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बुराड़ी केस: अब तक घर से मिले 20 रजिस्टर, 7 दिन की पूजा-रिहर्सल के बाद परिवार ने लगाई फांसी

बुराड़ी केस: अब तक घर से मिले 20 रजिस्टर, 7 दिन की पूजा-रिहर्सल के बाद परिवार ने लगाई फांसी

दिल्ली के बुराड़ी में मारे गए एक ही परिवार के 11 सदस्यों की तस्वीर

दिल्ली के बुराड़ी में मारे गए एक ही परिवार के 11 सदस्यों की तस्वीर

पास-पड़ोस के लोगों ने पुलिस को बताया कि एक हादसे में ललित की आवाज चली गई थी. वह अपनी बातें लिखकर बताने लगा. करीबियों के मुताबिक, इसी दौरान ललित ने बताया कि उसके मृत पिता उसे दिखाई देते हैं और बातें करते हैं.

    दिल्ली के बुराड़ी में हुए 11 लोगों के मास सुसाइड के मामले में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भाटिया परिवार के घर से अब तक कुल 20 रजिस्टर बरामद किए हैं. इनमें परिवार का छोटा बेटा ललित अपने मरे हुए पिता की बातें और निर्देश लिखा करता था. कुछ रजिस्टर में ऐसी-ऐसी बातें लिखी हैं, जिससे साफ होता है कि पूरा परिवार किसी साइकोलॉजिकल बीमारी से ग्रस्त था. पुलिस के मुताबिक, परिवार के 9 लोगों के सुसाइड के लिए 5 स्टूल थे, लेकिन भांजी प्रियंका के लिए अलग से स्टूल रखा गया था.

    पुलिस के मुताबिक, ललित के पिता भोपाल सिंह पहले राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रहते थे. शादी के बाद हरियाणा आ गए. करीब 23 साल पहले वो दिल्ली के बुराड़ी में शिफ्ट हुए थे. 2007 में भोपाल सिंह की मौत हो गई. जिसके बाद उनका दूसरा बेटा दिनेश राजस्थान लौट आया. अब बुराड़ी के संतनगर स्थित मकान में परिवार के 11 लोग रहते थे. घर का छोटा बेटा होने की वजह से ललित भाटिया अपने पिता भोपाल सिंह का लाड़ला था और उनका बेहद करीबी था. पिता की मौत का असर उसपर सबसे ज्यादा पड़ा. ललित सदमे में था.

    पास-पड़ोस के लोगों ने पुलिस को बताया कि एक हादसे में ललित की आवाज चली गई थी. काफी इलाज के बाद आवाज नहीं लौटी. तब से वह अपनी बातें लिखकर बताने लगा. परिवार के करीबियों के मुताबिक, इसी दौरान ललित ने परिवार को बताया कि पिता भोपाल सिंह उसे दिखाई देते हैं और बातें करते हैं.


    ललित ने रजिस्टर में लिखी थी मोक्ष की बातें
    ललित कहता था कि उसके पिता सपने में आते हैं. वह सपने में पिता के साथ हुई हर बात एक रजिस्टर में नोट करता था. एक रजिस्टर में ललित ने मोक्ष के बारे में लिखा है. पुलिस को लगता है कि यह घटना उनकी मोक्ष प्राप्ति का बस रिहर्सल थी. पूरे परिवार को उम्मीद थी कि अगर फांसी के फंदे से वे लटक भी जाएंगे, तो 'मृत पिता' आकर बचा लेंगे. फिर एक-दूसरे के हाथ खोलने में मदद करेंगे.

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    क्या हर सदस्य नहीं करना चाहता था सुसाइड?
    पुलिस को मिले 24 जून के नोट पर अगर गौर करें, तो हर लाइन के अलग मायने हैं, जो इस बात पर जोर देते हैं कि पूरा परिवार मरना नहीं चाहता था. पुलिस सूत्रों की मानें तो जिस अवस्था में घर में सभी शव मिले, उसमें बड़े भाई भुवनेश उर्फ भूपी के शव को देखकर लगता है कि आखिरी वक्त में उसने अपने चेहरे के हिस्से को ऊपर-नीचे कर फंदे से बचने की कोशिश की होगी. मगर वह बच नहीं सका.

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    10 लोगों के फांसी के लिए 6 स्टूल
    भाटिया परिवार में नारायणी देवी (78), बड़ा बेटा भुवनेश (50), उसकी पत्नी सविता (48), तीन बच्चे नीतू, मोनी और ध्रुव, ललित (45), उसकी पत्नी टीना (42), ललित का बेटा शिवम, नारायणी देवी की 57 साल की विधवा बेटी प्रतिभा, प्रतिभा की 33 साल की बेटी प्रियंका रहते थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 जून को रात 10 बजे भुवनेश की पत्नी नीतू 6 प्लास्टिक के स्टूल लेकर आई थी. सीसीटीवी फुटेज में वह स्टूल लाते कैद भी हुई. रात 10.20 पर नीचे की फर्नीचर की दुकान से बच्चे रस्सी लेकर गए. परिवार के 9 लोगों ने फांसी के लिए 5 स्टूल इस्तेमाल किए. छठा स्टूल प्रियंका ने इस्तेमाल किया. फांसी से पहले सभी के हाथ बंधे थे. सिर्फ ललित और उसकी पत्नी के हाथ खुले थे.

    ये भाटिया नहीं चुंडावत हैं
    परिवार की बेटी प्रतिभा ने भाटी परिवार में शादी की थी. पति की मौत के बाद वह दिल्ली में अपने मायके आकर रहने लगी. प्रतिभा जिन बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी, उनके अभिभावक उसे भाटी से भाटिया मैडम बुलाते थे. इस तरह पूरा परिवार भाटिया के नाम से जाना जाने लगा.

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    घर में चल रहा था कोई धार्मिक अनुष्ठान
    पुलिस की जांच में साफ हुआ है कि प्रतिभा की बेटी प्रियंका मांगलिक थी, जिसकी शादी नहीं हो रही थी. इसीलिए परिवार 24 से 7 जून तक पूजा कर रहा था. इस बीच मोक्ष प्राप्ति की रिहर्सल भी हो रही थी. पुलिस ने आशंका जताई है कि 30 जून की रात को भाटिया परिवार मोक्ष का रिहर्सल कर रहा था. 11 लोगों की मौत एक्सीडेंटल है.

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