दिल्ली माइनॉरिटी कमीशन के चेयरपर्सन ने हाईकोर्ट से मांगी अग्रिम जमानत
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दिल्ली माइनॉरिटी कमीशन के चेयरपर्सन ने हाईकोर्ट से मांगी अग्रिम जमानत
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तीन दिन पहले ही दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जफरल-उल-इस्लाम से उनके घर जाकर पूछताछ की थी. सोशल मीडिया (Social Media) पर भी इसकी खासी चर्चा हुई थी.

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नई दिल्ली. दिल्ली माइनॉरिटी कमीशन (Delhi Minority Commission) के चेयरपर्सन जफरल-उल-इस्लाम ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक याचिका दायर की है. याचिका में उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की है. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124 ए और 153 ए के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है.

आरोप लगाया गया है कि 28 अप्रैल को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने सोशल मीडिया (Social Media) पर अपने आधिकारिक पेज से कथित राजद्रोही और नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों भरा एक पोस्ट किया था. अभी तीन दिन पहले ही दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जफरल-उल-इस्लाम से उनके घर जाकर पूछताछ की थी. सोशल मीडिया पर भी इसकी खासी चर्चा हुई थी.

हाईकोर्ट में चेयरपर्सन के खिलाफ दायर की गई है याचिका



दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफर-उल-इस्लाम खान के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. दायर की गई इस याचिका में जफर-उल-इस्लाम खान को उनके पद से हटाने की मांग की गई है. दरअसल जफर-उल-इस्लाम खान के खिलाफ कथित राजद्रोह और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. इस याचिका पर 11 मई को सुनवाई होने की संभावना है.
इसमें आरोप लगाया गया है कि 28 अप्रैल को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक पेज से कथित राजद्रोही और नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों भरा एक पोस्ट किया था. बैंक के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारी सुभाष चंद्र की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि दो मई को एक शिकायत पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने खान के खिलाफ आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया है.

'भड़काऊ टिप्पणी पर कायम हैं खान'

याचिका दाखिल करने वाले वकील कहना है, 'प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद प्रतिवादी संख्या चार (खान) ने तीन मई को कहा कि वो अपनी टिप्पणी पर कायम हैं. उन्होंने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने यह गलत खबर दी है कि उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है.' याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पोस्ट से स्पष्ट है कि यह 'भड़काऊ था, जानबूझकर किया गया था और राजद्रोही था, जिसका उद्देश्य समाज में वैमनस्य (नफरत) फैलाना और दरार पैदा करना था.' इस याचिका में खान को पद से हटाने के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग, दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) को निर्देश देने की मांग की गई है.

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