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चौपाल: सीलमपुर में त्रिकोणीय मुकाबले में कांटे की टक्कर, स्थानीय मुद्दे पर CAA और NRC हावी

Pankaj Kumar | News18Hindi
Updated: January 31, 2020, 3:51 PM IST
चौपाल: सीलमपुर में त्रिकोणीय मुकाबले में कांटे की टक्कर, स्थानीय मुद्दे पर CAA और NRC हावी
दिल्ली की सीलमपुर विधानसभा सीट

सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र (seelampur assembly Seat) को 1993 में विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया था. पहली दफा यहां से जनता दल से मतीन अहमद विधायक चुने गए थे और उन्होंने बीजेपी (BJP) के जयकिशन दास गुप्ता को हराया था

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  • Last Updated: January 31, 2020, 3:51 PM IST
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नई दिल्ली. सीलमपुर विधानसभा (Seelampur Assembly) में कांटे की टक्कर है. लगातार 6 चुनावों में 5 चुनाव जीतने वाले मतीन अहमद एक बार फिर कांग्रेस पार्टी (Congress) से भाग्य अजमा रहे हैं, लेकिन पार्षद से विधानसभा का टिकट पाने वाले आप (AAP) के अब्दुल रहमान के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं. दरअसल साल 2015 के विधानसभा चुनाव में आप (AAP) के टिकट से विजयी रहे मोहम्मद इशराक आप से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. इसलिए सीलमपुर चुनाव के परिणामों में भारी उलट फेर से इनकार नहीं किया जा सकता. ध्यान देने वाली बात यह है कि बीजेपी (BJP) से कौशल मिश्रा मैदान में हैं और इस बार के चुनाव में अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.

सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास
सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र को 1993 में विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया था. पहली दफा इस सीट से जनता दल के मतीन अहमद विधायक चुने गए थे और उन्होंने बीजेपी के जयकिशन दास गुप्ता को हराया था. मतीन अहमद दूसरी बार जनता दल छोड़कर निर्दलीय चुनाव जीते. इसके बाद वो कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के टिकट से साल 2003, 2008 और 2013 में उन्होंने लगातार सीलमपुर से चुनाव जीता. मतीन अहमद के किले में पहली बार साल 2015 में आम आदमी पार्टी के मोहम्मद इशराक सेंध मारी. इशराक ने बीजेपी के संजय जैन और मतीन अहमद को मात दी. इस चुनाव में बीजेपी दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही. वैसे सीलमपुर विधानसभा में हुए छह बार के विधानसभा चुनाव में हमेशा बीजेपी दूसरे नंबर पर रही है.



इलाके की समस्या और जनता की राय
इलाके में सीएए और एनआरसी (CAA-NRC) सबसे बड़ा मुद्दा मालूम पड़ता दिख रहा है. इस मुस्लिम बाहुल इलाके में रह रहे कई मुस्लिम युवकों में CAA को लेकर बीजेपी से काफी नाराजगी है और वो इस कानून को मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव वाला कानून बता रहे हैं. कपड़ा व्यवसायी कासिम का कहना है कि बीजेपी के खिलाफ वोट करना उनकी मजबूरी है, क्योंकि बीजेपी मुस्लिम समुदाय को देश से बाहर निकालना चाहती है. ये पूछे जाने पर कि सीएए (CAA) कानून से देश के किसी नागरिक का कोई लेना देना नहीं है तो कासिम इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं. जाहिर है यहां के कई लोगों में सरकार के प्रति गहरा अविश्वास है.

वहीं पेशे से शिक्षक आमिर कहते हैं कि अरविन्द केजरीवाल जनता के नेता हैं और जनता से जुड़ी बुनियादी समस्याओं पर उन्होंने पूरा ध्यान दिया है. दूसरी ओर इलाके में कुछ लोगों की ठीक इसके उलट राय है. उनके मुताबिक, सीलमपुर इलाके में देश से बाहर के लोगों का सालों से जमावड़ा है, जिन्होंने हाल ही में सीएए (CAA) कानून लागू होने के बाद सड़कों पर उतर कर हिंसा और उत्पात मचाया था. ऐसे बाहरी अराजक तत्वों को पहचानकर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

शंकर जैन सीलमपुर में अवैध कॉलोनी और बांग्लादेश से आकर अवैध रूप से रहने वालों को सबसे गंभीर खतरा मानते हैं. शंकर जैन का कहना है कि इनसे निपटने के लिए बीजेपी फिलहाल सबसे कारगर है इसलिए उनका वोट बीजेपी को ही जाएगा.

हालांकि तवरेज आलम कांग्रेस के हाथ को मजबूत करने का इरादा रखते हैं. उनका कहना है कि मतीन अहमद सबसे अनुभवी और कुशल नेता हैं, इसलिए उनको वोट देकर कांग्रेस का हाथ मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि इलाके और देश में अमन और चैन का माहौल बना रहे. कांग्रेस के पक्ष में वोट देने का दावा करने वाले सीलमपुर निवासी फिरोज और शदाब कहते हैं कि केन्द्र सरकार की खराब आर्थिक नीति और विभाजनकारी नीति से वो खफा हैं और देश में कांग्रेस के अलावा बेहतर शासन देने की क्षमता किसी और में नहीं है.

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First published: January 30, 2020, 8:59 PM IST
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