दिल्ली दंगों की साजिश मामले में 17 सितंबर तक दाखिल किया जाएगा आरोपपत्रः एसएन श्रीवास्तव
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दिल्ली दंगों की साजिश मामले में 17 सितंबर तक दाखिल किया जाएगा आरोपपत्रः एसएन श्रीवास्तव
उन्होंने कहा, ‘‘ यह इस बात का पहला संकेत है कि साजिश रची गयी थी जिसके कारण यह सब शुरू हुआ.’’ (फाइल फोटो)

एसएन श्रीवास्तव (SN Srivastava) ने यह भी कहा कि पुलिस जिन लोगों की जांच कर रही है, उनमें कुछ की काफी अच्छी सोशल मीडिया मौजूदगी है.

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  • Last Updated: September 15, 2020, 11:00 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव (SN Srivastava) ने सोमवार को कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे की साजिश की जांच पूरी होने के करीब है और इस सिलसिले में बृहस्पतिवार तक आरोपपत्र दाखिल (Charge Sheet) किया जाएगा. पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा) प्रमोद सिंह कुशवाहा (Pramod Singh Kushwaha) ने भी कहा कि दंगे ‘सुनियोजित साजिश’ के नतीजे थे क्योंकि जांच के दौरान पुलिस को सीएए विरोधियों का एक जैसा पैटर्न नजर आया: सड़क जाम कर दो.


उन्होंने कहा, ‘‘ यह इस बात का पहला संकेत है कि साजिश रची गयी थी जिसके कारण यह सब शुरू हुआ.’’ इन दोनों अधिकारियों ने वेबीनार में अपनी बात कही. श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि पुलिस जिन लोगों की जांच कर रही है, उनमें कुछ की काफी अच्छी सोशल मीडिया मौजूदगी है. उन्होंने कहा, ‘‘ चूंकि हम जांच के आखिरी छोर पर पहुंच रहे हैं, उमर खालिद भी गिरफ्तार किया जा चुका है. इसलिए खासकर सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर अधिक शोर मचाया जा रहा है. वे जांच से चमक छीन लेने की कोशिश कर रहे हैं.’’ पुलिस आयुक्त ने कहा कि 751 मामले दर्ज किये और बहुत निष्पक्ष तरीके से जांच की गई. इस वेबीनार का आयोजन दिल्ली पुलिस ‘रिटायर्ड गजेटेड ऑफिसर्स एसोसिएशन’ ने किया.




गिरफ्तारी का कई बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है
वहीं, कुछ देर पहले खबर सामने आई थी कि दिल्‍ली दंगों में संलिप्‍तता के आरोप में उमर खालिद की गिरफ्तारी का कई बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है. इनका कहना है कि उस पर लगाए गए अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम को हटाया जाना चाहिए. इसके साथ ही 9 रिटायर्ड आईपीएस अफसरों की ओर से भी दिल्‍ली दंगों की जांच पर अंगुली उठाई गई है.


36 लोगों ने भी इसका विरोध किया है
9 आईपीएस के अलावा सैयदा हमीद, अरुंधति रॉय, रामचंद्र गुहा, टीएम कृष्णा, वृंदा करात, जिग्नेश मेवाणी, पी साईनाथ, प्रशांत भूषण और हर्ष मंदर समेत करीब 36 लोगों ने भी इसका विरोध किया है. उन्‍होंने एक बयान में कहा, 'संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नागरिकों के रूप में हम उमर खालिद की गिरफ्तारी की निंदा करते हैं. सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाया गया. गहरी पीड़ा के साथ हमें यह कहने में कोई संदेह नहीं है कि यह जांच हिंसा के बारे में नहीं है, बल्कि पूरे देश में असंवैधानिक सीएए के खिलाफ पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के विरोध में है.'



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