पी. चिदंबरम ने अमित शाह से पूछा, यदि अल्पसंख्यक CAA से प्रभावित नहीं होंगे, तो मुस्लिम इससे बाहर क्यों
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पी. चिदंबरम ने अमित शाह से पूछा, यदि अल्पसंख्यक CAA से प्रभावित नहीं होंगे, तो मुस्लिम इससे बाहर क्यों
संशोधित नागरिकता कानून को लेकर पी चिदंबरम ने ट्वीट कर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल पूछे हैं. (फाइल फोटो)

कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने कहा कि, यदि CAA का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यकों को लाभ पहुंचाना है, (जैसा कि गृह मंत्री कहते हैं कि इससे कोई प्रभावित नहीं होगा) तो उन्हें देश को बताना चाहिए कि सीएए से कौन प्रभावित होगा?

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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) को लेकर रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पर जमकर निशाना साधा. अमित शाह ने कहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी व्यक्ति संशोधित नागरिकता कानून (CAA) से प्रभावित नहीं होगा, उनकी इसी बात पर निशाना साधते हुए चिदंबरम ने पूछा कि ऐसा है तो फिर मुसलमानों को इस कानून से बाहर क्यों रखा गया है?



... तो सरकार ने कानून क्यों पारित किया
कोलकाता में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आश्वासन दिया था कि संशोधित नागरिकता अधिनियम (CAA) के कारण किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं जाएगी. पूर्व वित्त मंत्री ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट कर पूछा कि, ‘गृह मंत्री का कहना है कि CAA से कोई अल्पसंख्यक प्रभावित नहीं होगा. अगर यह सही है, तो उन्हें देश को बताना चाहिए कि सीएए से कौन प्रभावित होगा. अगर सीएए से कोई भी प्रभावित नहीं होगा, जैसा कि वर्तमान में है, तो सरकार ने कानून क्यों पारित किया?'



अल्पसंख्यकों की सूची से मुस्लिम बाहर क्यों
चिदंबरम से पूछा, ‘यदि संशोधित नागरिकता कानून (CAA) का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यकों को लाभ पहुंचाना है (गृह मंत्री के अनुसार, कोई भी प्रभावित नहीं होगा), तो मुसलमानों को अधिनियम में उल्लिखित अल्पसंख्यकों की सूची से बाहर क्यों रखा गया है?’

क्या है सीएए
संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

क्या है एनआरसी
एनआरसी यानी नेशनल सिटिजन रजिस्टर के जरिए भारत में अवैध तरीके से रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जाती है. अभी तक एनआरसी की प्रक्रिया सिर्फ असम में की गई है. असम में एनआरसी की फाइनल सूची जारी की जा चुकी है लेकिन असम में एनआरसी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी की गई है. केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पूरे देश में NRC को लागू करेगी. साथ ही यह भी कहा था कि देश भर में लागू होने वाली एनआरसी के मानक असम की एनआरसी के मापदंड से अलग होगा.

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