केंद्र सरकार को कम से कम अब हमसे बात करनी चाहिए: शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी
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केंद्र सरकार को कम से कम अब हमसे बात करनी चाहिए: शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी
शाहीनबाग के कई प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अपनी असहमति को लेकर सरकार से बात करना ही अंतिम रास्ता है. (फाइल फोटो)

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में शाहीन बाग (Shaheen Bagh) के प्रदर्शनकारियों को दूसरे स्थल पर जाने के लिए मनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दो वार्ताकारों की नियुक्ति से प्रदर्शनकारियों को थोड़ी निराशा हुई है, हालांकि उनमें से कई का मानना है कि अपनी असहमति को लेकर सरकार से बात करना ही अंतिम रास्ता है.

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  • Last Updated: February 18, 2020, 9:50 AM IST
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नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में शाहीन बाग (Shaheen Bagh) के प्रदर्शनकारियों को दूसरे स्थल पर जाने के लिए मनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दो वार्ताकारों की नियुक्ति से प्रदर्शनकारियों को थोड़ी निराशा हुई है, हालांकि उनमें से कई का मानना है कि अपनी असहमति को लेकर सरकार से बात करना ही अंतिम रास्ता है.

नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में सैंकड़ों लोग, विशेषकर महिलाएं दिल्ली के शाहीन बाग में डेरा डाले हुए हैं, जिनके प्रदर्शनों की वजह से शाहीन बाग-कालिंदी कुंज नामक मुख्य मार्ग बंद हो गया है जिसके कारण शहर में यातायात की समस्या पैदा हो गई है.

न्याय-समानता के लिए युद्ध का मैदान बना शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल
महिला प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने कहा कि उनके द्वारा लगाए गए तम्बू ने शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल को ‘न्याय और समानता के लिए युद्ध का मैदान’ के रूप में प्रतिरूपित किया है. उन्होंने कहा कि वे वहां से जाने के विचार से विचलित नहीं हैं लेकिन वे पहले सीएए पर सरकार के साथ विस्तृत बातचीत करना चाहते हैं.



कोर्ट के फैसले को पूरे सम्मान के साथ करेंगे स्वीकार


बाटला हाउस की निवासी शाहीदा खान ने कहा, ‘हमने 15 दिसंबर को अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जब जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों को पुलिस द्वारा बुरी तरह से पीटा गया था. हमें स्थानांतरण से बहुत खुशी नहीं होगी लेकिन चूंकि यह अदालत का फैसला है, इसलिए हम इसे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करेंगे.’

दक्षिण-पूर्व दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले एक महीने से ज्यादा समय से सीएए के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. पिछले साल 15 दिसंबर को जामिया नगर में सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शन के ठीक बाद यह प्रदर्शन शुरू हुआ था.

देश के हर राज्य में हो रहा है इस कानून का विरोध
संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: February 18, 2020, 9:40 AM IST
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