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शिक्षक द्वारा पिटाई से बच्चे की मौत, क्या है कानून? 12 पॉइंट में जानें प्रावधान

छात्रों को शारीरिक दंड देना कानून की दृष्टि से जुर्म है.

छात्रों को शारीरिक दंड देना कानून की दृष्टि से जुर्म है.

बच्चों की पिटाई के मामलों में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 यानि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू क ...अधिक पढ़ें

नोएडा. शिक्षक द्वारा की गई निर्मम पिटाई से छात्र-छात्राओं की मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल में ही उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में थाना बादलपुर क्षेत्र के बंबावड़ गांव में स्थित एक पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले पांचवीं कक्षा के छात्र की स्कूल टीचर ने कथित तौर पर पिटाई कर दी थी. इसके बाद इलाज के दौरान छात्र की मौत हो गई थी. इससे पहले भी ऐसी कई खबरें सामने आती रही हैं. लेकिन, क्या आपको पता है कि भारत में बच्चों की पिटाई को लेकर कई कानून भी है और शारीरिक दंड दिए जाने को लेकर पूरी तरह से रोक है?

दरअसल, विकृत मानसिकता के शिक्षक ही बच्चों की पिटाई करते हैं. नियम तो यह है कि स्कूल में बच्चों को शारीरिक दंड की जगह मनोचिकित्सक तरीके से सजा दी जा सकती है. स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सीबीएसई के भी नियम हैं. इनका उल्लंघन होने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है. नियम के तहत स्कूल में काम करनेवाले स्टाफ का स्थानीय पुलिस से सत्यापन होना चाहिए था. सेफ्टी ऑडिट करनी चाहिए.

बच्चों की पिटाई के मामलों में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 यानि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू किया है. लेकिन इसके अलावा भी देश में कई कानून और गाइडलाइनंस हैं जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में के प्रावधानों को जानें.

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  1. शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 17 के तहत किसी भी तरह के शारीरिक दंड, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
  2.  जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 75 में कहा गया है कि बच्चे की देखभाल और उनकी सुरक्षा स्कूल की जिम्मेदारी होगी. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 82 के तहत भी जेल और जुर्माने का प्रावधान है.
  3. कई बार ऐसे मामले भी आते हैं कि बच्चों के मां-बाप की शिकायत को स्कूल प्रबंधन नहीं मानते हैं. ऐसे में नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स यानी एनसीपीसीआर में जाकर भी शिकायत की जा सकती है.
  4. एनसीपीसीआर बच्चों की सुरक्षा के लिए कई गाइडलाइंस जारी कर चुका है. जैसे स्कूल में जिन लोगों को नौकरी पर रखा जाता है, उनका पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से हो.
  5. स्टाफ से एफिडेविट लेना. वह पहले से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी नहीं होना चाहिए.
  6. CBSE की गाइडलाइंस के तहत अगर स्कूल किसी भी नियम का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है.
  7. सीबीएसई ऐसी घटनाओं को लेकर कई बार स्कूलों को धारा 82 से अवगत करवाते आया है. धारा 82 (1) के तहत फिजिकल पनिशमेंट देने पर शिक्षक को 10 हजार रुपए का जुर्माना हो सकता है.
  8. अपराध दोहराने पर तीन महीने की जेल का भी प्रावधान है. धारा 82 (2) के तहत शिक्षक को सस्पेंड कर दिया जाता है. वहीं धारा 82 (3) के तहत अगर जांच में सहयोग नहीं किया तो तीन माहीने की सजा का प्रावधान है.
  9. स्कूल पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा. इसके अलावा भारत में जुवेनाइल जस्टिस नियम की धारा 23 के मुताबिक बच्चों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं की जा सकती है.
  10. शिक्षा का अधिकार (RTE) की धारा 17 के तहत बच्चों को सजा देने पर पूरी तरह प्रतिबंध है. बच्चों के साथ गलत व्यवहार करने पर 2012 में एक विधेयक पारित किया गया है, जिसके मुताबिक बच्चों को शारीरिक दंड देने पर शिक्षक को 3 साल की जेल हो सकती है.
  11. IPC की धारा के तहत भी कार्रवाई- बच्चों की पिटाई के मामले में मां-बाप पुलिस में भी शिकायत कर सकते हैं. आईपीसी की धारा 323 (मारपीट), 324 (जख्मी करना), 325 (गंभीर जख्म पहुंचाना) के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है.
  12. धारा-325 तहत आरोप सिद्ध होने पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है. अगर बच्चे पर जानलेवा हमला किया गया हो तो फिर धारा-307 लगाया जा सकता है इसमें अधिकतम 10 साल या फिर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

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