मिड डे मील: नई शिक्षा नीति में देश के 9.65 करोड़ बच्चों को स्कूल में मिलेगा यह नाश्ता
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मिड डे मील: नई शिक्षा नीति में देश के 9.65 करोड़ बच्चों को स्कूल में मिलेगा यह नाश्ता
अंडा. फाइल फोटो

नाश्ते में किसी दिन मूंगफली, चना और गुड़ होगा तो किसी एक दिन बच्चों को अंडा-दूध (Milk-Egg) भी दिया जाएगा. यह सुझाव एम्स (AIIMS), दिल्ली की कमेटी ने सरकार को दिया है.

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  • Last Updated: August 3, 2020, 5:11 PM IST
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नई दिल्ली. देश में औसतन रोज़ाना 9.65 करोड़ स्कूली बच्चे मिड-डे मील (MDM) खाते हैं. लेकिन नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब उन्हें स्कूल में गर्मा-गर्म नाश्ता भी मिलेगा. रोज़ाना का नाश्ता कैसा होगा यह सुझाव एम्स (AIIMS), दिल्ली की कमेटी ने सरकार को दिया है. नाश्ते में किसी दिन मूंगफली, चना और गुड़ होगा तो किसी एक दिन बच्चों को अंडा-दूध (Milk-Egg) भी दिया जाएगा. किचेन में हलवा बनाने का सुझाव भी कमेटी ने दिया है. गौरतलब रहे देशभर में एमडीएम खाने वाले बच्चों की पंजीकृत संख्या 13.10 करोड़ है, जबकि हर रोज़ खाने वाले बच्चों की संख्या 9.65 करोड़ होती है.

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यह था पीएम मोदी का प्लान
सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए एमडीएम के साथ अब नाश्ता भी शुरू किया जा रहा है. मोदी सरकार 2016 से इस दिशा में काम कर रही थी. एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया था कि 30 से 40 फीसदी से अधिक बच्चे इसलिए स्कूल जाते हैं, ताकि उन्हें दोपहर का भोजन मिल सके. इसी के चलते नाश्ता शामिल करने की योजना तैयार हुई. क्योंकि इसी रिपोर्ट में सामने आया था कि यह बच्चे पौष्टिक आहार न मिलने से कुपोषण के शिकार होते हैं. इसलिए नाश्ते में पौष्टिक आहार को शामिल किया जा रहा है.

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मिड डे मील पर खर्च होने वाला सालाना बजट.


इलाकाई खान-पान के चलते शामिल हो सकता है अंडा

एम्स की कमेटी ने नाश्ते के मैन्यू को कुछ इस तरह से तैयार किया है कि बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा पौष्टिक भोजन खाने को मिले. इसी के चलते अंडे को नाश्ते में शामिल किया गया है. लेकिन इलाकाई खान-पान के आधार पर बच्चों को अंडा दिया जा सकता है. जानकारों की मानें तो नॉर्थ-ईस्ट के स्कूलों में एमडीएम में अंडा शामिल है. नाश्ते के इस मैन्यू में राज्य सरकार चाहें तो बदलाव कर सकती हैं. इस बदलाव में ओर अधिक आइटम जुड़ सकते हैं.

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ऐसा होना चाहिए बच्चों को मिलने वाला भोजन.


-कक्षा 1 से 5 के प्रति छात्र रोजाना का खर्च

100 ग्राम गेहूं/चावल

4.13 रुपये कंवर्जन कॉस्ट

-कक्षा 6 से 8 के प्रति छात्र

150 ग्राम गेहूं/चावल रोजाना

6.18 रुपये कंवर्जन कॉस्ट

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मिड डे मील में इसका रखा जाता है खास ध्यान.


एमडीएम एक नजर में 

-2.41 करोड़ का गेहूं/चावल रोज बनता है.

-48.25 करोड़ रुपये का तड़का लगता है.

-एमडीएम बनाने वाले रसोइयों की संख्या- 25.38 लाख.

-रसोइयों का वेतन- एक हजार रुपये प्रति महीना.

-एमडीएम वर्ष 2016-17 का बजट- 9478 करोड़.

- एमडीएम के लिए सरकार देती है 2 रुपये किलो गेहूं, 3 रुपये चावल.

- स्कूलों में 8172 करोड़ की लागत से बने हुए हैं रसोइघर.
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