मासूम को चलती मालगाड़ी से निकाला था सकुशल, बहादुर लोको पायलट को रेलवे ने दिया ये इनाम

मासूम बच्‍चे को बचाने वाले बहादुर लोको पायलट को रेलवे ने दिया पुरस्‍कार
मासूम बच्‍चे को बचाने वाले बहादुर लोको पायलट को रेलवे ने दिया पुरस्‍कार

बेटे को मिले सम्‍मान पर अतुल की मां कल्‍याणी सिंह ने कहा कि उनका बेटा शुरू से ही बहादुर है. इतना ही नहीं बेहद होनहार भी है. उन्‍हें अपने बेटे पर गर्व है. अतुल ने पहले ही प्रयास में रेलवे की परीक्षा पास कर ली थी. मां कल्‍याणी कहती हैं कि उनका यह मझला बेटा उनके साथ काम में भी हाथ बंटाता था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 6:33 PM IST
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नई दिल्‍ली. मालगाड़ी के इंजन के नीचे से मासूम को बचाने वाले रेलवे के लोक पायलट अतुल आनंद को भारतीय रेलवे ने भी सम्‍मानित किया है. हाल ही में सोशल मीडिया पर  वायरल हुए एक वीडियो में मालगाड़ी के इंजन के नीचे फंसे एक दो साल के मासूम को रेलवे के असिस्‍टेंट लोको पायलट अतुल आनंद लोको पायलट दीवान सिंह के साथ मिलकर बचाया था. एक किशोर ने चलती मालगाड़ी के सामने जैसे ही दो साल के मासूम को फेंका था तभी इन दोनों ने गाड़ी में ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया था और बच्‍चे को सकुशल बाहर निकालकर मां को सौंपा था. इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर पूरे देश में फैल गया और लोग इन दोनों लोको पायलट की तारीफ करते नहीं थक रहे थे.

बेहद दिलचस्‍प है कि इस मासूम को बचाने वाले असिस्‍टेंट लोको पायलट अतुल आनंद इससे पहले भी सैकड़ों लोगों की जान बचा चुके हैं. साथ ही ट्रेनों के हादसे रोक चुके हैं. उनके इन्‍हीं साहसिक कार्यों और सूझबूझ को लेकर कई बार सम्‍मानित भी किया जा चुका है. इसी क्रम में अब इस बच्‍चे को बचाने के लिए भी अतुल आनंद को रेलवे ने पुरस्‍कार दिया है. अतुल आनदं को डीआरएम सम्‍मान दिया गया है. जिसमें उन्‍हें पांच हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और शाबाशी दी गई है. इतना ही नहीं महज तीन साल के करियर में यह अतुल का तीसरा बड़ा सम्‍मान हे. इससे पहले भी अपनी बहादुरी के लिए अतुल सम्‍मानित हो चुके हैं.



बेटे को मिले सम्‍मान पर अतुल की मां कल्‍याणी सिंह ने कहा कि उनका बेटा शुरू से ही बहादुर है. इतना ही नहीं बेहद होनहार भी है. उन्‍हें अपने बेटे पर गर्व है. अतुल ने पहले ही प्रयास में रेलवे की परीक्षा पास कर ली थी. मां कल्‍याणी कहती हैं कि उनका यह मझला बेटा उनके साथ काम में भी हाथ बंटाता था. वह चाहती हैं कि उनका बेटा ऐसे ही समाज और लोगों के लिए आगे भी काम करे.
वहीं रेलवे के आगरा डिवीजन के पीआरओ एस के श्रीवास्‍तव ने न्‍यूज 18 को जानकारी देते हुए बताया कि बिहार के पटना के रहने वाले सीनियर असिस्‍टेंट लोको पायलट अतुल आनंद ने 2017 में ही रेलवे ज्‍वाइन किया है. इसके तुरंत बाद ही उनकी पोस्टिंग आगरा में हो गई. अभी तक तीन साल की नौकरी में अतुल आनंद तीन बार बहादुरी दिखा चुके हैं.

पिछले साल अक्‍टूबर में जब अतुल कोसी-होडल के बीच में तैनात थे तब गंगापुर की तरफ से आने वाली एक यात्री ट्रेन के ऊपर लगे होने वाले तार में कई मीटर लंबा त्रिपाल लटका था. उस वक्‍त अतुल अपने सहयोगी लोको पायलट सुनील नागवंशी के साथ ही मालगाड़ी में थे. मालगाड़ी खड़ी हुई थी. जैसे ही अतुल ने ट्रेन के ऊपर वह त्रिपाल देखा उन्‍होंने तुरंत इसकी सूचना दी और गाड़ी को रुकवाया. अगर ऐसा नहीं होता तो इलेक्ट्रिक सप्‍लाई बाधित होने या स्‍पार्क होने से बड़ी दुघर्टना हो सकती थी. लिहाजा उन्‍हें 14 अक्‍तूबर 2019 को डीआरएम अवार्ड से सम्‍मानित किया गया.

श्रीवास्‍तव बताते हैं कि इसके बाद दूसरी घटना इसी साल मार्च के महीने में हुई. जब पांच मार्च को कर्नाटक एक्‍सप्रेस के तीसरे कोच में एक्‍सल के गर्म होने से आग लग गई थी. उस वक्‍त भी अतुल आनंद को कर्नाटक एक्‍सप्रेस में आग की चिंगारी और धुंआ दिखा था और उन्‍होंने उतरकर तत्‍काल लाल झंडा दिखाकर गाड़ी को रुकवाया था. उस वक्‍त इनके साथ लोको पायलट आनंद कुमार थे. अतुल ने अपनी सूझबूझ से बड़ा हादसा टाला था. इसके लिए भी अतुल को 15 अगस्‍त 2020 को महाप्रबंधक पुरस्‍कार मिल चुका है. अब मासूम की जान बचाकर उन्‍होंने तीसरा बहादुरी का काम किया है. इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम हैं.
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