सीएम केजरीवाल ने बताया खेत में ही पराली गलाने का यह है तरीका, 2000 एकड़ में होगा छिड़काव

नजफगढ़ के इस केन्द्र पर पराली को गलाने वाला घोल बनाया जा रहा है. सीएम अरविंद केरीवाल ने आज इसका उद्घाटन किया.
नजफगढ़ के इस केन्द्र पर पराली को गलाने वाला घोल बनाया जा रहा है. सीएम अरविंद केरीवाल ने आज इसका उद्घाटन किया.

पराली (Parali) के धुंए से मिल सकेगी निजात, सीएम केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal ) ने पराली गलाने हेतु डिकम्पोज़र घोल निर्माण केंद्र' का उदघाटन किया है. नजफगढ़ में तैयार किये जा रहे घोल के छिड़काव से खेत में ही पराली गल जाएगी. घोल बनाकर दो हज़ार एकड़ की खेती में फ्री छिड़काव करवाएगी सरकार.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 2:44 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के नजफगढ़ में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने आज पराली जलाने के लिए डी कंपोजर घोल निर्माण केंद्र का उद्घाटन किया. यहां पर पराली जलाने के लिए एक ऐसा घोल तैयार किया जा रहा है जिस के छिड़काव की मदद से पराली (Parali) खेत में ही डीकंपोज हो जाएगी. सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 700 हेक्टेयर खेती की उस ज़मीन पर इसका छिड़काव करवायेगी जहां पराली जलाई जाती है. दिल्ली सरकार (Delhi Goverment) इसका छिड़काव फ्री में कराएगी. केजरीवाल ने कहा कि हम पड़ोसी राज्यों के सामने एक मॉडल खड़ा करना चाहते हैं, जिससे वो ऐसा प्रयोग करके भविष्य में पराली का निपटारा कर सकें. फ्री छिड़काव में दिल्ली सरकार का 20 लाख रुपए खर्च आएगा

ऐसे  बनाया जा सकता है पराली गलाने का घोल

पराली गलाने के लिए ये घोल कैसे तैयार किया जाता है इसकी विधि भी सीएम केजरीवाल ने बताई है. सबसे पहले एक भगोने में 25 लीटर पानी लेकर उसमें 750 ग्राम गुड़ डालना है. जब पानी में गुड़ पूरा घुल जाए और उबाल आने लगे. उसके बाद उसके बाद चूल्हे से उतारकर ठंडा करना है. जब इसका तापमान सामान्य हो जाये तो उसमें 250 ग्राम बेसन और पूसा द्वारा बनाये गए पूसा डिकम्पोज़र के 20 कैप्सूल मिलाने है.



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फिर 3 दिन तक इसे एक कपड़े से ढक कर रखना है. चौथे दिन इसमें फंगस आ जायेगा. जिसके बाद 25 लीटर पानी मे 750 ग्राम गुड़ का घोल बनाकर इसके मिलाया जाएगा और इस तरह इस घोल की मात्रा 50 लीटर तक बढ़ जाएगी. जिसे 5 एकड़ तक खेती की ज़मीन पर इसका छिड़काव किया जा सकता है. जिसके बाद पराली डिकम्पोज़ हो जाएगी.

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दिल्ली से कम हरियाणा-पंजाब से ज़्यादा आता है धुआं

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली में पराली का धुआं दिल्ली का कम और पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब का ज़्यादा है. पराली खेत में ही बायो डिकम्पोज़ करके हम पड़ोसी राज्यों के सामने एक मॉडल खड़ा करना चाहते हैं. ये पड़ोसी राज्यो की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है कि वो इसका इस्तेमाल करेंगे या नहीं. इस पराली गलाने हेतु डिकम्पोज़र घोल निर्माण केंद्र' में अभी तक 1200 एकड़ ज़मीन के किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है. 2 हज़ार एकड़ खेत में 11 अक्टूबर से इसका छिड़काव शुरू हो जाएगा.

पराली को लेकर यह है लड़ाई

हर साल सर्दी के मौसम में हरियाणा और पंजाब में पराली जलाई जाती है. जिसका धुंआ से दिल्ली एनसीआर के लोगों के लिए मुसीबत बनकर आता है. हर साल सरकारें एक दूसरे राज्य पर इसका ठीकरा फोड़ती आई है. हाल ही में पूसा एग्रीकल्चर इंस्टिट्यूट ने 'पूसा डिकॉम्पोज़' कैप्सूल तैयार किया है जिसे पराली जलाने के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. कैप्सूल से तैयार घोल के छिड़काव की मदद से पराली जलाने के बजाए खेत में नष्ट की जा सकती है.
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