कोयला घोटाला: पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की सजा पर स्पेशल कोर्ट 26 अक्टूबर को सुनाएगा फैसला

वाजपेयी सरकार में दिलीप रे कोयला राज्य मंत्री थे.
वाजपेयी सरकार में दिलीप रे कोयला राज्य मंत्री थे.

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे (Dilip Ray) को झारखंड के गिरिडीह में साल 1999 में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं के मामले में 26 अक्टूबर को कोर्ट फैसला सुनाएगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 8:16 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. दिल्ली के एक सीबीआई स्पेशल कोर्ट (CBI Special Court) ने झारखंड के गिरिडीह में साल 1999 में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं से संबंधित मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे (Dilip Ray) साथ अन्य दोषियों की सजा पर फैसला सुरक्षित रखा लिया है. कोल ब्लॉक आवंटन (Coal Scam) में अनियमितताओं से संबंधित मामले में 26 अक्टूबर को कोर्ट फैसला सुनाएगा. आपको बता दें कि सीबीआई स्पेशल जज भारत पाराशर ने दिलीप को एक आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों को लेकर दोषी ठहराया था. कोर्ट ने कोयला मंत्रालय के तत्कालीन दो वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम, कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, इसके निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड को भी दोषी ठहराया है. कोर्ट सजा के संबंध में 14 अक्टूबर को दलीलें सुनेगी.

आपको बता दें यह मामला 1999 में झारखंड के गिरिडीह में ब्रह्मडीह कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है. वाजपेयी सरकार में दिलीप रे कोयला राज्य मंत्री थे. जबकि बनर्जी कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और गौतम प्रोजेक्ट एडवाइजर थे.

सभी दोषियों ने मिलकर एक साथ रची साजिश
मामले की सुनवाई करने वाले जज ने अपना फैसला सुनाते हुए यह कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि सभी दोषियों ने एक साथ मिलकर इस प्रकार की साजिश रची थी, ताकि कैस्टन टेक्नोलॉजी लिमिटेड के पक्ष में ब्रह्माडीह कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल किया जा सके. फिलहाल कोर्ट ने उन्हें आईपीसी की धारा 120 बी यानी आपराधिक साजिश, 409 यानी विश्वासघात ,धारा 420 ज्ञानी की धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों का दोषी करार दिया था.
ये भी पढ़ें- दुमका उपचुनाव: शिबू सोरेन परिवार से चुनाव लड़ने वाले छठे सदस्य हैं बसंत, जानें पूरी कहानी



कुल 51 गवाहों की हुई मामले में जांच
इस मामले की सुनवाई के दौरान लगभग 51 गवाहों की जांच की गई. सरकारी वकील के मुताबिक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों ने स्पष्ट रूप से सभी निजी पार्टियों और तमाम जन सेवकों द्वारा आपराधिक साजिश रचने की बात कही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज