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    दिल्‍ली में यहां से सस्‍ते में खरीदें ग्रीन पटाखे, जानें कैसा है पटाखा बाजार का हाल

    ग्रीन पटाखों को पर्यावरण हितैषी माना जाता है. (File Pic)
    ग्रीन पटाखों को पर्यावरण हितैषी माना जाता है. (File Pic)

    Green Crackers : सदर बाजार में पटाखों का होलसेल बाजार लगता है. दीवाली के आसपास यहां सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सड़क पर पटरी लगती है, जहां से बाहरी राज्‍यों का व्‍यापारी आकर माल खरीदता है और बेचने के लिए अपने राज्‍यों में ले जाता है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 5:57 PM IST
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    द‍िवाली (Diwali 2020) का त्‍योहार नजदीक है और आतिशबाजी करने के शौकीन पटाखे और फुलझाड़ियां जलाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हालांकि कोविड-19 के चलते बाजार पूरी तरह सूने पड़े हैं. बाजार में पटाखे उस हद तक उपलब्‍ध नहीं हैं, जैसा की पहले हुआ करते थे.

    पटाखों के होलसेल विक्रेता भी इस बार पटाखों और ग्राहकों की कम आमद से परेशान हैं, जिस वजह से उन्‍होंने पटाखों की बिक्री में प्रॉफ‍िट मार्जिन भी कम कर दिया है. ऐसे में खूब आतिशबाजी करने वाले दिल्‍ली के लोग कहां-कहां से ग्रीन पटाखे (Green Crackers) खरीद सकते हैं और बाजार का क्‍या हाल है, आइये आपको बताते हैं...

    दिल्‍ली में ग्रीन पटाखे कहां-कहां मिलते हैं...
    सदर बाजार
    जामा मस्जिद


    फ‍िलमिस्‍तान
    गीता कालोनी
    शाहदरा
    पुल बंगश
    आजाद मार्किट
    पहाड़गंज मेन रोड
    करोल बाग
    साउथ दिल्‍ली में कई जगहों पर



    सदर बाजार में पटरी पर सुबह 6 बजे से लगता है पटाखों का बाजार
    पहाड़ी धीरज व्‍यापार संघ के चेयरमैन डीके जैन कहते हैं, सदर बाजार में पटाखों का होलसेल बाजार लगता है. दीवाली के आसपास यहां सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सड़क पर पटरी लगती है, जहां से बाहरी राज्‍यों का व्‍यापारी आकर माल खरीदता है और बेचने के लिए अपने राज्‍यों में ले जाता है.

    केवल व्‍यापारी ही नहीं, आम लोग भी यहां से अच्‍छे मार्जिन पर पटाखे खरीदकर ले जाते हैं. यहां मुर्गा ब्रांड से लेकर लोकल ब्रांड के पटाखे भी अच्‍छे दामों पर मिल जाते हैं.

    जामा मस्जिद भी है पटाखों का बड़ा बाजार
    फ‍िर भी अगर आपको दिल्‍ली में होलसेल रेट पर पटाखे खरीदने हैं तो सदर बाजार और जामा मस्जिद का रुख करें. पटाखों के होलसेल कारोबार के सबसे बड़े बाजार सदर बाजार व्‍यापार संघ ग्रीन मार्किट के चेयरमैन मेहरबान कुरैशी ने न्‍यूज 18 से खास बातचीत में बताया कि दिल्‍ली और देशभर में ज्‍यादातर ग्रीन पटाखे तमिलनाडु के शिवाकाशी से ही आते हैं. साथ ही दिल्‍ली और आसपास के इलाकों में भी लोकल पटाखों की फैक्ट्रियां भी हैं. ये फैक्ट्रियां भजनपुरा, शाहदरा, दुर्गापुरी, नबी करीब, बाड़ा, लोनी और फरुखनगर में हैं. यहां ज्‍यादातर लोकल आतिशबाजी बनती है.

    कम रेट पर मिल रहे हैं पटाखे
    मेहरबान कुरैशी बताते हैं कि कोरोना के चलते इस बार दिल्‍ली में बाजार से रौनक गायब है. यानी बिल्‍कुल भी काम नहीं है. फुलझड़ी, चकरी, स्‍काईशॉट, रॉकेट, अनार, सुतली बम जैसे ग्रीन पटाखे कम रेट पर मिल रहे हैं.

    कम मार्जिन पर पटाखे बेचने को मजबूर हैं विक्रेता
    कई विक्रेताओं ने बताया कि इस बार पटाखों की ब्रिकी बेहद कम हो रही है. इस वजह से 25 से 30 प्रतिशत कम मार्जिन पर पटाखे बेचने को मजबूर हैं. अमूमन पटाखों की बिक्री में 50 प्रतिशत का मार्जिन यानी लाभ होता है, लेकिन अब यह घटकर 15 से 20 प्रतिशत तक ही रह गया है.

    क्‍या होते हैं ग्रीन पटाखे?
    ग्रीन पटाखों को पर्यावरण हितैषी माना जाता है. वैसे तो ये पटाखे पारंपरिक पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनके जलने पर प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है. दरअसल, यह न सिर्फ जलने पर पानी के अणु पैदा करते हैं, जिसके कारण पटाखों द्वारा उत्पन्न प्रदूषण नियंत्रित होता है. साथ ही यह धूल सोखने की क्षमता रखते हैं. इसके अलावा इनसे निकलने वाली आवाज व धुआं भी काफी कम होता है. इन्हें जलाने पर हानिकारक गैसें भी कम निकलेंगी और प्रदूषण भी 50 प्रतिशत तक कम होता है.
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