दिल्ली अनलॉक पर BJP ने खड़े किये सवाल, पूछा-दुकानों को क्यों नहीं खोलना चाहती केजरीवाल सरकार

दुकानों को नहीं खोलने को लेकर केजरीवाल सरकार 
विपक्ष के निशाने पर आ गई है. (File Photo)

दुकानों को नहीं खोलने को लेकर केजरीवाल सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है. (File Photo)

Unlock Delhi: भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल सरकार दुकानें खोलने के मामले में झूठ बोल रही है. यदि उप-राज्यपाल के पास दुकानें खोलने का प्रस्ताव भेजा था तो सार्वजनिक करें.

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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से 7 जून तक लॉकडाउन (Lockdown) को बढ़ा दिया गया है. लेकिन पहले चरण के अनलॉक (Unlock) के तहत दिल्ली में कंस्ट्रक्शन वर्क और फैक्ट्रियों को खोलने का फैसला किया है. लेकिन दुकानों को नहीं खोलने को लेकर केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) विपक्ष के निशाने पर आ गई है.

इस मामले पर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta) ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल सरकार दुकानें खोलने के मामले में झूठ बोल रही है. यदि उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor) के पास दुकानें खोलने का प्रस्ताव भेजा था तो सार्वजनिक करें.

गुप्ता ने कहा कि वास्तविकता ये है कि केजरीवाल सरकार ने फैक्ट्रियों (Factory) और निर्माण कार्य को अनलॉक करने का लिखित प्रस्ताव जो भेजा उसमें दुकानें खोलने का प्रस्ताव शामिल नहीं किया.

गुप्ता ने कहा कि अगर केजरीवाल वास्तव में दुकानें खोलने के पक्ष में है तो उप-राज्यपाल पर प्रस्ताव अब भेज दें.
गुप्ता ने सरकार से मांग की है कि अनलॉक के शुरू में ऑड-इवन आधार पर 6 घंटे के लिए दुकानें खोली जाए. गुप्ता ने इस संबंध में केजरीवाल सरकार से पांच सवाल पूछे हैं.

गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार जानबूझकर द्वेष भावना से दिल्ली के व्यापारियों (Traders) को कुचलने का षडयंत्र रच रही है. केजरीवाल सरकार ने 41 दिनों के बाद अनलॉक शुरू होने पर फैक्ट्रियों को तो खोल दिया.

लेकिन इनमें बनने वाले सामान की बिक्री के लिए दुकानों को नहीं खोला. ये दुकानें जो इतने लंबे समय से बंद पड़ी हैं अनलॉक का हिस्सा होना चाहिये थीं. कल से शुरू होने वाले अनलॉक के पहले चरण में दुकानों को न खोलकर केजरीवाल सरकार ने एक बार फिर व्यापारी विरोधी होने का सबूत दिया है.



लॉकडाउन के कारण व्यापारी तथा उनकी दुकानों में काम करने वाले कामगार व्यापार पटरी से उतरने के कारण सड़कों पर आ गए हैं. और लॉकडाउन के दौरान व्यापारियों को बंद दुकानों के लिए बिजली, पानी, किराया,लाइसेंस इत्यादि के लिए बिना आय के खर्च करना पड़ रहा है.

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