नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने की योजना पर CM बघेल का PM मोदी को खत, निजीकरण को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
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नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने की योजना पर CM बघेल का PM मोदी को खत, निजीकरण को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
सीएम भूपेश बघेल (बाएं) ने पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा. (फाइल फोटो)

सीएम बघेल ने पत्र में लिखा कि राज्य में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगा है. इस प्लांट का निजीकरण होने से नक्सलियों द्वारा आदिवासियों के असंतोष का अनुचित लाभ उठाने की आशंका है.

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  • Last Updated: August 27, 2020, 10:50 PM IST
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नई दिल्ली. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर बस्तर (Bastar) के नगरनार स्टील प्लांट (nagarnar steel plant) के निजीकरण के निर्णय पर पुनः विचार करने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है - एनएमडीसी द्वारा लगभग 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बस्तर स्थित निर्माणाधीन नगरनार स्टील प्लांट का निकट भविष्य में प्रारंभ होना संभावित है. इस स्टील प्लांट के प्रारंभ होते ही बस्तर की बहुमूल्य खनिज संपदा का दोहन बस्तर स्थित एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट में होगा और इससे राष्ट्र निर्माण में सहयोग प्रदान होगा. इस औद्योगिक इकाई के शुरू होने से क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे.

आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहा है

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा - जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौपने की तैयारी में है. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जाए. केंद्र सरकार के इस कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुचेगा. भूपेश बघेल ने बताया कि केंद्र सरकार के इस प्रकार फैसले से आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहा है और इनके मध्य शासन-प्रशासन के विरुद्ध असंतोष की भावना व्याप्त हो रही है.



आदिवासियों के रोष का फायदा उठाएंगे नक्सली
उन्होंने पत्र में लिखा कि राज्य सरकार अथक प्रयासों से नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल हुई है. इन परिस्थितियों में नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण करने से प्रदेश के साथ-साथ बस्तरवासियों को गहरा धक्का लगेगा. इस प्लांट का निजीकरण होने से नक्सलियों द्वारा आदिवासियों के असंतोष का अनुचित लाभ उठाने की आशंका है. नगरनार स्टील प्लांट के लिए लगभग 610 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की गई है, जो 'सार्वजनिक प्रयोजन' के लिए ली गई है. इसके साथ ही नगरनार स्टील प्लांट में लगभग 211 हेक्टेयर सरकारी जमीन आज भी छत्तीसगढ़ सरकार की है. इसमें से केवल 27 हेक्टेयर जमीन 30 वर्षों के लिए सशर्त एनएमडीसी को दी गई है, बाकी पूरी शासकीय जमीन छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व की है और राज्य शासन ने जो जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की है, उसकी पहली शर्त यही है कि उद्योग विभाग द्वारा भूमि का उपयोग केवल एनएमडीसी द्वारा स्टील प्लांट स्थापित किए जाने के प्रयोजन के लिए ही किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के हितों और उनके नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा के लिए पेसा (PESA Act) कानून, 1996 लागू है.

फिर से विचार करने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने बताया कि विगत माह ही राज्य शासन के द्वारा एनएमडीसी का बैलाडिला स्थित 4 लौह अयस्क के खदानों को आगामी 20 वर्ष की अवधि के लिए विस्तारित किया गया है, जिससे कि बस्तर क्षेत्र में रोजगार के नित नए अवसर सृजित होते रहें. इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास को बढ़ावा मिले और यहां की जनता विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मांग की कि केंद्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुनः विचार करे और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में यथावत प्रारंभ कर कार्यरत रहने दे.
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