..तो क्या अब दिल्ली में नए उद्योग धंधे नहीं लगेंगे! केजरीवाल सरकार की इन नीतियों से उलझन में बिजनेसमैन

दिल्ली के अंदर औद्योगिक क्षेत्रों में मोटे-मोटे तौर पर निर्माण गतिविधियों की अनुमति होती थी.
दिल्ली के अंदर औद्योगिक क्षेत्रों में मोटे-मोटे तौर पर निर्माण गतिविधियों की अनुमति होती थी.

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) ने कहा है कि अब दिल्ली में सर्विस और हाईटेक इंडस्ट्री (Hitech and Service Industries) से जुड़े लोगों को उद्योग लगाने के लिए उत्तर प्रदेश या हरियाणा के शहरों में जाने की जरूरत नहीं. अब उन्हें दिल्ली में ही काफी सस्ती दर पर ज्यादा जगह मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 7:55 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Areas in Delhi) की सूरत अब बदलने वाली है. अब दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने ये फैसला किया है कि दिल्ली में अब कोई भी नई इंडस्ट्री लगती है तो उसमें केवल हाईटेक और सर्विस इंडस्ट्री (Hitech and Service Industries) बनाने की ही अनुमति होगी. दिल्ली में कोई मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री नहीं लगेगी. आने वाले दिनों में सभी मैन्युफैक्चर इंडस्ट्री बंद हो जाएगी. सिर्फ हाईटेक और सर्विस इंडस्ट्री ही बनेगी. केजरीवाल सरकार ने कहा है कि अब दिल्ली में सर्विस और हाईटेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उद्योग लगाने के लिए उत्तर प्रदेश या हरियाणा के शहरों में जाने की जरूरत नहीं. अब उन्हें दिल्ली में ही काफी सस्ती दर पर ज्यादा जगह मिलने का रास्ता साफ हो गया है. बीते सोमवार को सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) ने इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, 'दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में बदलाव को लेकर हमने तीन साल पहले केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था. केंद्र सरकार ने उस पर मुहर लगा दी है और अब आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्रों की सूरत बदल जाएगी.'



केजरीवाल ने यह दावा किया
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'औद्योगिक क्षेत्रों में अभी तक निर्माण उद्योग लगाने की अनुमति थी, लेकिन अब नए औद्योगिक क्षेत्रों में केवल हाईटेक और सर्विस उद्योग लगाने की अनुमति होगी. अभी तक सर्विस उद्योग मास्टर प्लान में ऑफिस की श्रेणी में आते थे और केवल कमर्शियल एरिया में खुल सकते थे, जो काफी महंगे होते थे. इसलिए यह उद्योग नोएडा, फरीदाबाद या गुरुग्राम चले जा रहे थे. पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को अपने मौजूदा उद्योग को बंद करके हाईटेक या सर्विस इंडस्ट्री लगाने के लिए मौका दिया जाएगा. हमें उम्मीद है कि यह निर्णय दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बहुत ही अहम कदम साबित होगा.'
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दिल्ली में बहुत सारे निर्माण उद्योग लगे हुए हैं.




किन उद्योगों का होगा फायदा और नुकसान
बता दें कि अभी तक दिल्ली के अंदर औद्योगिक क्षेत्रों में मोटे-मोटे तौर पर निर्माण गतिविधियों की अनुमति होती थी. दिल्ली में बहुत सारे निर्माण उद्योग लगे हुए हैं. इसमें सरिया, स्टील, प्लास्टिक बनाने संबंधी किस्म-किस्म के निर्माण उद्योग हैं, जो बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं. आप किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में चले जाएं, वहां पर आपको बुरे हालत देखने को मिलते हैं. वहीं, अब यह निर्णय लिया गया है कि दिल्ली के अंदर अब कोई भी नया औद्योगिक क्षेत्र बनेगा तो वहां पर केवल हाईटेक और सर्विस उद्योग लगाने की ही अनुमति दी जाएगी.

निर्माण कार्य करने वाले उद्योगों को अनुमति नहीं
अब दिल्ली में अन्य निर्माण कार्य करने वाले उद्योगों को लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अब नए औद्योगिक क्षेत्रों में सिर्फ हाईटेक और सर्विस उद्योगों को अनुमति दी जाएगी. जितने भी पुराने औद्योगिक क्षेत्र हैं, वहां पर जो लोग चाहेंगे, उनको मौका दिया जाएगा कि वे अपनी मौजूदा औद्योगिक ईकाई को बंद करके नई औद्योगिक गतिविधि अर्थात सर्विस या हाईटेक उद्योग लगा सकते हैं.

