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JNU की छात्राएं जमानत मिलने के बाद फिर गिरफ्तार, इस बार दंगा करने का लगा आरोप

दिल्ली में दंगा भड़काने के आरोप में छात्राओं को गिरफ्तार किया गया है. सांकेतिक फोटो.
दिल्ली में दंगा भड़काने के आरोप में छात्राओं को गिरफ्तार किया गया है. सांकेतिक फोटो.

नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.

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दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध के बीच दिल्ली में हुए दंगे के मामले में जेएनयू (JNU) की दो छात्राओं की मुसीबत बढ़ गई है. बीते फरवरी में गिरफ्तार की गईं दोनों छात्राओं को कोर्ट ने जमानत दे दी. अब उन्‍हें विशेष जांच दल (SIT) ने फिर से गिरफ्तार कर दो दिन के रिमांड पर ले लिया है. 'पिंजरा तोड़' नामक संस्‍था से जुड़ीं दोनों छात्राओं पर अब हत्‍या और दंगा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैंं. एसआईटी ने 14 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने दो दिन का ही रिमांड मंजूर किया. बता दें कि इस एसआईटी का गठन उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली में हुए दंगों की जांच के लिए की गई है.

सीएए और एनआरसी (CAA & NRC) के विरोध में प्रदर्शन को लेकर जेएनयू की छात्राएं नताशा नरवाल (32) और देवांगना कलिता (30) को गिरफ्तार किया गया था. पूर्वोत्तर दिल्ली के जाफराबाद पुलिस थाने की टीम ने दोनों को उनके घर से बीते शनिवार को गिरफ्तार किया था. जाफराबाद में सीएए विरोधी प्रदर्शन में उनकी कथित भूमिका के सिलसिले में दिल्ली की एक अदालत ने दोनों को बीते रविवार को जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 353 (सारकारी काम में बाधा डालने) के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जबकि वे सिर्फ एनआरसी और सीएए के खिलाफ विरोध कर रहे थे.

दंगा और हत्या के आरोप
बताया जा रहा है कि बीते शनिवार को दिल्ली क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने दोनों छात्राओं को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगे और आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया. द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पुलिस का दावा है कि देवांगना कालिता (30) और नताशा नरवाल (32) उन लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने 22-23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे एक एंटी-सीएए विरोध और रोड जाम किया था. इसी विरोध के कारण 23 फरवरी को बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और उनके समर्थकों द्वारा सीएए के समर्थन में रैली की गई थी, जिसके बाद जिले में दंगे भड़के.
घर से गिरफ्तारी


खबर के मुताबिक जेएनयू की दोनों छात्राओं को गिरफ्तारी के बाद स्पेशल सेल, जाफराबाद पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच की एसआईटी द्वारा तीन अलग अलग जांच का सामना करना पड़ रहा है. बीते शनिवार को नरवाल से स्पेशल सेल के अधिकारियों ने पूछताछ की थी. जाफराबाद पुलिस स्टेशन की टीम ने उन्हें आईपीसी की धारा 186 (सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में लोक सेवक की बाधा) और 353 के तहत गिरफ्तार किया.

पहले मिली जमानत
खबर के मुताबिक, बीते रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण की कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा- 'एफआईआर और केस फाइल को देखकर प्रथम दृष्टया धारा 353 के तहत अपराध बनाए रखने योग्य नहीं है. मामले के तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी केवल एनआरसी और सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और आरोपी किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थे. साथ ही अभियुक्तों की समाज में मजबूत जड़ें हैं और वे शिक्षित हैं. अभियुक्त जांच के संबंध में पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं' कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त कोविड-19 की वर्तमान महामारी को देखते हुए असुरक्षित हैं. अदालत अभियुक्त के रिमांड को देने की इच्छुक नहीं है और पुलिस रिमांड के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया है.

फिर मांगी अनुमति
इस इस बीच, अपराध शाखा के जांच अधिकारी (IO) कुलदीप सिंह ने अदालत के समक्ष एक आवेदन दिया, जिसमें दोनों महिलाओं से पूछताछ करने की मांग की गई. इसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने 15 मिनट की पूछताछ की अनुमति दी. अभियुक्त की औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति भी दी गई. फिर 15 मिनट के बाद आईओ कुलदीप सिंह ने कोर्ट में आरोपियों के 14 दिनों के लिए रिमांड के लिए आवेदन दिया. इसमें बताया कि घटनाओं के पीछे की साजिश को जानने के लिए अभियुक्तों से पूरी पूछताछ की जानी चाहिए और सह-अभियुक्तों की पहचान भी की जानी है.

विरोध के बाद रिमांड
इसके बाद आरोपियों के वकील आदित एस पुजारी, तुषारिका मट्टू और कुणाल नेगी ने पुलिस के आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि कलिता और नरवाल को मामले में फंसाया गया है. फिर ड्यूटी मजिस्ट्रेट मामले के तथ्यों और परिस्थितियों और जांच के शुरुआती चरण को ध्यान में रखते हुए, दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत की अनुमति दे दी. बता दें कि कलिता जेएनयू के सेंटर फॉर वुमेन स्टडीज़ में एमफिल की छात्रा हैं, वहीं नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज़ में पीएचडी छात्र हैं. वे दोनों 2015 में गठित पिंजरा तोड़ के संस्थापक सदस्य हैं.

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