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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस: बड़े लोगों को बचाने के आरोपों को CBI ने बताया गलत
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News18Hindi
Updated: May 3, 2019, 11:19 PM IST
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस: बड़े लोगों को बचाने के आरोपों को CBI ने बताया गलत
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की जांच कर रहे सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हलफनामा दायर कर बताया कि बड़े लोगों को बचाने के आरोप गलत हैं.

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बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की जांच कर रहे सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हलफनामा दायर कर बताया कि बड़े लोगों को बचाने के आरोप गलत हैं.

सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में सीबीआई ने कहा कि मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत अन्य लोगों की 11 हत्याओं के मामले में भूमिका की जांच हो रही है. सीबीआई ने कहा है कि शेल्टर होम में खुदाई में हड्डियां मिली हैं. वहीं, सीबीआई ने इस मामले में जांच पूरी करने के लिए और समय मांगा.

कैसे हुआ खुलासा
बालिका गृह में गड़बड़ी की खबरें प्रदेश सरकार को काफी समय से मिल रही थीं. सरकार द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली बालिकाओं ने अपने ही संस्थान के लोगों पर यौन शोषण और हिंसा का आरोप लगाया था. इस खबरों को पुख्ता करने के लिए सरकार ने मुंबई की प्रतिष्ठित संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) को ऑडिट का काम दिया. 7 महीने तक रिसर्च करने के बाद  (टीआईएसएस) ने 31 मई को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें ये चौंकाने वाले खुलासे हुए.



जानिए कब-कब क्या हुआ
23 नवंबर 2018- मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के आर्म्स एक्ट मामले में 1 दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेजी गईं पूर्व मंत्री मंजू वर्मा.

21 नवंबर 2018- मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर की राजदार मधु को सीबीआई ने किया गिरफ्तार.

20 नवंबर 2018- मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में लड़कियों को नशीला इंजेक्शन लगाने वाला गिरफ्तार.

23 जुलाई, 2018- लड़कियों ने एक साथी की हत्या और बालिका गृह में ही दफनाए जाने का बयान दिया था. इसे देखते हुए मुजफ्फरपुर बालिका गृह परिसर में खुदाई की गई. मिट्टी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया.

23 जुलाई, 2018- एनफोल्ड इंडिया हैदराबाद और एम्स के डॉक्टरों की टीम लड़कियों के इलाज के लिए पटना पहुंची.

22 जुलाई, 2018- भारी मानसिक सदमे से गुजर रहीं 30 लड़कियों को पटना और मधुबनी से मोकामा के नाजरथ अस्पताल और आश्रय में भेजा गया.

19 जुलाई, 2018- पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल (पीएमसीएच) ने पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट मुजफ्फरपुर पुलिस को सौंपी. कुल 21 लड़कियों के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई.

14 जुलाई, 2018- छपरा में बालिका अल्पावास गृह में यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया. एक लड़की के गर्भवती पाए जाने के बाद एनजीओ संचालक गिरफ्तार.

26 जून, 2018- मुजफ्फरपुर जिला बाल संरक्षण अधिकारी रवि रौशन लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार.

03 जून, 2018- एनजीओ संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत आठ आरोपी गिरफ्तार. इनमें ब्रजेश को छोड़ कर बाकी सभी महिलाएं.

31 मई, 2018- जिला बाल सुरक्षा इकाई के सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा ने मुजफ्फरपुर महिला थाने में एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया.

30 मई, 2018- बालिका गृह की सभी 42 लड़कियों को पटना और मधुबनी भेजा गया.

28 मई, 2018– साहू रोड, मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह के संचालक एनजीओ के खिलाफ एफआईआर की अनुमति मिली.

26 मई, 2018– समाज कल्याण विभाग ने मुजफ्फरपुर प्रशासन को रिपोर्ट भेजी.

मई, 2018– टीआईएसएस ने राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी.

सितंबर, 2017 – मार्च 2018– टीआईएसएस ने राज्य भर के बालिका गृह और अल्पावास गृहों में रहने वाली लड़कियों से बातचीत की.

जुलाई, 2017– बिहार सरकार ने राज्य के सभी बालिका गृह और अल्पावास गृहों के सोशल ऑडिट के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के साथ करार किया.

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First published: May 3, 2019, 10:44 PM IST
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