CAIT करेगा चीनी सामान का बहिष्कार, देसी सामानों से ही बनेंगी इस बार राखियां

कैट की महिला विंग राजनाथ को सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए राखियां सौंपेगी.
कैट की महिला विंग राजनाथ को सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए राखियां सौंपेगी.

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने अपने स्टेट चैप्टर से आग्रह किया है कि वे अपने राज्य के शहरों में कच्ची बस्तियों में काम करने वाले लोग, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी में काम करने वाली महिलाएं, छोटे कारीगर और अन्य लोगों से राखियां बनवाएं.

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दिल्ली. चीन (China) के सामान के बहिष्कार (boycott) के अपने राष्ट्रीय अभियान 'भारतीय सामान - हमारा अभिमान' के अंतर्गत कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस साल की राखी को देश भर में 'हिन्दुस्तानी राखी त्यौहार' के रूप में मनाने का निर्णय किया है.

सीमा पर जवानों को भेजी जाएंगी राखियां

कैट ने फैसला किया है कि इस बार चीन में बनी राखी या राखी से संबंधित कोई भी सामान उपयोग में नहीं लाया जाएगा. देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जाबांज सैनिकों का उत्साहवर्धन करने के लिए कैट की महिला विंग केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath singh) को सीमा पर सुरक्षा कर रहे सैनिकों के लिए 5000 राखियां देंगी. वहीं देश के प्रत्येक शहर में मिलिट्री अस्पतालों में भर्ती सैनिकों को भी कैट की महिला विंग अस्पतालों में जाकर राखियां बांधेगी.



पुलिसकर्मियों को बांधेंगी राखी
देश के हर शहर में लोगों की रक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को भी कैट की महिला विंग राखी बांधकर उन्हें यह संदेश देगी कि देश का प्रत्येक व्यक्ति अपने देश की सेनाओं और पुलिस बल के साथ मजबूती से खड़ा है. देश में राखी के त्यौहार पर एक अनुमान के अनुसार लगभग 6 हजार करोड़ की राखियों का व्यापार होता है, जिसमें अकेले चीन की हिस्सेदारी लगभग 4 हजार करोड़ होती है. राखी के अवसर पर चीन से बनी हुई राखियां तो आती ही रही थीं, वहां से राखी बनाने का सामान जैसे फोम, कागज की पन्नी, राखी धागा, मोती, बूंदे, राखी के ऊपर लगने वाला सजावटी सामान आदि भी आयात होता था. कैट के चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के अभियान के चलते इस वर्ष कोई भी चीनी सामान राखी में उपयोग में नहीं होगा, जिसके कारण चीन को लगभग 4 हजार करोड़ के व्यापार की चपत लगना तय है.

राखी बनाने के लिए लघु उद्योग को दिया जाएगा बढ़ावा

इस वर्ष देश में कहीं पर भी चीन की राखी या राखी में लगने वाला सामान नहीं बेचा जाना चाहिए. कैट ने अपने स्टेट चैप्टर से आग्रह किया है कि वे अपने राज्य के शहरों में कच्ची बस्तियों में काम करने वाले लोग, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी में काम करने वाली महिलाएं, छोटे कारीगर और अन्य लोगों से राखियां बनवाएं और उन्हें बाजारों में बेचने के लिए इन सभी वर्गों के लोगों की सहायता करें. वहीं कैट ने उन छोटे लघु उद्योगों से भी आग्रह किया है कि वे भारतीय सामान का उपयोग कर राखियां बनाएं और देश में हर जगह भारतीय वस्तुओं से बनी राखियां ही मिलें. कैट ने अपनी इस पहल को अंजाम देते हुए दिल्ली, नागपुर, भोपाल, ग्वालियर, सूरत, कानपुर, , रायपुर, भुवनेश्वर, कोल्हापुर,जम्मू आदि शहरों में राखियां बनवाने का काम शुरू कर दिया है.
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