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कोरोना के दौरान आप भी पाल रहे हैं कुत्‍ते, बकरी और घोड़े तो पढ़ें ये रिपोर्ट, पालने में होगी आसानी  

ब्रुक के सर्वे में खुलासा हुआ है कि पालतू जानवरों जैसे कुत्‍ते,बिल्‍ली, चूहा, घोड़ा और बकरी आदि की अपनी-अपनी आदते होती हैं ऐसे में अगर उनका ध्‍यान रखा जाए तो उन्‍हें आसानी से हैंडल किया जा सकता है.

ब्रुक के सर्वे में खुलासा हुआ है कि पालतू जानवरों जैसे कुत्‍ते,बिल्‍ली, चूहा, घोड़ा और बकरी आदि की अपनी-अपनी आदते होती हैं ऐसे में अगर उनका ध्‍यान रखा जाए तो उन्‍हें आसानी से हैंडल किया जा सकता है.

पालतू जानवरों की कुछ खास आदतें होती हैं. एक घोड़ा किसी भी मनुष्‍य के साथ करीब आठ महीने पहले हुई जान-पहचान को भी याद रखता है. वहीं बकरियों को पालने वाले भी शायद ये बात नहीं जानते कि ब‍करियों को खुशमिजाज चेहरे काफी पसंद होते हैं. इसी तरह कुत्‍ते की भी अपनी आदत होती है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी (Covid Pandemic) के दौरान घर पर रहने के कारण अगर आप भी कोई पालतू जानवर अपने घर लेकर आए हैं और उसे खुश रखने या हैंडल करने के तरीके तलाश रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. जानवरों को लेकर काम करने वाले एनजीओ ब्रुक (Brooke) ने हाल ही में एक सर्वे किया है जिसमें पालतू जानवरों (Pets) की कुछ विशेष आदतों का जिक्र किया है. साथ ही बताया है कि इन्‍हें बेहतर तरीके से पालने और खुश रखने के लिए क्‍या किया जाना चाहिए.

ब्रुक इंडिया के एनिमल हेल्‍थ एंड वेलफेयर हेड डॉ. निधीश भारद्वाज कहते हैं कि किसी भी जानवर को पालने के लिए खुश रखना बेहद जरूरी है जबकि भारत में पालतू जानवरों के साथ सख्‍ती से पेश आते हैं फिर चाहे वे घोड़े-गधे हों या गाय-भैंस. वे कहते हैं कि ब्रुक इंडिया के 20 साल पूरे हो चुके हैं इस दौरान किए गए अध्‍ययनों में यही बात सामने आई है कि पालतू जानवरों की सेहत और उनका मनुष्‍यों के प्रति व्‍यवहार बहुत कुछ लोगों की हैंडलिंग या जानवरों से पेश आने के तरीके पर निर्भर होता है.

इन जानवरों के बारे में जानें जरूरी बातें

पशुओं के खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था रखें. उन्‍हें तय समय पर खाने को दें. साथ ही अपने पशुओं के भोजन और पानी पीने के बर्तनों को साफ रखें. साथ ही वह अच्‍छा महसूस करे इसके लिए जब समय मिले अपने पालतू जानवर के साथ खेलें, उसे सहलाएं. इससे वह खुश रहेगा.

पशुओं के खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था रखें. उन्‍हें तय समय पर खाने को दें. साथ ही अपने पशुओं के भोजन और पानी पीने के बर्तनों को साफ रखें. साथ ही वह अच्‍छा महसूस करे इसके लिए जब समय मिले अपने पालतू जानवर के साथ खेलें, उसे सहलाएं. इससे वह खुश रहेगा.

. अगर आप भी कुत्‍ते (Dogs) पालने के शौकीन हैं और अपने घर कुत्‍ता लेकर आए हैं या स्‍ट्रीट डॉग्‍स से लेकर किसी पड़ौसी के कुत्‍ते को भी खिलाने की चाहत रखते हैं तो आपके लिए यह जानना काफी जरूरी है. कुत्‍तों को बहुत नरमी या प्‍यार से थपथपाना और मुंह से उसका नाम लेते हुए हल्‍के हल्‍के प्‍यार से खरोंचना काफी पसंद होता है.

. आपने चूहा (Rat) पाला है तो उसे हैंडल करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती होगी लेकिन अगर आप उसे गुदगुदाते हैं तो वह बार-बार आपके पास आएगा और उसे रखना आसान हो जाएगा.

. घोड़े (Horses) दौड़ने में ही फुर्तीले और तेज नहीं होते बल्कि उनकी याददाश्‍त भी काफी अच्‍छी होती है. अगर आप घोड़ों के आसपास रहते हैं या रहना चाहते हैं तो याद रखें कि एक घोड़ा किसी भी मनुष्‍य के साथ करीब आठ महीने पहले हुई जान-पहचान को भी याद रखता है. घोड़े को उस व्‍यक्ति का न केवल चेहरा बल्कि हाव-भाव और व्‍यवहार भी याद रहता है ऐसे में अगली बार घोड़े से मिलें तो अच्‍छा प्रभाव छोड़ना न भूलें.

. बकरियों (Goats) को पालने वाले भी शायद ये बात नहीं जानते कि ब‍करियों को खुशमिजाज चेहरे काफी पसंद होते हैं. बकरियां अगर खुश रहने वाले लोगों के साथ रहती हैं तो स्‍वस्‍थ्‍य भी रहती हैं.

. मुर्गे पालने वाले लोगों को ये बात जानना जरूरी है कि मुर्गिंया लोगों से डरकर कम अंडे देती हैं जबकि मनुष्‍यों के डर के अभाव में अंडे देने की उनकी क्षमता बढ़ जाती है.

. गधे (Donkeys) थोड़े जिद्दी और आलसी होते हैं लेकिन दिमाग इनमें काफी होता है. ये खतरे को समय पर भांप जाते हैं और तुरंत उससे बचने के लिए फैसला भी ले लेते हैं.

ब्रुक के सर्वे में कई बड़े खुलासे

घोड़े किसी भी व्‍यक्ति से मिलने के बाद उसे आठ महीने तक याद रखते हैं.

घोड़े किसी भी व्‍यक्ति से मिलने के बाद उसे आठ महीने तक याद रखते हैं. सांकेतिक तस्‍वीर

खासतौर पर गधे, घोड़े और खच्‍चरों के जीवनस्‍तर को सुधारने के लिए काम करने वाले एनजीओ ब्रुक ने हाल ही में जारी सर्वे में पालतू जानवरों की हैंडलिंग या पालने के तरीकों को लेकर खुलासे किए हैं. ब्रुक इंडिया से जुड़े एनिमल हेल्‍थ एंड वेलफेयर हेड डॉ. निधीश भारद्वाज बताते हैं कि पालतू जानवरों के साथ व्‍यवहार को दोनों ही चीजें भारत में देखी गई हैं. कुछ लोग बेहद अच्‍छे तरीके से पेश आते हैं जबकि अधिकांश लोग जानवरों के साथ सही व्‍यवहार नहीं करते हैं. जबकि कई सर्वे और अध्‍ययनों में देखा गया है कि जानवरों के साथ अगर प्रेम से पेश आते हैं और विनम्र व्‍यवहार करने से उन्‍हें हैंडल करना बेहद आसान हो जाता है.

डॉ. निधीश कहते हैं कि हाल ही में ब्रिटेन में किए गए सर्वे में 67 फीसदी लोगों ने माना है कि वे अपने पालतू जानवरों को फर्नीचर पर जाने देते हैं. वहीं 49 फीसदी ने माना कि वे अपने पालतू पशुओं को वही खाना देते हैं जो वो खाते हैं. जबकि 31 फीसदी लोगों ने माना कि वे अपने पालतू जानवरों को अपना चेहरा चाटने या छूने देते हैं. वहीं 50 फीसदी ने माना कि वे पालतू जानवरों को और कैसे खुश रखें ये सीखना चाहते हैं. इस सर्वे में 94 फीसदी लोगों ने माना कि वे समझते हैं कि उनका पालतू क्‍या महसूस कर रहा है. वहीं पांच में से तीन ने माना कि वे अपने पालतू कुत्‍ते या बिल्‍ली को अपने बेड पर सोने देते हैं.

कोरोना में बढ़ी पालतु पशुओं की संख्‍या

इस सर्वे के मुताबिक विश्‍व में पालतू पशुओं की संख्‍या काफी बढ़ी है. कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन और लोगों के ज्‍यादातर समय घर पर रहने के कारण बहुत सारे लोगों ने समय बिताने के लिए कुत्‍ते, बिल्‍ली, चूहे, खरगोश आदि जीवों को पालना शुरू किया है. वहीं डॉ. निधीश कहते हैं कि भारत में भी कोरोना में निश्‍चित ही पालतू पशुओं की संख्‍या बढ़ी है लेकिन इसकी एक तय संख्‍या बताना मुश्किल है. हालांकि पालतू पशुओं को दिए जाने वाले खाने की मांग बढ़ने के कारण भी पालतू पशुओं के बढ़ने का अनुमान लगाया गया है.

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