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही सिर्फ वायु प्रदूषण की समस्या नहीं है, बल्कि अन्य शहरों के लिए जहरीली हवा लोगों के लिए सिर दर्द बन गया है. अब खबर है कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी प्रदूषण बढ़ने की वजह से वायु गुणवत्ता खराब हो गई है.ससे लोगों का स्‍वच्‍छ हवा में सांस लेना दूभर हो गया है. प्रदूषण का आलम यह है कि कई स्थानों पर विजिबिलिटी काफी कम हो गई है.
देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब हो गई है.


क्या कहते हैं व्यवसायी
ऑडियो-वीडियो सिस्टम इंट्रीगेटर और मिडिटास इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राकेश चौधरी कहते हैं, 'दिल्ली सरकार की यह नीति समझ से परे है. केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में जमे हुए उद्योग को उजाड़ने की योजना बना ली है. भ्रष्टाचार की वजह से वैसे ही उद्योग चलाना यहां मुश्किल हो रहा है. ऊपर से सरकार का यह फरमान हमलोगों की चिंता बढ़ा दी है. कोई आदमी अब कैसे व्यापार कर सकता है? सरकार वायदे तो बड़े-बड़े करती है, लेकिन जमीन पर उन योजनाओं का हस्र क्या हो रहा है वह भी सबके सामने है. कोरोना काल में वैसे भी इंडस्ट्री बेहाल है. अब नई-नई नीतियों की वजह से दिल्ली का पूरा उद्योग धंधा खत्म हो जाएगा.'

क्या कहता है विपक्ष
दिल्ली सरकार के इस फैसले पर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कटाक्ष किया है. कपिल मिश्रा न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'अब मेन्युफेक्चरिंग बैन होने पर छोटे व्यापारी और छोटी मैनुफैक्चरिंग यूनिट पर असर पड़ेगा. मेन्युफेक्चरिंग बैन होने से लाखों लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा. विश्वास नगर, गांधी नगर, करावल नगर, वज़ीरपुर, मंगोलपुरी जैसे इलाको में लाखों मजदूरों पर इसका सीधा असर होगा. केजरीवाल सरकार के पास न तो कोई प्लान है और न कोई विजन. कभी सीलिंग का डंडा पड़ता है तो कभी प्रदूषण का.'

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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार सख्त हो गई है.


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इस तरह के उद्योग अब दिल्ली में लगेंगे
दिल्ली सरकार ने नए औद्योगिक क्षेत्रों में लगने वाली इंडस्ट्री को सूचीबद्ध किया है. कंप्यूटर हॉर्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री, इंडस्ट्री इंटीग्रेटिंग एंड मैनुपुलेटिंग द इंटरफेस ऑफ कंप्युटर एंड टेलीकॉम फैसिलिटीज, आईटी सर्विस इंडस्ट्री, इंटरनेट एंड ई-मेल सर्विस प्रोवाइडर, आईटीईएस इंडस्ट्री, कस्टमर इंटरेक्शन सर्विसेज, कॉल सेंटर, ई-मेल हेल्पडेस्क, बैक ऑफिस प्रोसेसिंग, फाइनेंस एंड अकाउंटिंग, इंश्योरेंस क्लेम, एचआर सर्विसेज, बिजनेस प्रॉसेज आउट सोर्सिंग, नॉलेज इंडस्ट्री, सॉफ्टवेयर एक्सटेंशन, मीडिया इंडस्ट्री, टीवी एंड वीडियो प्रोग्राम प्रोडक्शन, फोटो कंपोजिंग एंड डेस्कटॉप पब्लिकेशन, पब्लिशिंग सर्विसेज, ऑडियो विजुअल सर्विसेज और सभी प्रकार की आर एंड डी के कार्यालय खुल सकते हैं. साथ ही, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील, ऐड एजेंसी, मार्केट रिसर्च एंड पब्लिक ओपनियन सर्विसेज, इक्विटी सर्विसेज, प्लेसमेंट सर्विसेज, वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से जुड़े लोग अपने कार्यालय खोल सकते हैं.
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