Oxygen पर ब्लेम गेम, BJP ने कहा- दिल्ली में ऑक्सीजन किल्लत के लिए केजरीवाल सरकार जिम्मेदार, नहीं लगाये प्लांट

पिछले साल दिसंबर में पूरे देश में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए योजना तैयार की थी. इसके लिए पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) के तहत दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट के लिए फंड भी मंजूर कर दिया गया था.

पिछले साल दिसंबर में पूरे देश में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए योजना तैयार की थी. इसके लिए पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) के तहत दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट के लिए फंड भी मंजूर कर दिया गया था.

पिछले साल दिसंबर में पूरे देश में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए योजना तैयार की थी. इसके लिए पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) के तहत दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट के लिए फंड भी मंजूर कर दिया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:16 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है. भाजपा जहां ऑक्सीजन किल्लत पर केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) को जिम्मेदार ठहरा रही है. वहीं, दिल्ली सरकार (Delhi Government) केंद्र के उपर ठीकरा फोड़ रही है.

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के लिए दिल्ली सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है. केन्द्र सरकार ने दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट (Oxygen Plant) लगाने के लिए पिछले साल दिसंबर में ही फंड मंजूर कर दिया था. लेकिन अब तक सिर्फ एक प्लांट ही चालू हो पाया है.

यही नहीं, आज दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली सरकार की इस लापरवाही के लिए भी खिंचाई की है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए वह टैंकर तक का इंतजाम नहीं कर पाई. बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के कारण जो भी मौतें हो रही हैं, उनके लिए केजरीवाल सरकार जिम्मेदार हैं. उसे ब्लेम गेम करने की बजाय अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए.

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बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली में आज कोरोना के कारण त्राहि-त्राहि मची हुई है. ऑक्सीजन न होने के कारण सांसों का संकट आ खड़ा हुआ है. केंद्र सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए पिछले साल दिसंबर में पूरे देश में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए योजना तैयार की थी. इसके लिए पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) के तहत दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट के लिए फंड भी मंजूर कर दिया गया था.

ये प्लांट अस्पतालों के साथ ही बनाए जाने थे ताकि उनकी जरूरत पूरी कर सकें. ये प्लांट छोटे स्तर के होते हैं लेकिन वे अस्पताल के लिए पर्याप्त होते हैं.

हैरानी की बात यह है कि दिल्ली सरकार एक भी ऑक्सीजन प्लांट बनाने के लिए केंद्र सरकार के साथ कोई तालमेल नहीं बना पाई. यहां तक कि दिल्ली सरकार यह भी नहीं बता पाई कि आखिर ये प्लांट किन अस्पतालों में लगाए जाने हैं.



बिधूड़ी ने बताया कि ये छोटे ऑक्सीजन प्लांट 14.4 मीट्रिक टन की क्षमता वाले थे. अगर ये प्लांट चालू हो गए होते तो दिल्ली की समस्या काफी हद तक हल हो चुकी होती और अस्पतालों में दाखिल मरीजों और उनके परिजनों को एक-एक सांस के लिए यूं गिड़गड़ाते न देखना पड़ता.

बिधूड़ी ने बताया कि आज भी दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार की खिंचाई की है. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली सरकार ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए टैंकरों तक का इंतजाम नहीं कर पाई.

सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा है कि जब केंद्र सरकार ने गैस की मंजूरी दे दी थी तो उसके बाद यह दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह गैस की सप्लाई के लिए उचित इंतजाम करे.

कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर अपनी टिप्पणी में यह भी कहा है कि ‘समस्या यह है कि आप सोचते हैं कि हर चीज आपकी दहलीज पर आ जाए लेकिन यह कैसे होगा, यही आपको पता नहीं है.

गैस अलॉट होने के बाद आपने ऑक्सीजन हासिल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया. हर राज्य के पास अपने टैंकर है. अगर आपके पास नहीं हैं तो आपको इसका इंतजाम करना चाहिए था.

बिधूड़ी ने कहा कि अब यह पूरी तरह साबित हो गया है कि दिल्ली सरकार कोरोना से लड़ाई में हर मोर्चे पर फेल हो गई है और कोर्ट ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है.
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