निर्देश दे या ना दे, यह हमारी और आपकी जिम्मेदारी है. सबको कोरोना से लड़ना है.'

    डॉक्टर बोले- त्योहार पर कोविड न बांटें, IMA ने दी सलाह
    बकरीद पर छूट देने के मामले को लेकर एक तरफ जहां इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केरल सरकार को लॉकडाउन में ढिलाई न बरतने की सलाह दी है. वहीं, डॉक्टरों ने भी कहा कि त्योहार के मौके पर कोरोना का संक्रमण न फैलने दें. AIIMS के मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने कहा, 'कॉमन सेंस होना चाहिए. कोई रॉकेट साइंस नहीं है. अगर फिर लापरवाही की तो सेकेंड वेव की तरह नतीजा आएगा. ऐसा नहीं है कि इस बार तैयारी है, पर जब कोविड की वेव आती है तो सारी तैयारियां धरी की धरी रह जाती है. त्योहारों का मतलब है खुशी बांटना, इसे कोविड-19 बांटने की वजह न बनाएं.'

    डॉक्टरों के संगठन IMA ने इस मामले पर कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है. IMA ने इस बाबत केरल सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि ईद पर भीड़ जुटाने की छूट नहीं दी जाए. सुप्रीम कोर्ट के कहने पर यूपी सरकार और उससे पहले उत्तराखंड की सरकार ने धार्मिक रूप से इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाया है. कोरोना की दूसरी लहर में हुई तबाही को देखने के बाद हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम किसी भी तरह की गैदरिंग न होने दें.

    केदारनाथ धाम में पसरा सन्नाटा
    इधर, उत्तराखंड के मशहूर केदारनाथ धाम में सावन महीने के पहले सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा. कोरोना की वजह से पिछले साल भी यात्रा प्रभावित हुई थी, लेकिन सावन में स्थानीय भक्तों के लिए महादेव के पावन धाम के दरवाजे खोल दिए गए थे. लेकिन इस बार सरकार ने छूट नहीं दी, जिसके कारण भगवान शंकर के मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है. तीर्थपुरोहितों का कहना है कि जब सरकार ने पर्यटन स्थल खोल दिए हैं तो सावन मास में भक्तों के लिए केदारनाथ यात्रा की भी अनुमति दी जानी चाहिए.

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