लाइव टीवी

CAA Protest: महिला पुलिसकर्मियों से प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की, डीसीपी बोले- कराएंगे जांच
Delhi-Ncr News in Hindi

News18Hindi
Updated: February 24, 2020, 8:36 AM IST
CAA Protest: महिला पुलिसकर्मियों से प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की, डीसीपी बोले- कराएंगे जांच
दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे CAA विरोधी प्रदर्शन की एक फाइल फोटो.

दक्षिण दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर (DCP of South Delhi Atul Thakur) ने बताया कि बिना किसी अनुमति के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में CAA के खिलाफ विरोध मार्च निकाला गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2020, 8:36 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली.देश की राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग, जाफराबाद और चांद बाग के बाद रविवार को मालवीय नगर के हौज रानी इलाके (Hauz Rani Area) में भी संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने विरोध मार्च निकाला. दक्षिण दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर ने बताया कि बिना किसी अनुमति के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में मार्च का आयोजन किया गया. कई स्थानों पर ट्रैफिक को ब्लॉक करने की कोशिश भी की गई. जानकारी के मुताबिक, इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर धक्‍कामुक्‍की भी की.

लाठीचार्ज के आरोप की कराएंगे जांच: डीसीपी अतुल ठाकुर
डीसीपी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने मौखिक और शारीरिक रूप से पुलिसकर्मियों और महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और महिला पुलिसकर्मियों को बैरिकेड की ओर धकेल दिया. उनसे हाथापाई भी की गई. उन्होंने बताया कि पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि महिला पुलिसकर्मियों को धक्का देने के बाद पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज किया. DCP ने इस आरोप की भी जांच कराने की बात कही.





यातायात बाधित करने की कोशिश
डीसीपी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर यातायात को बाधित करने का प्रयास किया. प्रदर्शनकारियों को मना लिया गया और बाद में वे वापस धरना स्थल पर लौट आए. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने अत्यधिक संयम और दृढ़ता के साथ इस निरंतर दुर्व्यवहार का सामना किया. हालांकि, प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प में महिला पुलिसकर्मी सहित कई पुलिसवाले घायल हो गए. मामले में कानून के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई की जा रही है.

क्या है सीएए?
संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

क्या है एनआरसी?
एनआरसी यानी नेशनल सिटिजन रजिस्टर के जरिए भारत में अवैध तरीके से रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जाती है. अभी तक एनआरसी की प्रक्रिया सिर्फ असम में की गई है. असम में एनआरसी की फाइनल सूची जारी की जा चुकी है लेकिन असम में एनआरसी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी की गई है. केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पूरे देश में NRC को लागू करेगी. साथ ही यह भी कहा था कि देश भर में लागू होने वाली एनआरसी के मानक असम की एनआरसी के मापदंड से अलग होगा.

ये भी पढ़ें - 

शाहीन बाग पर हबीबुल्‍लाह का SC में हलफनामा- पुलिस ने बेवजह बंद किए हैं रास्ते

निर्भया कांड: दोषी विनय शर्मा ने अब की स्टेपल पिन निगलने की कोशिश

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 24, 2020, 8:06 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading