ईसाई समुदाय के लोगों का Ghaziabad में नहीं हो पा रहा है अंतिम संस्‍कार, जानें क्‍यों?

यूपी के ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलता दिख रहा है.. (सांकेतिक तस्वीर)

कब्रिस्‍तान में जगह नहीं होने की वजह से गाजियाबाद में ईसाई समुदाय के लोगों का अंतिम संस्‍कार नहीं हो पा रहा है. शवों को दिल्‍ली ले जाना पड़ रहा है.

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    गाजियाबाद. कोरोना (Covid 19) की चपेट में आकर जान गंवाने वाले ईसाई समुदाय (Christian Community) के लोगों का गाजियाबाद (Ghaziabad) शहर में अंतिम संस्‍कार नहीं हो पा रहा है. परिजन शव (death body) को लेकर राजधानी दिल्‍ली के कब्रिस्‍तानों में दफनाने को मजबूर हैं. दिल्‍ली के कब्रिस्‍तानों में पहले से ही शवों की संख्‍या बढ़ चुकी है, ऐसे में कई बार परिजनों को एक से दूसरे कब्रिस्‍तान के चक्‍कर लगाने पड़ रहे हैं. गाजियाबाद ईसाई समुदाय के कब्रिस्‍तान में पहले से ही जगह नहीं बची है और नगर निगम द्वारा दी गई जमीन पर निजी लोगों ने दावेदारी कर दी थी, फिलहाल मामला कोर्ट में चल रहा है.

    कोरोना की वजह से श्‍मशान घाट और कब्रिस्‍तानों में पहले की तुलना में पहुंचने वालों शवों की संख्‍या बढ़ गई है. हिंडन श्‍मशान घाट पर बोर्ड लगाकर शवों को किसी दूसरे श्‍मशान घाट ले जाने की बात कही है. वहीं, ईसाई समुदाय के लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. ईसाई समुदाय के इकलौते कब्रिस्‍तान में पहले से जगह नहीं बची थी. इसी वजह से पूर्व में नगर निगम ने अर्थला में 8160 वर्गमीटर जमीन ईसाई समुदाय के लिए आवंटित की थी, लेकिन जमीन आवंटित होने के बाद कुछ स्‍थानीय लोगों ने जमीन पर अपनी दावेदारी कर दी. फिलहाल मामला कोर्ट में चल रहा है.



    गाजियाबाद क्रिश्चियन लीडर्स फेलोशिप के जनरल सेक्रेटरी और पादरी मानेस्वर के अनुसार कोरोना की वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ा है.  कब्रिस्‍तान में जगह न होने की वजह से परिजन शव लेकर दिल्‍ली के कब्रिस्‍तान जा रहे हैं और वहां पर दफना रहे हैं. दिल्‍ली में पहले से ही स्थितियां खराब हैं, ऐसे में गाजियाबाद के शवों भी वहां पहुंच रहे हैं. कई बार कब्रिस्‍तान में लंबी वेटिंग होने की वजह से शव को लेकर एक से दूसरे कब्रिस्‍तान जाना पड़ता है, ऐसे में परिजनों को और पीड़ा होती है.