Kisan Andolan: अन्नदाताओं के समर्थन में CM अरविंद केजरीवाल का उपवास, भाजपा ने बताया 'पाखंड'

अरविंद केजरीवाल पर भाजपा ने निशाना साधा है.

किसानों के समर्थन में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं ने उपवास रखा है.

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    नई दिल्‍ली. केंद्र के नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है. वहीं, किसानों के समर्थन में आज कई राजनीतिक दिलों ने उपवास रखा है. इसी बीच अन्नदाताओं के समर्थन में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं ने उपवास रखा है. इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि दुख होता है जब किसानों को बदनाम करने के लिए कहा जाता है कि किसान आतंकवादी हैं, देशद्रोही हैं, किसान टुकड़े-टुकड़े गैंग और चीन-पाकिस्तान के एजेंट हैं. बता दूं इन्हीं किसानों के भाई-बेटे चीन और पाकिस्तान के बॉर्डर पर बैठकर देश की सुरक्षा कर रहे हैं.

    घर पर बैठकर ही करली प्रार्थना: अरविंद केजरीवाल
    इसके अलावा दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले हफ्ते मैं भी किसानों के पास जाना चाह रहा था लेकिन इन्होंने मेरे दरवाजे बंद कर दिए मुझे जाने नहीं दिया. लेकिन हमें क्या फर्क पड़ता है हमने घर पर बैठकर ही किसानों के आंदोलन की सफलता के लिए प्रार्थना कर ली. आज पूरी आम आदमी पार्टी उपवास पर बैठी है.



    भाजपा ने किया पलटवार
    केजरीवाल के बयान पर भाजपा नेता संबित पात्रा ने पलटवार किया है. उन्‍होंने कहा कि आप तो वही अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी हैं न जिसने जब पंजाब में चुनाव हुआ था तो अपने मेनिफिस्टो में घोषणा की थी कि अगर पंजाब में हम सत्ता में आ जाएंगे तो बिचौलियों को हटा देंगे और APMC के जो कानून हैं उनमें सुधार करेंगे और आज आप भूख हड़ताल पर बैठ गए. इससे पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केजरीवाल के उपवास के ऐलान को पाखंड बताते हुए कहा कि उन्होंने खुद नवंबर में ही एक कृषि कानून को दिल्ली में अधिसूचित किया था, ऐसे में वो विरोध कैसे कर रहे हैं.



    बता दें कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों के किसान कृषि कानूनों का कड़ा विरोध कर रहे हैं. वो पिछले उन्नीस दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर जमे हुए हैं. किसानों ने केंद्र सरकार से इन कानूनों को तुरंत रद्द करने की मांग की है. इस समस्या और गतिरोध को सुलझाने के लिए 40 किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच छह दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका है.

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